Vikram betal ki kahani in Hindi

        Vikram betal ki kahani in Hindi विक्रम बेताल की कहानी

बहुत पुरानी बात है मिथिला में उदयादित्य नामक एक बुद्धिमान राजा थे ।वह अपनी प्रजा को बहुत प्रिय थे। उनकी प्रजा उन्हें उनकी दयालुता, समानता तथा न्यायप्रियता के लिए बहुत पसंद करती थी।

    राजा की एक पुत्री थी जिसका नाम रूपमंजरी था जो बहुत सुंदर और बुद्धिमान थी। जब वह विवाह योग्य हुई उसके विवाह के लिए अनेक रिश्ते आने लगे। राजा और रानी अच्छे वर की तलाश करने लगे । सभी रिश्ते एक से बढ़कर एक थे। उनके लिए समस्या खड़ी हो गई।
 

एक दिन राजा अपने सजे हुए दरबार में बैठे थे। तभी वहां एक राजकुमार आया और राजा से अभिवादन करके विनम्र पूर्वक बोला मैं कलिंग राज्य का राजकुमार हूं। मैं आपकी पुत्री रूपमंजरी से विवाह करना चाहता हूं। राजा ने कहा मैं तुम्हारा सम्मान करता हूं।और कलिंग हमारा मित्र राज्य है।यदि मैं अपनी पुत्री का विवाह तुमसे कर दूं तो हमारे रिश्ते और मजबूत और गहरे बन जाएंगे। परंतु तुममे ऐसी क्या बात है जो दूसरों में नहीं।

 राजकुमार ने बोला मैं एक योद्धा हूं और अपने गुरु के द्वारा युद्ध विद्या में पारंगत हुं।मैं अपनी सेना का नेतृत्व करता हूं और कई बार युद्ध भूमि जीत चुका हूं राजकुमार की बात सुनकर राजा ने उसे अपने महल में अतिथि के रूप में रहने के लिए कहा।
 

अगले दिन राजसभा में जनकपुर का राजकुमार उपस्थित हुआ।और उसने राजा से राजकुमारी के साथ विवाह करने की इच्छा जताई।और महाराज उदयादित्य से अपनी खूबियां बताइ कि मैंने बहुत सारी धार्मिक पुस्तकें पढ़ी है। और मैं जीवन की सत्य की खोज कर रहा हूं ।राजा राजकुमार से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने उसे भी अपने महल में रहने का आग्रह किया।

तीसरे दिन वैशाली राज्य का राजकुमार दरबार में आया और उसने भी रूपमंजरी से विवाह करने की इच्छा जताई और महाराज से कहा कि मुझे प्राकृत मां का आशीर्वाद मिला है मैं परसों पंछियों की भाषा समझ सकता हूं राजा ने उसके भी गुणों की प्रशंसा की और अपने महल के अतिथि गृह में रहने का आग्रह किया।

चौथे दिन मालव्य राज्य का राजकुमार उपस्थित हुआ।और उसने भी राजकुमारी रूपमंजरी से विवाह करने की इच्छा बताई। और अपने गुणों की प्रशंसा करते हुए उसने कहा कि मैं एक बहुत ही धनी राज्य का राजकुमार हूं।और मेरा मानना है कि धन से ही सब कुछ मिलता है। मैं धन से धन कमा सकता हूं।राजकुमारों की जानकारी प्राप्त करके राजा और रानी बड़े ही असमंजस की स्थिति में आ गए।उन्हें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि वह किसे अपनी पुत्री के योग्य समझें अंत में उन्होंने यह निर्णय राजकुमारी रूपमंजरी पर ही छोड़ दिया। इतना कहकर बेताल रुक गया और राजा से पूछा कि आपको पता है। 

राजकुमारी बुद्धिमान और सुंदर है। वह अपने योग्य किस वर् का चुनाव करेगी।

राजा विक्रमादित्य ने उत्तर दिया यदि राजकुमारी बुद्धिमान है तो वह कलिंग देश की राजकुमार का चुनाव करेंगी । क्योंकि जनकपुर का राजकुमार विद्वान तो है।पर अच्छा शासन नहीं कर सकता।वैशाली के राजकुमार पर देवी की कृपा होगी।। पशु पक्षी की भाषा अच्छे से समझ सकता है परंतु वह युद्ध की स्थिति नहीं समझ सकता यह गुण किस काम का 

मालव्य का राजकुमार अच्छा व्यापारी है। राजा बनने योग्य नहीं यदि राजकुमारी बुद्धिमान है तो वह अपने लोगों की भले के लिए कलिंग देश के राजकुमार को चुनेगी। 

 यह सुनकर बेताल हंसा और राजा विक्रमादित्य के कंधे से उडकर फिर उसी पेड़ पर लटक गया।

                अकबर और बीरबल






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