हर चीज की सही जगह | हिंदी कहानी

हर चीज की सही जगह

      बेचारी सीमा परेशान थी। स्कूल जाने का समय हो गया था,पर उसे अपने जूते नहीं मिल रहे थे।सीमा को परेशान देख मम्मी रसोई घर का काम छोड़ दौड़कर उसके पास आई।

            

 

                 मम्मी ने सीमा से बोला कल तुमने स्कूल से आकर जूते कहां उतारे थे। पर सीमा को कुछ याद हो तो बताएं ,बहुत ढूंढने के बाद आखिर में रीमा दीदी को उसके जूते नजर आए ,वह सोफे के नीचे एक कोने में पड़े थे ।

            सीमा ने जूते देखे तो चल पड़ी,और बोली हां कल स्कूल से आकर मैं यहीं बैठकर स्कूल का काम कर रही थी। तब मैंने जूते यही जूते उतारे थे । मम्मी ने कहा सीमा अगर तुम्हें यह बात पहले याद आ जाती तो क्यों इतनी परेशानी होती ।

         पापा बोले पर इससे भी बढ़िया बात है कि स्कूल से आकर जूते रखने की एक जगह बना लो ,बस फिर कभी खोयेगे ही नहीं ।सीमा सोचती है कि हां मैं ऐसा ही करूंगी और रोज भूल जाती है।

 

     आज ना मिलते तो क्या हाल होता। आज तो उसका हिंदी का पेपर था और आज ही मुसीबत ।कितना मूड खराब हुआ। सीमा स्कूल जाते जाते यह सोच रही थी ।अगले दिन स्कूल से घर आकर सीमा ने अपने जूते ठीक उसी जगह उतारे जहां मम्मी ने कहा था जूते उतारने के बाद उसने जुराबें भी सही जगह पर रखें यही नहीं बल्कि अपना स्कूल का बैग भी उसने सही जगह रखा कपड़े उतारने के बाद उसे उसने सही करके अलमारी में रखे।

          मम्मी यह सब देख रही थी ।और सोच रही थी आज तो सीमा बदल गई है।मम्मी ने सीमा से कहा ,आज तो तुमने अपनी सारी चीजें सही जगह रखी है यह सुनकर सीमा बहुत खुश हुई मम्मी ने फिर सीमा को अपने पास बुलाया, और कहा तुम एक अच्छी लड़की बन गई हो ,और तुम्हें किसी चीज के लिए कभी परेशान नहीं होना पड़ेगा। 

 

 

 

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