मलेरिया रोग के लक्षण और उपाय

 

मलेरिया रोग के लक्षण और उपाय 

मलेरिया रोग क्या है एक संक्रामक रोग है जो प्लाज्मोडियम नामक परजीवी सूक्ष्मजीवी द्वारा फैलता है। यह मादा एनोफ्रलीज मच्छर द्वारा फैलता है। बरसात के मौसम में मलेरिया अधिक फैलत है। पानी का भंडारण और नमी वाले इलाकों में मलेरिया अधिक फैलता है। चलिए जानते है मलेरिया रोग क्या है और उसके लक्षण और उपाय।

मलेरिया रोग किस मच्छर के काटने से होता है?

मलेरिया बीमारी मादा एनोफ्रलीज जो एक मच्छर का नाम है। उसके काटने की वजह से होता है।
 

मलेरिया रोग के प्रकार 

A- वीवैक्स — वीवैक्स मलेरिया अधिक खतरनाक नहीं होता है।
B- फाल्सीपेरम— फाल्सीपेरम एक खतरनाक मलेरिया होता है।जो रोगी के यकृत (लीवर), मस्तिष्क और फेफड़ों को हानि पहुंचाता है।
 

मलेरिया रोग कैसे फैलता है
मलेरिया रोग क्या है, मच्छर किसी संक्रमित व्यक्ति को काटता है,तो परजीवी मच्छर के पेट में चले जाते हैं।परजीवी पेट में बढ़ते रहते हैं, और वहां से उसके मुंह में निवास करते हैं। फिर जब वह मच्छर किसी अन्य व्यक्ति को काटता है,तो उसकी थूक के द्वारा परजीवी व्यक्ति के रक्त में प्रवेश कर लेते हैं। और वह संक्रमित हो जाता है,उसके द्वारा परजीवी व्यक्ति के रक्त में प्रवेश कर लेते हैं। और वह संक्रमित हो जाता है। 

मलेरिया रोग के संकेत एवं लक्षण 

  • मलेरिया रोगी को ठंड लगकर ,बुखार होता है, और पसीना आता है। यह लक्षण एक दिन छोड़कर दूसरे दिन प्रतिदिन एक निश्चित समय पर उत्पन्न हो सकते हैं।
  •  कभी-कभी रोगी को लगातार बुखार, बेचैनी और सिर दर्द रहता है।
  •  पांच वर्ष से कम उम्र वाले छोटी आयु के बच्चों गर्भवती (Pregnant) महिलाएं या पहले से किसी बीमारी से पीड़ित व्यक्ति को मलेरिया बार-बार हो सकता है।और उन्हें बहुत ज्यादा रूप से प्रभावित करता है।
  • फाल्सीपेरम मलेरिया मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है, जिससे बंद हो सकती है दौरे पड़ सकते हैं या रात लकवा हो सकता है और रोगी की मृत्यु भी हो सकती है। 
  • जिन क्षेत्रों में मलेरिया का प्रकोप अधिक फैला हुआ हो, वहां गर्भवती माताओं और कुपोषित बच्चों को मलेरिया होने का अधिक खतरा होता है।
  • मलेरिया क्षेत्रों में रहने वाले किसी व्यक्ति को बुखार हो जाए तो यह आशंका करनी चाहिए कि रोगी को मलेरिया हो सकता है ।यदि बुखार के साथ कपकपी ठंड चढ़े और सिर दर्द हो तो मलेरिया होने की अधिक संभावना होती है।

 मलेरिया रोग से बचाव व उपाय 

  •  मच्छर गर्म और नमी वाले वातावरण में पनपते हैं, मच्छर कई प्रकार के होते हैं। 
  • किंतु कुछ एक मच्छर के प्रकार ही रोग फैलाते हैं,मलेरिया फैलाने वाले मच्छर को कहा जाता है।’एनोप्लीज’ और यह केवल रात के समय ही काटता है। 
  • इसलिए मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी में सोना चाहिए मलेरिया फैलाने वाले मच्छर साफ पानी में पनपते हैं इसलिए बरसात के मौसम में जिन स्थानों पर पानी जमा हो जाता है। वहा मच्छर बड़ी संख्या में अंडे देने लगते हैं,

मलेरिया रोग नियंत्रित करने के उपाय:— मलेरिया नियंत्रित करने के दो तरीके हैं 

मच्छरों को पनपने से रोके। पहला उपाय  

  • उन स्थानों पर कीटनाशकों का छिड़काव करें जहां घरों में घुसने से पहले मच्छर बैठे रहते हैं।
  • पानी से भरे गड्ढे को सुखा दे
  • पानी इकट्ठा न होने दें छोटे गड्ढों में पानी की सतह पर एक चम्मच तेल डाल दे इससे मच्छर के लार्वा मर जाएंगे
  • तालाबों और कुओं में गंबूजिया मछलियां डालें और उनके प्रजनन को बढ़ावा दें, यह मछलियां मच्छर के लारवा को खा जाती हैं।यदि तालाब में घास पात ना उगी हुई हो, और तालाब के किनारे खड़े और उच्च तो मच्छर के लारवा को सांस लेने में कठिनाई होती है।
  •  नालियों और नहरों के पानी को एक स्थान पर ठहरने ना दें और इसे एक सप्ताह बाद निकाल कर सफाई करें।

मच्छरों को काटने ना दे।दूसरा उपाय 

  •  पूरे शरीर को ढकने वाले वस्त्र पहने जैसे पूरी बांहों की कमीज
  •  कीटनाशकों से उपचारित मच्छरदानी लगा कर सुने ताकि संक्रमित मच्छर सोते हुए व्यक्ति को ना काट पाए ऐसा करने से मच्छरदानी के संपर्क में आने वाले मच्छर मर जाते हैं 
  • मच्छरों को दूर रखने वाले उपायों का प्रयोग करें जैसे मच्छरों को दूर भगाने के लिए नीम की पत्तियां जलाएं

कैसे मलेरिया रोग की पुष्टि करने के 2 तरीके हैं?

  •  रैपिड डायग्नोस्टिक टेस्ट किट का प्रयोग करके रोगी के रक्त में मलेरिया की जांच की जा सकती है।
  • यदि जांच से रोग की पुष्टि हो तो रोगी को मलेरिया का संक्रमण होने की पुष्टि हो जाती है ।
  • आर डी टी जांच और रक्त की जांच इलाज शुरू करने से पहले की जाती है।
  •  जिस क्षेत्र में मलेरिया का प्रकोप अधिक हो उस क्षेत्र में मलेरिया अधिक फैलता है।

मलेरिया रोग का उपचार

  •  बुखार होने पर पेरासिटामोल दे आवश्यक हो तो बुखार उतारने के लिए गर्म पानी से स्पंज करें 
  • यदि आर डी.टी. जांच में मलेरिया की पुष्टि हो तो चिकित्सक के परामर्श के अनुसार क्लोरोक्वीन या ए. सी. टी दें।
  •  आजकल चिकित्सक जांच में मलेरिया की पुष्टि होने के बाद ही मलेरिया रोधी दवाएं देने का सुझाव देते हैं यदि जांच की सुविधा उपलब्ध ना हो या कराना संभव ना हो तो क्लोरोक्वीन का कोर्स दिया जा सकता है।
  •  अभी भी अनेक क्षेत्रों में इसकी आवश्यकता पड़ती है,यदि उपचार करने पर भी दो या तीन दिन में बुखार कम ना हो या एक सप्ताह के बाद भी रहे तो चिकित्सा केंद्र भेजना अनिवार्य होता है।

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