swine flu in india  In hindi | स्वाइनफ्लू के लक्षण और उपचार

स्वाइन फ्लू से जुड़ी कुछ बातें जानकारी 

swine flu in india 2009 में स्वाइन फ्लू एक महामारी की तरह भारत के विभिन्न इलाकों में फैल चुका था। इस बीमारी की पहचान होने के बाद भारत में( कोरोना वायरस कोविड 19 Coronavirus की तरह) हवाई अड्डे बंद कर दिए गए।


 SWINE FLU IN INDIA FARST TIME

          भारत में इस बीमारी का पहला मामला 10 मई को मिला जब एक आदमी अमेरिका से हवाई यात्रा करके भारत पहुंचा। इसके बाद इस बीमारी ने अपने पैर पसारने लगी।

Swine flue death in India


       इस बीमारी की वजह से लोगों में डर का माहौल बन गया था।24/05/2010 तक भारत देश में इस बीमारी के मरीजों की संख्या ( 10193 )एक लाख एक सौ तिरानवे हो गई थी। और म्रतको की संख्या 1035 हो गई।

 

     इस तरह से यह बीमारी आज भी हमारे और आपके बीच घुम रहीं हैं। हमें सतर्क रहना है, अपने लिए अपने बच्चों के लिए
तो चलिए इस बीमारी से बचने के लिए इसे पूरी से जान ले।

स्वाइन फ्लू 

 श्वसन संस्थान से संबंधित वायरस से फैलने वाली एक गंभीर बीमारी है ।इसके वायरस का नाम है (H1N1)है। आज संपूर्ण मानव जाति इस गंभीर बीमारी से भयभीत है ।इस बीमारी को जानकर इससे बचना ही सबसे बेहतर उपाय है ।

स्वाइन फ्लू रोग का प्रचार कारण 

जब कोई व्यक्ति का खांसता या छींकता है। तो उसके मुंह से कफ के छोटे-छोटे कण निकलते हैं। इन्हीं कफ के कणें में इसके वायरस छिपे रहते हैं। जब कोई स्वस्थ व्यक्ति कफ की इन बूंदों के संपर्क में आता है। तो वह इस वायरस से संक्रमित हो जाता है।

 स्वाइन फ्लू के लक्षण 

  •     स्वाइन फ्लू में तेज बुखार होता है।नाक का लगातार बहना, गले में खराश का होना,शरीर में अत्यधिक थकान लगना छींकें आना ,सर में तेज दर्द होना यह ऐसे लक्षण है।
  •  जो सामान्य सर्दी जुकाम और बुखार में भी होते हैं। अंतर यह है कि स्वाइन फ्लू में यह गंभीर किस्म के होते हैं।
  • कभी-कभी उल्टी दस्त जैसे पाचन संस्थान के लक्षण भी साथ में होते हैं ।यदि इन सभी लक्षणों में से  तीन से चार लक्षण भी लगातार बनी रहे ।
  •  दवा लेने के बावजूद लक्षणों में आराम ना हो तो तुरंत आलस्य त्याग कर अस्पताल में जाएं ।और सही समय से अपना इलाज करवाएं जिससे यह बीमारी और अधिक फैल न सके।

 

स्वाइन फ्लू से बचाव एवं उपचार 

इनका रखें विशेष ध्यान

  swine flu in india in hindi, बुजुर्ग ,छोटे बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को इस रोग के प्रति विशेष ध्यान रखना चाहिए। साथ ही वे लोग जो दिल, गुर्दे या फेफड़ों की बीमारी से पीड़ित हैं, उन्हें जुकाम, खांसी के शुरुआती स्तर पर ही इलाज करा लेना चाहिए।

स्वाइन फ्लू से बचाव एवं उपचार– 

हम हमेशा से सुनते आए हैं लोग का इलाज करने से ज्यादा अच्छा रोग की रोकथाम करना है। (Prevention is better than cure) — यह बात स्वाइन फ्लू के मामले में तो बिल्कुल फिट बैठती है।

  • खांसी या छींक आने पर मुंह पर रुमाल रखें या टिशू पेपर उपयोग करें।
  • नाक साफ करने या शौचालय जाने के बाद एवं खाना खाने से पहले साफ पानी एवं साबुन से हाथ धोएं।अकेली आदत अनेक संक्रामक बीमारियो से बचा सकती है।
  • भीड़-भाड वाली जगहों, जैसे शादी, विवाह, मेलों आदि में जाने से बचें।
  • जुकाम , खांसी,फ्लू से पीड़ित लोगों से दूरी बनाए रखें।
  • पानी पीने में आलस्य न करें, पानी खूब पीएं ताकि शरीर से विष पेशाब, पसीने आदि के द्वारा निकलता रहे।

पर्याप्त आराम जरुर करे।

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