हिंदी कहानी जॉन आफ आर्क

 

जॉन आफ आर्क रोचक कहानी 

हिंदी कहानी जॉन आफ आर्क
जॉन आफ आर्क

joan of arc biography in hindi वह एक साधारण किसान की बेटी थी। जॉन आफ आर्क उसे कोई नहीं जानता था लेकिन वह अपनी शक्ति को जानती थी, इधंसीलिए वह जीवन में अपने देश के लिए कुछ अद्भुत काम करना चाहती थी।उसके पिता ने अपनी इसी बेटी को बड़े लाड प्यार से पाला था, मां ने बेटी को कताई बुनाई और तमाम दूसरे घरेलू काम बचपन से ही दिखाने शुरू कर दिए थे।

वह दोनों तो यही सोचते थे कि हमारी बेटी बड़ी होकर ससुराल जाएगी लेकिन बेटी के दिल में तो कुछ और ही लगन लगी हुई थी ।अपने देश के एक हिस्से को अंग्रेजों से मुक्त करा कर आप अपदस्थ राजा को फिर से राजगद्दी दिलाने वाली यह लड़की इतिहास में ‘जॉन अॉफ आर्क’के नाम से प्रसिद्ध है।

joan of arc biography in hindi   जॉन का जन्म फ्रांस के एक गांव में डोमरेमी  में सन 1412 में हुआ था। उसके पिता जेक्विस डी आर्क एक साधारण किसान थे ।जॉन के तीन भाई थे जैक्वेमिन प,पियारे,और जीन ।  जॉन कभी स्कूल नहीं गई थी,किंतु उसने बचपन में अपने मां से प्रार्थना करना और ईश्वर में विश्वास करना सीख लिया था।

 वह बचपन से ही बहुत मेहनती और पवित्र विचारों वाली थी। फ्रांस पर उस समय अंग्रेजों का अधिकार था फ्रांस के राजा डॉफिन चार्ल्स की कन्या इंग्लैंड के राजा हेनरी पंचम को ब्याही थी। किंतु चार्ल्स के स्थान पर उनका दामाद हेनरी पंचम ही छल बल द्वारा फ्रांस का शासक बन बैठा था।

 फ्रांस के अधिकांश प्रदेश हेनरी के कब्जे में थे और वहां की जनता अंग्रेजों के अत्याचारों से परेशान थी। फ्रांस की जनता ने कई बार अंग्रेजो के खिलाफ छोटे-मोटे विद्रोह भी किए पर उन्हें सफलता नहीं मिली। कहते हैं जान ऑफ आर्क को ईश्वरीय आदेश हुआ कि तुम फ्रांस को मुक्त कराने जाओ और डॉफिंन चार्ल्स को फ्रांस का शासन दिलाने में सहायता करो, तो वह डॉफिंन चार्ल्स से  मिलने के लिए निकली ।

जनवरी सन 1429 में आर्क डॉफिंन चार्ल्स से मिली उसने चार्ज को बताया कि मैं अंग्रेजों से लड़ने जाना चाहती हूं। और युद्ध जीतकर तुम्हें तुम्हारा राज्य शासन वापस दिलाना चाहती हूं। यह मुझे परमात्मा का आदेश है और इसके लिए मुझे शक्ति देने वाला भी वही है।

 जॉन की बात सुनकर चार्ल्स को लगा कि वह कोई अदृश्य शक्ति ही है जो इस लड़की के अंदर से बोल रही है फिर भी उसने जॉन की बात पर एकदम भरोसा नहीं किया उसने धर्मगुरुओं और पादरियों से कहा कि वे जॉन से बातचीत करें और पता लगाएं कि उसकी बातों में कितनी सच्चाई है।

 लगभग 3 सप्ताह तक धर्मगुरु और पादरियों ने तरह-तरह से जान से पूछताछ की धर्मगुरु पादरियों और दरबारियों की सलाह पर अपदस्थ  राजा चार्ल्स ने जॉन अॉफ आर्क को अपना संकल्प पूरा करने के लिए सैनिक मदद देना स्वीकार कर लिया।

 जॉन युद्ध के लिए जा रही है यह खबर पाकर उसके भाई पियरे और जीन भी उसके साथ आकर मिल गए जॉन ने अपना अलग झंडा बनवाया, जब तलवार का सवाल उठा तो जॉन ने कहां मेरी तलवार सेंट कैथरीन के चर्च में रखी है। लोगों के आश्चर्य का ठिकाना न रहा जब उन्होंने पाया कि तलवार वही मिली जहां जॉन ने उसका रखा होना बताया था। इसमें जॉन की  देवी शक्ति के बारे में लोगों को और ज्यादा भरोसा हो गया।

joan of arc biography in hindi 4 मई सन 1429 सैनिक डेरे पर आराम कर रही थी। वह अचानक किसी देवी प्रेरणा से उठी और तेजी से यह कहती भी बाहर आई —हमें इसी समय अंग्रेजों की सेना पर हमला कर देना चाहिए। यही परमपिता का आदेश है उसकी बात सुनकर पहले तो फ्रेंच कमांडर सिपाही बहुत चकित रह गए। लेकिन जब उन्होंने देखा कि जॉन पुरुष के वेश में घोड़े पर सवार है ,और हाथ में तलवार लेकर युद्ध के लिए चलने का आदेश दे रही है।तो उन्हें उसका आदेश मानना पड़ा

 जॉन ऑफ आर्क के नेतृत्व में कुछ सौ सैनिकों ने अंग्रेजों की सेना के एक हिस्से पर अचानक आक्रमण किया तो सेना में भगदड़ मच गई ।जान ने आर्लिन्स का वह  हिस्सा जीत लिया। इसके बाद उसने पूरी ताकत लगाकर अंग्रेजी सेना पर और हमले किए और ऑरलियंस के इर्द-गिर्द से भी उसने खदेड़ना शुरू कर दिया, युद्ध में जॉन ऑफ आर्ट ने अपने जिस वीरता का प्रदर्शन किया उसे देखकर फ्रेंच कमांडर भोचक्के थे कि इसने युद्ध का कला कहां से सीखी है ।

जान एक हमले में घायल भी हुई ,किंतु आश्चर्य कि वह मरहम पट्टी करवा कर तुरंत युद्ध भूमि में आ गई इस तरह 9 मई सन 1425 शहर और किला अंग्रेजों से मुक्त करा लिया गया। जॉन चार्ल्स के पास आई चार्ज को  ऑरलियंस का समाचार देने के साथ ही उसने चार्ल्स को सलाह दी अब उसे जल्दी ही अपनी गद्दी संभाल लेनी चाहिए।

 उधर चार्ज के सलाहकारों ने चार्ज को सलाह दी कि जब तक पूरा इलाका अंग्रेजों से खाली नहीं हो जाता चार्ल्स का राज्य शासन बराबर खतरे में रहेगा। तब जान ऑफ आर्क ने एक बार फिर सैनिकों का बाना पहना एक बार फिर रणभेरी बजी जॉन के कुशल नेतृत्व में फ्रेंच सैनिकों ने 18 जून सन् 1429 को पूरा इलाका अंग्रेजों से खाली करवा लिया।       

      

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