मूलमंत्र थाॅमस बांटा

                मूलमंत्र (थाॅमस बांटा)

      ” क्या अभी से चिपकाकर कील टोंक दूं बाबू जी ।”छोटा सा लड़का बेसब्री से बोला ।
बाबू जी ने हाथ में चमड़ा पकड़ते हुए जवाब दिया, “नहीं बेटा ! अभी इतनी जल्दी नहीं । पहले उसे सूखकर चिपक जाने दो। जल्दबाजी करने से जूते का तला दो-चार दिनों में हूं फिर से अलग हो जाएगा।” 
लड़का उठकर बाहर गली में निकल इधर-उधर देखने लगा । पांच मिनट नहीं बीते थे की फिर से पूछने लगा, ,” अब किल ठोंक दू।”
” नहीं बेटा , थोड़ा सब्र करो। देखो, जो काम करो ढंग से करो ,अच्छा करो ,पूरी लगन से करो।” 


         

              कुछ ही दिनों में लड़का जूतों की मरम्मत के काम को सीख गया ।लड़के ने सोचा कि क्यों ना वह अलग से यही काम करके थोड़े पैसे अपने बलबूते पर कमा कर अपने परिवार को गरीबी दूर करने में मदद करें। लड़के ने सड़क के किनारे एक बरगद के पेड़ के नीचे अपने बैठने के लिए जगह खोज ली ।
सड़क पर काफी लोगों का आना जाना था। वह जूते पॉलिश करता, मरम्मत करता , लेकिन छोटा बड़ा कम पूरी लगन से,मेहनत से ,तसल्ली से इमानदारी से करता। 
              

                 जो आदमी एक बार उससे काम करवा लेता, उसका हमेशा के लिए ग्रहक बन जाता। धीरे धीरे लोग उसके काम की प्रशंसा करने लगे। उसके पास बहुत काम आने लगा, पर स्थान की कमी के कारण उसे बहुत से लोगों को लौटा देना पड़ता था।
    

          किसी ने उसे सलाह दी कि सामने बाजार में एक दुकान खाली है।उसे किराए पर लेकर काम बढ़ाया जा सकता है। 
  उसने सलाह मानकर दुकान किराए पर ले ली। उसके पास एक दुकान हो गई। जूते रखने के लिए स्थान की कमी ना रही ।मदद के लिए उसने एक दो आदमी भी रख लिए ।काम कितना भी ज्यादा क्यों न हो, वाह जल्दबाजी नहीं करता था। बाबूजी की सीख को उसने अपने जीवन का मूल मंत्र बना लिया था ।जितना काम करता हमसे अच्छे से खत्म करता। 
   

             एक दिन किसी ने फिर सलाह दी,” तुम नए जूते क्यों नहीं बनाते? तुम्हारे बनाए जूते मजबूत होंगे। तुम्हारा काम अच्छा है। लोग तुम्हारे बनाए जूते खुशी खुशी खरीद लेंगे ।”लड़के के मन में बात बैठ गई ।वैसे भी वह काम में इतना व्यस्त रहता था कि कहीं आता जाता नहीं था। वह कुछ पैसे बचा ही लेता था । थोड़ी सी अपनी जमा पूंजी से उस लड़के ने वहीं दुकान पर छोटा सा कारखाना लगा लिया ।उसकी लग्न इमानदारी और मेहनत के कारण उसके जूतों की प्रसिद्धि बढ़ती गई। 

          जैसे जैसे लड़का बड़ा होता गया, वैसे वैसे उसके कारखानों की संघ या बढ़ती गई ।लोग उसके जूतों को उसी के अपने नाम से जानने लगे। क्या आप जानना चाहेंगे कि उस लड़के का क्या नाम था ?उसका नाम था-‘थाॅमस बांटा’।

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