Vikram betal ki kahani in hindi सबसे बड़ा बलिदान

 विक्रम बेताल की कहानी सबसे बड़ा बलिदान

विक्रम वेताल की रोचक हिंदी कहानी विक्रम वेताल
विक्रम वेताल

Vikram batal ki kahani महाराजा विक्रमादित्य बेताल से परेशान हो गए थे। वे जैसे ही उसके प्रश्न का सही उत्तर देते वह उनके कंधों से उड़कर फिर उसी पीपल के पेड़ पर जाकर लटक जाता। और विक्रमादित्य अपने वादे के मुताबिक उसे छोड़कर जा नहीं सकते थे।
उन्होंने सोचा चाहे जो हो मैं इसे लेकर जरूर जाऊंगा।

रंजावती की दुविधा की कहानी का सही उत्तर देते ही बेताल विक्रमादित्य के कंधे से उड़कर फिर उसी  पीपल के पेड़ पर जा लटका।
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विक्रमादित्य फिर उस पीपल के पेड़ पर गए और उसे अपने कंधे पर डाला और चलने लगे।

Vikram batal ki kahani बेताल को बहुत आनंद आ रहा था, उसने विक्रमादित्य से पूछा आप कब तक मुझे इसी तरह बार-बार पीपल के पेड़ से उतार कर लाओगे? राजा ने कहा “यह तो तुम पर निर्भर करता है जब तक तुम चाहोगे मैं तुम्हें लेकर आता रहूंगा”।

बेताल मुस्कुराया और फिर अपनी नई कहानी सुनाना शुरू की
बहुत समय पहले की बात महाबलीपुरम शहर में चंद्र पति नाम का एक व्यापारी रहता था। उसकी एक सुंदर कन्या थी।
जिसका नाम मधुबाला था।

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एक दिन उसके सहेली के घर में विवाह का कार्यक्रम था। और मधुबाला भी वहां गई थी मधुबाला की मुलाकात एक खूबसूरत जवान युवक से हुई। उस युवक का नाम आदित्य था। दोनों ने एक दूसरे को देखा और एक दूसरे की तरफ आकर्षित हुए।और दोनों  प्रेम करने लगे

Vikram batal ki kahani दोनों का प्रेम बढ़ने लगा ,दोनों में इतना प्रेम बड़ा की आदित्य ने मधुबाला से विवाह करने का निश्चय किया ,आदित्य मधुबाला के पिता चंद्र पति से मिलने गया। पर चंद्र पति ने अपनी कन्या का विवाह किसी दूसरे सौदागर से करने का निर्णय किया था यह सुनकर आदित्य को बहुत ही दुख हुआ उसका दिल टूट गया।

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मधुबाला को जब इस बात का पता चला तो उसका भी  दिल टूट गया। वह आदित्य के बिना नहीं रह सकती थी। परंतु अपने परिवार के लिए उसे सत्यजीत से शादी करनी पड़ी।
 

शादी के पहले ही दिन मधुबाला ने आदित्य को एक पत्र लिखा था, कि वह उसके बिना नहीं रह सकती और विवाह के तुरंत बाद वह अपना ससुराल छोड़कर उसके पास आ जाएगी और फिर दोनों एक साथ रहेंगे ।

विवाह उपरांत मधुबाला ने सत्यजीत को सब कुछ बता दिया सत्यजीत ने उससे कोई जबरदस्ती नहीं की और उसे न ही रुकने के लिए कहा, और उसे आजाद कर दिया कि वह चाहे जहां जा सकती है।

मधुबाला अपने विवाह के जोड़े में थी और शरीर पर सारे विवाह के आभूषण थे। उन्हीं कपड़ों को पहनकर व आदित्य के घर की तरफ चल पड़ी तभी अचानक रास्ते में उसे एक चोर मिला और उसने  उसके सारे आभूषण देने के लिए बोला

मधुबाला ने चोर से आग्रह किया कि मैं अपने प्रेमी के पास जाना चाहती हूं ,मैं उससे मिलने के बाद तुम्हें सारे आभूषण दे दूंगी चोर को विश्वास तो नहीं था पर उसे मधुबाला को देखा,वह उससे विनती कर रही थी। उसे दया आ गई और उसने उसे जाने दिया।

आदित्य के घर पहुंची, और दरवाजा खटखटाया । आदित्य ने दरवाजा खोला और सामने मधूबाला  को देखते ही अचंभित हो गया।बोला तुम अब एक विवाहित स्त्री हो तुम्हें यहां नहीं आना चाहिए ,तुम किसी दूसरे की पत्नी हो तुम मेरे साथ नहीं रह सकती तुम वापस जाओ यहां तुम्हारी कोई जगह नहीं यह कह कर उसने अपना दरवाजा बंद कर लिया।

मधुबाला वहां बैठकर खुब रोई, फिर भारी मन से उसे वापस लोटना पड़ा। रास्ते में उसे फिर वही चोर मिला।उसे देखते ही मधुबाला ने रोते हुए अपने गहने उतरने लगी।चोर ने उससे पूछा कि क्या बात है और वह क्यों रो रही है। मधुबाला ने अपनी सारी कहानी सुनाई।चोर बहुत दुखी हुआ।और उसे सुरक्षित उसके घर पहुंचा दिया।

सर्वजीत ने जब उसे देखा तो उसे बहुत ही गुस्सा आया और बोला “तुम पराए मर्द के लिए मुझे छोड़कर चली गई अब मुझे तुम पर विश्वास नहीं है। क्षमा कर दो मुझे पर अब मैं तुम्हें पत्नी के रूप में स्वीकार नहीं कर सकता। अब तुम यहां से जा सकती हो।

  मधुबाला पर तो दुखों का पहाड़ टूट पड़ा,अब वह कहां जाती। उसे कौन सहारा देता, शर्मिंदगी के कारण उसने डूबकर अपनी जान दे दी।

बेताल ने राजा विक्रमादित्य से पूछा “अब आप बताइए इसमें किसका बलिदान सबसे अधिक है”।

 

राजा ने जवाब दिया बलिदान वह होता है ,जो स्वार्थ रहित होता है ।अपनी स्वेच्छा से किया जाता है आदित्य ने मधुबाला के प्रेम को ठुकराया किसी कारण से मधुबाला दूसरे की पत्नी थी और वह किसी दूसरे के पत्नी के साथ नहीं रह सकता था।

Bसर्वजीत में मधुबाला को जाने तो दिया पर वापस नहीं ले सका ,क्योंकि उसे उस पर विश्वास नहीं था। मधुबाला ने शर्मिंदगी की वजह से अपनी जान दे दी, इन सभी  के बलिदानों को सबसे बड़ा बलिदान नहीं कहा जा सकता।

सबसे बड़ा बलिदान देखा जाए तो चोर ने किया, वह चोरी करके अपनी जीविका चलाता था ।किंतु उसे मधुबाला पर दया आ गई और उसने उसके आभूषणों को नहीं लिया। उसकी इंसानियत की वजह से वह सबसे बड़ा बलिदानी है।
बेताल ने कहा “मुझे पता था कि तुम सही उत्तर दोगे…..” और तुम्हारे सही उत्तर पाते ही मुझे फिर से तुम्हारे कंधे से उड़कर उस पीपल के वृक्ष पर लटकना होगा। और वह उड़ कर फिर चला गया विक्रमादित्य मुड़े और फिर वह पेड़ की तरफ चलने लगे।

 

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