Vikram betal ki kahani in Hindi विक्रम बेताल की कहानी

 विक्रम बेताल की कहानी

Vikram betal ki rochak kahani
विक्रम वेताल

गुणवान भाई

रूपमंजरी के विषय में सही फैसला लेते ही। बेताल विक्रम के कंधे से उड़कर पीपल के वृक्ष पर पुनः लटक गया राजा विक्रमादित्य उसे उस पेड़ से उतारते हैं।और अपने कंधे पर डालकर आगे बढ़ते हैं।

विक्रम जैसे ही उसे लेकर आगे बढ़ते हैं बेताल ने राजा से कहा,” तुम कभी हार नहीं मानते हो” राजा मुस्कुराए और बेताल ने फिर अपनी कहानी सुनाना शुरू की

   पाटलिपुत्र में एक विद्वान ब्राह्मण रहता था विनम्र और धार्मिक था। उसकी दो संताने थी। जोअपने पिता की तरह बहुत धार्मिक थे उनमें जन्म से ही अद्भुत गुण थे। उसके बड़े पुत्र में लोगों के चरित्र पहचानने की शक्ति थी और छोटे पुत्र में किसी भी वस्तु को सुघंकर पहचान लेने के गुण थे।

   Vikram betal ki kahani

 बड़े पुत्र की शक्ति से वह दूसरों को उनके इरादे बताकर सावधान कर देता था। धीरे धीरे ब्राह्मण के दोनों पुत्रों का की ख्याति चारों तरफ फैलने लगी।राजा के कान तक यह बात पहुंची। राजा ने दोनों को सुना और समझा और अपने यहां उन्हें विशेष सलाहकार के रूप में रख लिया।

दोनों भाई राजा के निर्णय लेने में उनकी मदद करने लगे। राजा जब दूसरे राजा महाराजाओं के साथ वार्ता करते थे।तो वह दोनों ब्राह्मण पुत्र उनके साथ जाया करते थे।

एक दिन राजा दूसरे राज्य में भ्रमण के लिए गए ।वहां उनका बहुत ही अद्भुत स्वागत हुआ। राजा के सम्मान में  वहां पर कई रंगारंग कार्यक्रम आयोजित किए गए।

राजा और उनके साथ आए लोगों ने भोज और कार्यक्रम का खूब आनंद उठाया राजा बहुत थक गए थे ।आराम करने के लिए राजकीय अतिथि गृह में गए।वह अतिथि गृह भी बहुत सुंदर सजाया गया था। राजा दोनों भाइयों के साथ आरामग्रह में प्रवेश करते हैं प्रवेश करते ही बड़े भाई ने राजा से कहा कि मुझे कुछ तो गड़बड़ लगती है महाराज मुझे इस राज्य के राजा पर शक है कि वह आप से नफरत करता है।और आप को मारना चाहता है।

उसकी बात सुनकर राजा आश्चर्यचकित हुए और ब्राह्मण पुत्र को कहा क्या बकवास कर रहे हो, राजा ने हमारा का कितना ख्याल रखा है। तुम्हें लगता है कि वह हमें नुकसान पहुंचाने की योजना बना रहे हैं ।मुझे लगता है तुम्हारा दिमाग खराब हो गया है।राजा बिस्तर पर बैठकर तकिया उठाने के लिए झुके ही थे। कि बड़े भाई ने उनका हाथ पकड़ लिया।

  उसने कहा “मुझे माफ़ करें महाराज,पर मुझे कुछ अजीब सा लग रही है इस तकिए पर सोने से पहले आपको इसकी जांच जरूर करवा लेनी चाहिए।”

    राजा परेशान और हो गए। बड़े भाई की बात मानते हुए। छोटे भाई से तकनीकी जांच करने के लिए बोला। छोटे भाई ने तकिए को सुघां और कहां महाराज तकिए में जानवरों के बाल हैं, और बाल इतने नुकीले हैं कि अगर चमड़ी में चुभेंगे तो चमड़ी काट देंगे ।तकिए के किनारे लेस पर जहर लगे हुए हैं ।जिसे छू जाने मात्र से आपकी जान जा सकती है।

Vikram betal ki kahani

राजा ने तकिए को हाथ भी नहीं लगाया और सारी रात बिना तकिए के ही बिताई सुबह वह चुपचाप अपने राज्य को चल पड़े। और अपने साथ उस तकिए को भी लाए थे उन दोनों भाइयों की बात साबित करने के लिए उन्होंने तकिए की।जांच करवाई ।और उसमें यह बात सत्य निकली राजा खुश हुए और दोनों भाइयों को बहुत सारा इनाम दिया।

  बेताल की कहानी पूरी हुई।तब बेताल ने राजा विक्रमादित्य पूछा कि बताइए दोनों भाइयों में से कौन अधिक चतुर और बुद्धिमान है। मुस्कुराते हुए राजा ने उत्तर दिया बड़ा भाई जिसने मेजबान के गलत इरादे को भांप लिया था।उसी ने तकिए को भी पहचाना था छोटे भाई ने तो बाद में बड़े भाई की बात को सही बताया था। बेताल जोर जोर से हंसने लगा बेताल को बहुत मजा आने लगा था। उसने राजा विक्रमादित्य से कहा उत्तर बिल्कुल सही है। और फिर वह उनके कंधे से उड़कर उस पेड़ पर जाकर लटक गया।

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