हिंदी नैतिक कहानियां पाप बड़ा या पापी

 

 Short moral stories in hindi    एक बार तीन चोर किसी नगर में आए। वह किसी ऐसे घर की खोज में थे जहां उन्हें अच्छा धन लूटने को मिल जाए ।घूमते घूमते उन्हें एक धनी व्यक्ति का घर दिखाई दिया ।उन्होंने रात में उसी घर में चोरी करने का निर्णय किया। रात जब धनी व्यक्ति सो गया तब तीनो चोर उसके घर में घुसे और वहां से सोने-चांदी के आभूषण और रुपए चुरा कर ले भागे , और सारे धन को साथ लेकर जंगल में भाग गए।वहां पे एक वृक्ष के नीचे बैठ गए और उन्होंने लूट के सामान को बांटने की सोची।

 तीनों चोरों को जोर की भूख लग रही थी, रात उन्होंने बड़े कष्ट से काटी। प्रातः होते ही उन्होंने अपने एक साथी को खाने का सामान लाने के लिए नगर में भेज दिया। बाकी दोनों चोर वहीं बैठ कर उसके लौटने की प्रतीक्षा करने लगे।

 खाने का सामान लेने गए चोर ने पहले स्वयं भरपेट खाना खाया। उसके बाद उसने अपने साथियों के लिए खाना खरीद लिया। वह जंगल की ओर चलने ही वाला था कि उसके मन में लालच आ गया। उसने सोचा कि यदि उसके दोनों साथ ही मर जाएं, तो सारे आभूषण और रुपए उसे मिल जाएंगे। यही सोचकर उसने भोजन में विष मिला दिया वह अपने मन में प्रश्न होता हो जंगल की ओर चल दिया। अब उसे विश्वास हो गया कि चोरी का सामान उसे ही मिलेगा ।

 इधर जंगल में उसके दोनों साथी खाली बैठे उत्सुकता से अपने मित्र की प्रतीक्षा कर रहे थे। अचानक उनके मन में विचार आया कि यदि वे अपने तीसरे साथी को मार दे तो वह सारा धन केवल उन दोनों में ही बंटेगा। उन दोनों को भी लालच आ गया ।और उन्होंने अपने साथी को मारने का निश्चय कर लिया। जैसे ही तीसरा चोर खाना लेकर अपने साथियों के निकट पहुंचा उन्होंने उसके पेट में चाकू घोंप कर उसकी हत्या कर दी।

 अब दोनों ने बैठकर प्रसन्नता पूर्वक खाना खाया। खाना खाते ही भोजन में मिला हुआ विष उनके शरीर में फैलने लगा वे बुरी तरह से तड़पने लगे और थोड़ी ही देर में उनके प्राण निकल गए।

  तीनों चोर मर गए, क्योंकि उनकी नियत में खोट आ गया था। लूट का सारा सामान अब ज्यों का त्यों पड़ा हुआ था। उन तीनों में से कोई भी उसको स्वामी नहीं बन सका। उन्हें अपने किए का फल मिल गया ।

 शिक्षा 

 जो जैसा करता है, वह वैसा ही भरता है,” जैसी करनी वैसी भरनी।” 

                        पा बड़ा या पापी 

Short moral stories in hindi आज से बहुत वर्ष पहले की बात है। उन दिनों येरूशलम  में यहूदियों का साम्राज्य था ।उस समय येरूशलम में अपराध करने वाले को सूली पर चढ़ा दिया जाता था या उसे कोड़े मारे जाते थे। और कभी-कभी लोग अपराधी को पत्थर मार मार कर भी हत्या कर देते थे।

 एक दिन रात के समय एक चोर किसी घर में चोरी करने के लिए घुसा। चोरी करते समय घर के मालिक ने उसे पकड़ लिया। चोर ने मकान मालिक से बड़ी विनती की कि वह उसे छोड़ दें। परंतु मकान मालिक ने उसे रस्सी से बांधकर एक अंधेरे कमरे में बंद कर दिया। सुबह होने पर उसने अपने बस्ती के लोगों को एकत्र किया और रात को सारी घटना बता दी ।

 बस्ती के लोग चोर को एक खुले मैदान में ले गए और वहां ले जाकर उन्होंने उसे रास्सियों से एक वृक्ष के साथ बांध दिया और उसे मारना पीटना आरंभ कर दिया ।सब लोग चिल्ला-चिल्ला कर कह रहे थे,” यह अपराधी है, इसने चोरी की है इसे पत्थर मार मार कर मौत के घाट उतार दो ।”सब लोग पत्थर उठा उठा कर उसे मारने लगे चोर पत्थरों की मार से लहूलुहान हो गया।short moral stories in hindi

 संयोगवश उसी समय ईसा मसीह उधर आ निकले।  उन्होंने लोगों से पत्थर मारने का कारण पूछा। लोगों ने बताया कि वह चोर है। इसने चोरी करने का अपराध किया है। इसलिए यह पापी है। ईसा मसीह ने कहा ,”यह पापी अवश्य है क्योंकि इसने चोरी की है। परंतु इस चोर को वही व्यक्ति पत्थर मारे, जिसने अपने जीवन में कोई पाप या अपराध ना किया हो।”

  ईसा मसीह के इन शब्दों को सुनकर सभी लोग चुपचाप खड़ी हो गए। किसी ने भी उस चोर को पत्थर नहीं मारा ।ईसा मसीह ने पूछा,” क्यों भाइयों! तुमने इसे पत्थर मारना क्यों बंद कर दिया?” किसी ने कोई उत्तर नहीं दिया, क्योंकि सभी ने कभी न कभी कोई न कोई अपराध अवश्य किया था। ईसा मसीह तुरंत समझ गए कि इन सभी ने कोई न कोई अपराध अवश्य किया है, इसीलिए किसी का हाथ पत्थर मारने के लिए नहीं उठ रहा है।

 उन्होंने सभी को समझाते हुए कहा ,”चोरी करने वाले चोर को तो तुम सजा दे सकते हो लेकिन उसके अंदर छिपे चोर को तो कैसे सजा दोगे ?हजारों वर्ष से चोरियां,पाप, हत्याएं होती आ रही हैं। समाज ने चोर, पापी और हत्यारों को सजा दी है, परंतु अपराध समाप्त नहीं हुए ऐसा क्यों है ?”

 किसी भी व्यक्ति के पास उसके प्रश्न का उत्तर नहीं था ।उन्होंने फिर कहा,” भाइयों! सदा पाप से घृणा करो ना कि पापी से। यदि तुम पापी के हृदय में छिपे पाप को निकाल सको, तो तभी कुछ लाभ होगा। ऐसा तभी हो सकता है जब हम सभी पाप रूपी राक्षस पर विजय प्राप्त करें।”

 सभी लोगों ने अपने हाथों में लिए पत्थरों को फेंक दिया और ईसा मसीह के चरणों में झुक गए। उन्होंने वृक्ष से बंधे उस चोर को भी मुक्त कर दिया। चोर ईसा मसीह के चरणों पर गिर पड़ा। और उसने कभी पाप न करने का संकल्प लिया । 

 शिक्षा 

सदा पाप से घृणा  करनी चाहिए पापी से नहीं ।पाप से घृणा करने पर पापी का कभी जन्म ही नहीं होगा।

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