महात्मा गौतम बुद्ध की प्रेरणादायक कहानी

 

महात्मा गौतम बुद्ध की प्रेरणादायक कहानी ३     

             

एक बार गौतम बुध यात्रा करते हुए एक गांव में पहुंचे ।वहां जब लोगों को गौतम बुद्ध के आने की खबर मिली।तो बहुत सारे लोग उनका उपदेश सुनने के लिए एकत्रित हो गए।

 

लोगों से बातचीत का सिलसिला शुरू हुआ,। एक जिज्ञासु ने गौतम बुद्ध से सवाल पूछा ,आपने अब तक आत्मा के बारे में कुछ भी नहीं बताया कृपया हमें बताइए क्या आत्मा होती है ?यह सवाल सुनकर गौतम बुद्ध चुप हो गए उन्होंने आंखें बंद कर ली।

         

गौतम बुद्ध के शिष्य भी उनके साथ आए थे ।उन्हें पता था कि इस प्रश्न का कोई उत्तर नहीं है। क्योंकि उन्होंने कई बार गौतमबुद्ध से यह प्रश्न पूछे थे। जैसे मरने के बाद आत्मा कहां जाती है? स्वर्ग कैसा होता है ?

परमात्मा कैसे दिखते हैं ?इत्यादि तब वे चुप रहते थे।और वे कहते तथागत ने इस बात को अव्यक्त रखा है।
    इस बार भी गौतम बुद्ध ने कोई जवाब नहीं दिया। और आंखें बंद कर ली कुछ क्षणों में उन्होंने आंखें खोली ।और वहां उपस्थित सभी लोगों को संबोधित करते हुए कहा ।

यदि किसी इंसान को तीर लगी हो तो वह पूछेगा,कि तीर चलाने वाला कौन था? किस कमान से उसे चलाया गया था ?तीर किस धातु का बना हुआ था? तीर पर कौन सा जहर लगा हुआ था? इस जहर से कितनी जल्दी मृत्यु होती है ?पहले यह जानकारी लाओ फिर तीर निकालो ।नहीं पहले तीर निकालने का प्रयास करना चाहिए। बाद में उसकी बातों पर सोचा जा सकता है पहले दुख से मुक्त हो जाए ।फिर बुद्धि विकास की बातें करें यह बात सुनकर वहां उपस्थित लोगों को गौतम बुद्ध की बात समझ में आई।ऐसी बातों में समय गंवाने से  पहले दुख से मुक्ति पाने का प्रयास करना चाहिए।
        

एक बार जंगल में यात्रा करते वक्त इसी बात को समझाने के लिए। गौतम बुद्ध ने जमीन पर पड़े हुए कुछ पत्ते अपने मुट्ठी में उठाए।और कहां जितने पत्ते मेरी मुट्ठी में है उससे कई गुना ज्यादा इस जंगल के पेड़ों पर है। मैंने आप सब को इतना ही ज्ञान दिया जितना आवश्यक है ।जितना मेरी मुट्ठी में है इससे ज्यादा ज्ञान मेरे पास है।

लेकिन आप की मुक्ति के लिए जरूरी नहीं है ।आप केवल इन्हीं सिद्धांतों पर काम करो और दुख से मुक्त हो जाओ। बेकार के बुद्धि विलास में न उलझो।और समय का सदुपयोग करो यही ज्ञान आप को मुक्त करायेगा ।
          

इस प्रकार भगवान बुद्ध ने पहला बोध अपने पांच साथियों को दिया। उसके बाद वे चारों अपने साथियों के साथ सत्य प्रसार में निकलते हैं।

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