महात्मा गौतम बुद्ध की प्रेरणादायक कहानी मनुष्य की इच्छाशक्ति

गौतम बुद्ध की कहानी  एक व्यक्ति ने महात्मा गौतम बुद्ध से  पूछ की ? पहाड़ से कठोर क्या है?

 महात्मा  गौतम बुद्ध ने  कहा की,”पर्वत से कठोर लोहा है ।क्योंकि लोहे  की छैनी। पत्थर को काट शक्ति है।”

  फिर उस व्यक्ति ने महात्मा गौतम बुद्ध से  पूछा कि लोहे से कठोर क्या है?

  महात्मा गौतम बुद्ध  ने कहा की ,”लोहे से कठोर आग होती         है।  क्योंकि आग  लोहे को भी पिघला सकता है।”
  फिर उस व्यक्ति ने पूछा कि आग से कठोर क्या है?

महात्मा गौतम बुद्ध ने कहा कि,”  आग से कठोर जल है। क्योकि पानी भयंकर से भंयकर आग को शांत कर देता है।”

  फिर उस व्यक्ति ने महात्मा गौतम बुद्ध से  पूछा कि पानी से          कठोर क्या है?
    महात्मा गौतम बुद्ध ने कहा कि ,”पानी से कठोर हवा हैै।          क्योंकि जितने भी बादल हो हवा उड़ा ही ले जाती है।”
    फिर उस व्यक्ति ने महात्मा गौतम बुद्ध  से पूछा कि हवा से कठोर क्या है ?

गौतम बुद्ध ने कहा है कि ,”हवा से कठोर मनुष्य की इच्छा शक्ति होती है। जो बहुत बड़ी बाधा होने पर  उसे पार कर लेती है ।”

 

भगवान गोतम बुद्ध की प्रेरणादायक कहानी। #२

गौतम बुद्ध की कहानी एक बार भगवान बुद्ध सदविचारों का प्रचार करने के बाद राज्य में लौटे लेकिन नगर में सन्नाटा था। उनके अनुयायियों ने बताया भगवन एक राक्षसी को बच्चों का मांस खाने की लत लग गई है। नगर के अनेक बच्चे गायब हो गए हैं ,इससे नागरिकों ने या तो नगर छोड़ दिया है या अभी अपने घरों में दुबके बैठे हैं।


 भगवान बुद्ध को यह भी पता चला कि इस राज्य से कई बच्चे गायब हैं, एक दिन वह खुद राक्षसी की अनुपस्थिति में खेल के बहाने उसके छोटे बच्चे को अपने साथ ले आए।


 रात मे जब  वह घर लोटी तो अपने बच्चे को गायब पाकर बेचैन हो उठी ,सबसे छोटा होने के कारण उसका इस बालक से अधिक लगाव था। बेचैनी ही में उसने अपनी रात काटी सुबह जोर-जोर से उसका नाम पुकार कर उसे ढूंढने लगी। बच्चे को ना पाने की वजह से वह परेशान थी ।


अचानक उसे सामने से भगवान बुद्ध गुजरते हुए दिखाई दिए तो उसने सोचा कि वे भगवान बुद्ध हैं, जरूर उन्हें सबकुछ पता होगा।वह तो अनंतर्यामी हैं।और वह उनके पैरों में गिर कर वह बोली -भगवन मेरा बच्चा कहां है। यह बताइए उसे कोई हिंसक पशु न खा पाए ऐसा आशीर्वाद दीजिए।


 बुद्ध ने कहा इस नगर के अनेक बच्चों को तुमने खा लिया कितनी ही इकलौती संतानों को भी तुमने नहीं बख्शा है, क्या तुमने कभी सोचा कि उनके माता-पिता कैसे जिंदा रह रहे होंगे। बुध के वचन सुनकर वह पश्चाताप की अग्नि में जलने लगी।


 उसने संकल्प किया कि अब वह हिंसा नहीं करेगी भगवान बुद्ध ने उसे समझाया कि वास्तविक सुख दूसरों को सुख देने या दूसरों का रक्त बहाने में नहीं अपितु उन्हें सुख देने में है, उन्होंने उसका बच्चा उसे वापस कर दिया।

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