Akbar Birbal ki rochak kahani अकबर बीरबल की रोचक कहानी

 

Akbar Birba ki rochak kahani अकबर बीरबल की रोचक कहानी

कंजूस व्यापारी

 

अकबर के राज्य में दीनानाथ नाम का एक व्यक्ति रहता  था।दीनानाथ एक प्रतिभाशाली चित्रकार था वह चित्र बनाकर अपना जीवन व्यतीत करता था। क्योंकि वह चित्रकारी में बहुत अच्छा था इसलिए वह पूरे राज्य में प्रसिद्ध था। दूरदराज के क्षेत्रों के अमीर लोग उससे अपना चित्र बनवाने आते थे।

     दीनानाथ एक चित्र बनाने में बहुत समय लगाता था क्योंकि वह उसकी पूरी जानकारी एकत्रित करता था। और इसी कारण उसे  चित्र बनाने में समय अधिक लगता था। उसके बनाए गए चित्र जिवित लगते थे।कि मानो अभी बोल पड़ेंगे इसी वजह से वह पैसे नहीं कमा पाता था।और कमाया हुआ अपना धन वह चित्र बनाने के लिए कच्चे माल की खरीद में खर्च कर देता था।

    Akbar and Birbal

 एक दिन एक अमीर व्यापारी ने दीनानाथ से चित्र बनवाने के लिए उसे बुलवाया।दीनानाथ इस उम्मीद से व्यापारी के पास गया कि वह उसके चित्र बनाने के अच्छे पैसे देगा। दीनानाथ कुछ दिनों के लिए व्यापारी के यहां रुका और व्यापारी की चित्र बनाने में उसने बहुत ही मेहनत की। किंतु व्यापारी बहुत ही कंजूस व्यक्ति था वह दीनानाथ को उसकी मेहनत की पूरे पैसे नहीं देना चाहता था।क्योंकि चित्र तो उसने बहुत ही सुंदर बनाए थे।अगर व्यापारी उसके चित्रकारी की तारीफ करता तो उसे सोने के 100 सिक्के अदा करने पड़ते।इसलिए व्यापारी ने चित्र में गलतियां ढूंढना शुरू किया। उसने उसे कहा कि तुमने मेरे बाल सफेद कर दिए हैं मुझे तुमने बुरा बना दिया है इसलिए मैं इसके पूरे पैसे नहीं दूंगा।

   दीनानाथ हैरान हो गया कि उसकी इतनी मेहनत करने के बाद भी व्यापारी उसमें कमियां निकाल रहा है।वह समझ गया कि व्यापारी उसे पैसे नहीं देना चाहता है। दीनानाथ ने व्यापारी से कहा कि मैं फिर आपकी चित्र बना देता हूं दीनानाथ ने फिर व्यापारी का चित्र बनाया। और उसने दोबारा उसके चित्र में कमियां निकालना शुरू कर दिया।

    दीनानाथ अब पूरी तरह समझ गया था।  यह मुझे उल्लू बनाना चाहता है इसलिए वह बीरबल के पास गया। और उसने सारी बात बीरबल को बतायी।

Akbar and Birbal

  बीरबल ने दीनानाथ से कहा,”ठीक है दीनानाथ !तुम इस आदमी का दूसरा चित्र बनाओ जैसे ही तुमको पसंद है। फिर वह व्यापारी की ओर घूमे और बोले कृपया आप कल आना और अपना चित्र प्राप्त कर लेना। किंतु आपको एक हजार सोने के सिक्के अदा करने होंगे। क्योंकि मैंने देखा है कि दीनानाथ जब कोई चित्र बनाता है तो उसमें कोई गलती नहीं होती। 

   व्यापारी ने सोचा एक दिन में जो चित्र बनाएगा उसमें मुझे गलतियां ढूंढने में ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ेगी। अगले दिन व्यापारी आया तो बीरबल उसे एक कमरे में ले गए। जहां कमरे में एक चित्र रखा था वह कपड़े से ढका हुआ था। बीरबल ने व्यापारी से कपड़ा हटाने के लिए कहा। व्यापारी ने कपड़ा हटाया तो वह आश्चर्यचकित रह गया। यह एक चित्र नहीं बल्कि शीशा था।

        बीरबल ने कहा यह बिल्कुल आप की तरह है मुझे उम्मीद है कि आपको इसमें कोई गलती नहीं मिलेगी। व्यापारी ने महसूस किया कि वह बीरबल से हार मान गया उसने चित्रकार को चित्र के एक सौ सोने के सिक्के दिए।और उसके अलावा उसे शीशे के लिए भी एक हजार सोने के सिक्के देने पड़े।

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      अकबर और बीरबल की रोचक कहानी

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