Morel story in hindi for class 4

 

Morel story in hindi for class 4

मोरल स्टोरीज इन हिंदी (Moral Stories in Hindi for class 4) में आपका स्वागत करता हूं। आपके लिए टॉप 5 मोरल स्टोरी लाया हूं।आशा रखता हूँ की आपको बेहद पसंद आएगा। तो चलिए शुरू करते है आज का Top 5 Moral Stories in Hindi for class 4| हिंदी में शीर्ष 5 नैतिक कहानियाँ।

 

      ( Moral Story in Hindi class 4 )

बया और बंदर

एक जंगल में पीपल के वृक्ष पर बाया का एक सुंदर घोंसला था।अपने परिवार के साथ वह उसमें सुख पूर्वक रहती थी ।दिन भर दूर दूर से दाना चुग कर लाती और अपने बच्चों को खिलाती। सर्दी, गर्मी और वर्षा से निश्चिंत उसके बच्चे घोंसले में सुरक्षित थे।
एक दिन जोर की बारिश हुई बया अपने घोंसले में बैठी थी।उसने देखा एक बंदर बारिश में भीग रहा है। बारिश से बचने के लिए वह इधर-उधर छलांग लगाता हुआ ठंड से ठिठुर रहा था। उसे इस तरह भीगते हुए देख कर बया को उसपर दया आ गई। वह बोली-” बंदर भैया, तुम इतने समझदार हो,फिर भी अपने लिए एक घर क्यों नहीं बना लेते? हम कितने छोटे प्राणी हैं,फिर भी हमने अपने रहने के लिए यह छोटा सा घर बना लिया है।।”
 बाया की सीख बंदर को नहीं सुहाई।उसे क्रोध आ गया। क्रोध में उसने एक छलांग लगाई और पेड़ पर चढ़कर बया का घोंसला तोड़कर नीचे गिरा दिया और बोला-” अरे मूर्ख! तुम बड़ी होशियार बनती हो लो अब तुम भी मेरी तरह वर्षा में भीगो हो और ठंड से ठिठुर हो।”
 शिक्षा : मूर्खों को उपदेश नहीं देना चाहिए

 

       ( Moral Story in Hindi class 4 )

                             श्रवण कुमारा 

Moral stories in hindi बहुत समय पहले की बात है ।श्रवण कुमार नाम का बालक था। श्रवण कुमार के माता-पिता बूढ़े और नेत्रहीन थे ।अतः श्रवण कुमार ही उनकी देखभाल करता था। वह उनके लिए खाना बनाता, उनके कपड़े धोता और रात को उनके पांव दबाता था ।श्रवण कुमार माता पिता की मन से सेवा करता था। एक बार कुछ तीर्थयात्री श्रवण कुमार की कुटिया के पास से गुजरे श्रवण कुमार के माता-पिता ने उन तीर्थ यात्रियों के मुंह से प्रभु भजन कीर्तन के स्वर सुने, तो उनका मन दुख से भर गया ।

श्रवण कुमार के पिता ने आह भरते हुए कहा -“हमें तीर्थ यात्रा पर जाने का सुअवसर कभी नहीं मिल सकता।” यह सुनकर श्रवण कुमार की माता ने कहा-” हम बूढ़े और नेत्रहीन अवश्य है, किंतु तीर्थ यात्रा की इच्छा तो हमारी भी होती है।”

 श्रवण कुमार ने माता-पिता की यह बातचीत सुन ली उसने सोच लिया कि वह अपने माता पिता को तीर्थ यात्रा अवश्य कराएगा ।यह सोचकर वह एक बढ़ई के पास गया और माता-पिता के लिए लकड़ी की एक बहंगी ही बनाने के लिए कहा। बहंगी तैयार होने पर वह घर ले आया और अपने माता-पिता से बोला -“मैं आपको तीर्थ यात्रा पर ले चलूंगा ।”

बहंगी पर माता-पिता को बैठाकर श्रवण कुमार उन्हें पवित्र तीर्थ स्थलों पर ले गए । एक अच्छे और सेवा करने वाले पुत्र के समान उसने अपना पूरा दायित्व निभाया।

 शिक्षा :- 

माता-पिता की सेवा करना हमारा धर्म है

 ‌‌‌         ‌‌‌‌ ‌( Moral Story in Hindi class 4 )

                       मुरगा और लोमड़ी

एक शहर में एक मुर्गा रहता था। वह रोज सुबह कूकडू-कूं कूकडूं-कू करता हुआ लोगों को सुबह होने का संकेत देता था। शहर में वह अपने पिता और दादा के साथ एक घर में रहता था ।

एक दिन मुर्गा उड़कर पेड़ की डाल पर बैठ गया, तभी एक चालाक लोमड़ी झाड़ी से निकलकर उसके पास आई और प्यार भरे शब्दों में बोली-“मैं तुम्हारे जैसे प्राणी को पसंद करती हूं, तुम्हारी आवाज कितनी मीठी है,आंखें कितनी सुंदर और चमकीली है। मैं तुम्हारे पिता और दादा दोनों को जानती हूं,लेकिन तुम्हारी आवाज उन दोनों से अधिक मधुर है।”

 मुरगे को मधुर आवाज के बारे में कुछ भी ज्ञान नहीं था।लोमड़ी की प्रशंसा से उसका सीना गर्व से फूल गया और वह पेड़ से उतरकर लोमड़ी के पास आ बैठा।

लोमड़ी ने उसे फुसलाते हुए कहा-“मैं तुमसे एक मीठा गीत सुनना चाहती हूं ।क्या तुम मेरे लिए नहीं गाओगे? यह सुनकर मुरगा फूला नहीं समाया और जोर से कुकडू -कू कुकडू-कू की आवाज करने लगा। उसने अपनी आंखें बंद कर ली थी मौका पाते ही चालाक लोमड़ी ने मुरगे को दबोच लिया, लेकिन जब उसने शहर के लोगों को अपनी ओर आते देखा तो वह ठहर गई। मुरगा समझदार था। उसने कुछ देर सोचा और फिर लोमड़ी से कहा-” जानती हो शहर के लोग क्या कह रहे हैं ?यह कह रहे हैं कि तुम उनका मुर्गा ले जा रही हो,जबकि मैं तुम्हारा हूं ।”यह सुनते ही लोमड़ी खुश होकर मुरगे की बातों में आ गई और चिल्लाने लगी-” यह मेरा मुरगा है लोगों! यह मेरा मुरगा है लोगों!”

लोमड़ी का मुंह खोलते ही मुर्गा उसकी पकड़ से छूटकर पेड़ की टहनी पर उड़कर बैठ गया ।इस तरह समझदारी दिखा कर मुरगे ने लोमड़ी से अपनी जान बचा ली ।

शिक्षा :- मुसीबत के समय हमें समझदारी से काम लेना चाहिए

         ( Moral Story in Hindi class 4 )

                    संतोष सबसे बड़ा सुख 

जो कुछ आपके पास है। उसका पूरा उपयोग कीजिए और जो नहीं है,उसके लिए श्रम कीजिए यही जीवन का मूल मंत्र है। फिर भी मनुष्य हो या पशु पंछी दूसरों के सुख को देखकर प्रायः दुखी हो जाते हैं। यह बुरी आदत है ।

एक बार टॉमी नाम का एक पालतू कुत्ता घर से बाहर निकल आया। उसके गले में पट्टा बंधा था चलते चलते उसने देखा दीवार पर बैठी एक बिल्ली म्याऊं म्याऊं कर रही है। असल में वह कुत्ते से डर रही थी परंतु टॉमी ने सोचा-” यह कितनी भाग्यवान है। काश !मैं भी इसी के समान निडर होकर भौं-भौं करता, सब को डराता ।”पर वह बिल्ली के दर्द को समझे बिना ही उसके सुख पर सोचता हुआ आगे बढ़ गया ।

 

आगे चलकर उसने देखा तालाब में मछलियां पानी में डुबकियां लगा रही है। वह सोचने लगा -“काश में मछली होता, तो मैं भी पानी में खेलता उछलता ।”उसे क्या पता था कि पानी के बिना जैसे वह रह लेता है ।मछली तो बिना पानी के मर जाएगी।

टॉमी यही सब सोचते हुए चला जा रहा था कि तभी सामने से आती हुई मोटरसाइकिल से टकरा गया।उसे काफी चोट आई लेकिन मोटरसाइकिल सवार ने उसकी मरहम पट्टी करवाईं । टॉमी किसी तरह लंगड़ाता हुआ अपने घर लौट आया।

शिक्षा :- हमें अपनी तुलना दूसरों से नहीं करनी चाहिए।

           ( Moral Story in Hindi class 4 )

                         बोल का मोल 

Moral stories in hindi एक वृद्ध आदमी के तीन पुत्र थे।तीनों पुत्र बातचीत और आचरण में समान न थे। एक बार तीनों पुत्र अपने पिता के साथ एक लंबी यात्रा पर जा रहे थे। यात्रा में देर हो जाने के कारण उनके खाने पीने का सामान और पैसे खत्म हो गए ।भूखे-प्यासे वे चारों एक पेड़ के नीचे बैठे थे ।

तभी उन्होंने व्यापारी को देखा उसकी बैलगाड़ी में तरह-तरह के पकवान व मिठाईयां थी ।पकवानों की महक से उन चारों के मुंह में पानी आने लगा। व्यक्ति ने लड़कों को व्यापारी के पास जाकर खाना मांगने को कहा ।यह सुनकर पहले बड़ा बेटा व्यापारी के पास गया और बोला-” अरे ,वो व्यापारी! इतने पकवान का क्या करोगे ।हमें भूख लगी हमें भी दे दो ।”

व्यापारी को उसके बात जरा भी पसंद नहीं आई। उसने झुंझलाते हुए बड़े बेटे को एक पूरी दे दी। इसके बाद व्यापारी बैलगाड़ी आगे बढ़ा ।तभी मंझला लड़का उसके पास आया और बोला -“बड़े भाई प्रणाम !क्या आपने इस छोटे भाई को कुछ खाने को देंगे ?”लड़के के मुंह से बड़े भाई शब्द सुनकर व्यापारी का पसीज गया और उसने एक दोना मिठाई दे दी।

 इसके बाद छोटा लड़का व्यापारी के पास गया -“प्रिय मित्र ! हम लोग भूखे हैं ।इस मुसीबत के समय हमारी मदद कर सकते हैं। क्या आप हमारी मदद करेंगे?” व्यापारी छोटे लड़के के मुंह से अपने लिए मित्र शब्द सुनकर गदगद हो गया ।उसने कहा -“मित्र मेंरे तुम्हें भूखे रहने की आवश्यकता नहीं। इस गाड़ी में रखा सारा पकवान तुम्हारा है। कहो ,कहां ले चलूं ?”तीसरा बेटा व्यापारी के साथ बैलगाड़ी में बैठकर उसी पेड़ के नीचे आ गया,जहां उसके पिता और बड़े भाई बैठे थे। उसके बाद सबने जी भर कर पकवान खाएं। moral stories in hindi

शिक्षा :- मीठी बोली से सारे काम बन जाते है


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