Kids story in hindi चूहों की धमाचौकड़ी

 

Kids story in hindi चूहों की धमाचौकडी



आधी छुट्टी होते ही लड़कों का झुंड पेड़ों के झुरमुट में खड़ा होकर बातें करने लगा ।सभी लड़के इस बात पर सहमत थे कि जो नए अध्यापक स्कूल आने वाले हैं ,उनसे वह बिल्कुल नहीं पढेंगे,चाहे कुछ भी हो जाए।
नए अध्यापक का नाम भी उन्होंने कहीं से सुन लिया था। नाम था– काली कुमार।
छुट्टियों में सब अपने अपने घर चले गए। सारी छुट्टियां कब मौज-मस्ती में निकल गई पता ही नहीं चला । खाजैसे ही छुट्टियां खत्म हुई लड़के अपने अपने घरों से रेलगाड़ी में बैठकर स्कूल लौटने लगे।लड़कों के बीच एक लड़का कभी कभार कुछ- कुछ अटपटी सी कविता कर लिया करता था।उसकी रची कविता को लड़के ऊंची नीची आवाज में मजे ले- लेकर गा रहे थे।
गाड़ी एक छोटे से स्टेशन पर रुकी और वहां से एक बूढ़े सज्जन भी गाड़ी में चढ़े।सामान के नाम पर उनके पास एक बिछोना तथा गोल मुंह वाली मिट्टी की तीन हंडिया थी। जिनका मुंह कपड़े से बंद था, साथ ही एक टीन का ट्रंक भी था ,और कुछ छोटी बड़ी पोटलिया थी ।लड़कों के समूह में एक शरारती लड़का जिसे सब बिचुकन कहते थे ।उसने बुड्ढे को देखा और जोर से कहने लगा,” अरे बूढ़े यहां जगह नहीं है किसी दूसरे डिब्बे में जाओ”।
बूढ़े आदमी ने प्यार से कहा ,”बड़ी भीड़ है, कहीं जगह नहीं है। मैं एक कोने में बैठ जाऊंगा। तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी ।”और वह सीट पर बैठने की बजाय नीचे फर्श पर अपना बिछौना फैलाकर बैठ गए।
लड़कों ने पूछा,” बाबा आप कहां जा रहे हैं?” बाबा कुछ जवाब देते उससे पहले ही बिचुकन बोल उठा,”श्राद्ध करने जा रहे होंगे।”
 बाबा हैरानी से बोले,”श्राद्ध किसका श्राद्ध ?”
जवाब मिला, “काले कपड़े का,हरी मिर्च का !”और लड़के एक सुर में भी बिचुकन की कविता के बोल गया उठे-
” हरी मिर्च और काला कुम्हार,।                                                              जो बैठा है, हो जाए खड़ा ।”
Kids story in Hindi
आसनसोल स्टेशन आते ही बुढ़े सज्जन वहां स्नान करने के लिए उतर पड़े। बुढ़े के वापस लौटते हैं बिचुकन ने चेतावनी देते हुए कहा, इस डिब्बे से उतर जाने में ही आपकी भलाई है।
” ऐसा क्यों?”
” यहां डिब्बे में कुछ चूहों को बड़ा कष्ट है।”
” चूहें? मतलब क्या है आपका?” देखिए ना चूहे ने आपकी हंड्डियों में घुसकर क्या धमाल कर दिया है। 
बूढ़े सज्जन ने देखा कि रसगुल्लों से भरी हंडिया खाली हैं, और मीठी खोई का एक दाना भी नहीं बचा है। पोटली को खोजते देख बिचुकन बोल उठा, “और आप की पोटली में भी न जाने क्या था, उसे तो चूहे उठाकर भाग खड़े हुए हैं। अब बूढें सज्जन को ध्यान आया कि उसमें तो उनके बगीचे के पांच पके रसीले आम बांधे हुए थे ।
बूढ़े सज्जन ने हंसकर कहा,”लगता है चूहों को बड़ी भूख लगी हुई थी ।”
बिचुकन ने कहा ,”कहॉं?चूहे तो बिना भूख के भी सब चट कर जाते हैं। 
और बच्चे क्यों पीछे रहते हैं ।सभी कहने लगे,”हां, हां ऐसा ही है ।कुछ और भी उन्हें मिलता तो वे भी चट कर जाते।”
बूढ़े सज्जन ने मुस्कुराते हुए कहा,”बड़ी भारी भूल हो गई।मुझे अगर मालूम होता की गाड़ी चूहों से भरी पड़ी है, तो मैं उनके लिए कुछ और भी ले आता।”बूढ़े सज्जन को मुस्कुराते हुए देखकर लड़के झेंपकर चुप हो गए। मन ही मन सोचने लगे,” काश,गुस्सा करते, तो मजा आ जाता।”
वर्धमान स्टेशन पर उतर कर जब दूसरी गाड़ी पकड़ने का समय आ गया, तब बूढ़े सज्जन बोल उठे,” इस बार तुम्हें कष्ट नहीं दूंगा ।अबकी बार किसी दूसरे डिब्बे में चढ़ जाऊंगा।” 
“सो तो अब होने का नहीं ।आपको अबकी बार भी हमारे डिब्बे में ही चलना होगा। आपकी पोटलियों में अगर अभी कुछ बचा है, तो हम सब बराबर से पहरा देंगे। अबकी कुछ भी चूहों को खाने न देंगे।”
 बूढ़े सज्जन को लड़कों की जिद के सामने झुकना ही पड़ा। थोड़ी देर बाद डिब्बे के सामने एक मिठाई वाले का ठेला आकर रुक गया। बूढ़े सज्जन ने मिठाई का दोना हर एक को पकड़ाते हुए कहा ,”इस बार चूहों की दावत में कोई गड़बड़ नहीं होगी ।”
लड़कों ने खुशी का ठिकाना न रहा, और मिठाई पर टूट पड़े। मिठाई वाले के बाद आई आम वाले की बारी ।भला अब आम भी कहां बचने वाले थे ।
लड़कों ने खोज खबर लेते हुए पूछा ,”आप कहां जा रहे हैं?*
” मैं रोजगार की तलाश में निकला हूं ।जहां काम मिलेगा,वहीं उतर लूंगा”। बूढ़े सज्जन ने कहा ।
लड़कों ने पूछा ,”आप क्या काम जानते हैं ?”
“मैं टूलों पंडित हूं ,संस्कृत पढ़ाता हूं।”बूढ़े सज्जन ने उत्तर दिया ।
लड़की ताली बजा कर खुशी से उछल पड़े ,”फिर तो आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं ।आप हमारे स्कूल में आकर पढ़ाइए ।”
“तुम्हारे स्कूल वाले भला मुझे क्यों रखेंगे ?”
“रखेंगे कैसे नहीं ?हम अपने यहां किसी ऐरे गैरे को थोड़ी ही ना आने देंगे।”
” तुमने तो मुझे दुविधा में डाल दिया। अगर तुम्हारे स्कूल के अधिकारी मुझे पसंद ना करें तो ?”
“पसंद ना करने का तो प्रश्न ही नहीं उठता। पसंद ना करने पर हम स्कूल छोड़ देंगे ।”
“अच्छा बाबा, तब तो तुम्हीं ले चलो ।”
गाड़ी स्टेशन पर आकर रुकी।वहां स्वयं स्कूल के सेक्रेटरी बाबू आए हुए थे। बूढ़े सज्जन को देखते ही उन्होंने आगे बढ़ कर उनके पांव छुए और प्रणाम करते हुए बोले,आइए ,आइए महाशय आपके रहने का इंतजाम हो गया है।











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