२नैतिक शिक्षाप्रद कहानियां बच्चों की प्रेरणादायक कहानी

 बच्चों की शिक्षाप्रद कहानियां   

  रमैया की हरी भरी दुनिया

Moral stories in hindi कुछ लोग उसे सनकी कहते हैं, कुछ जुनूनी तो कुछ और ।मगर रमैया को इससे फर्क नहीं पड़ता वह अपनी साइकिल पर ढेरों पौधे लिए रोज सुबह घर से निकल पड़ता है, गीत गाता  और सबसे पेड़ उगाने को कहता है। रमैया अपने सपने की धुन में मगन है उसका सपना है। हरी-भरी धरती का ,जंगल बचाने का ,पेड़ लगाने का.रमैया जानता है कि इस सपने को कैसे पूरा करना है ।किसी की शादी हो तो उपहार में पौधा देता है, जन्मदिन हो तो पौधा भेंट करता है ।जहां जो भी मिल जाए उसे एक पौधा थमा देता है ।

कई लोगों को उस पर शक हुआ कि कौन है, यह आदमी ।कुछ दिन पहले तब तो गुजारे के लिए दूध बेचता था और अब दूध के साथ-साथ पौधे भी लिए घूमता है। कुछ लोगों की शिकायत पर वन विभाग के अधिकारियों ने उसे बुलवाया अधिकारी कुछ पूछ पाते इससे पहले ही रमैया ने एक पौधा उनकी और बढ़ाया और बोला -जी पहले यह नीम का पौधा लिजिए ।दांतो के लिए इसकी दातुन बहुत ही लाभदायक होती है। 

इसके पत्ते जलने से मच्छर दूर भाग जाते हैं। यह पौधा अपने घर के पास में लगाइएग। अधिकारियों ने और कुछ पूछने की जरूरत नहीं समझी।
Moral stories in hindi

रमैया का यह जुनून कैसे शुरू हुआ  इसके पीछे भी एक कहानी है। वैसे तो उसे बचपन से पेड़-पौधे पसंद थे मगर अपने मास्टर जी की एक बात उसे हमेशा याद रही। मास्टर जी कहते थे– पेड़ हमें ताजी हवा, फल-फूल ,छाया और बहुत कुछ देते हैं। जबकि बदले में बहुत थोड़ी सी देखभाल मांगते हैं। इंसान होता तो इतना सब देने की बढ़ी कीमत मांगता ।रमैया ने कागज का नोट बनाकर उस पर पेड़ों की तस्वीर लगाई और उसके नीचे लिखा– पेड़ की कीमत पैसों से बढ़कर है।

 एक बार रमैया की बेटी को तेज सिर दर्द हुआ। दवा लेने पर कुछ दिन तो ठीक रही।लेकिन फिर यह दर्द होने लगा रमैया ने कारण खोजा तो पता चला कि बेटी के स्कूल में बाहर बैठकर पढ़ाई होती है। वहां पेड़ नहीं थे ।जिसके कारण उसकी बेटी ही नहीं बल्कि कई बच्चों के साथ ऐसा हो रहा था ।रमैया ने सोचा कि क्यों ना वहां पर इतने पौधे लगा दिए जाएं कि बच्चे छांव में बैठ कर पढ़ें। यही विचार रमैया के जुनून का कारण बन गया।

 रमैया अपने हाथों से अब तक सैकड़ों पौधे लगा चुका है। स्कूल, दफ्तर मंदिर ,मस्जिद जहां भी जाता है पेड़ों के गुण बताता है ।नए-नए तरीकों से लोगों को पेड़ लगाने के लिए मनाता है। उसने बेटा-बेटी के शादी के कार्ड पर पेड़ों के महत्व का संदेश लिखा।

नारा लगाया

धरती का अब करो सिंगार । पेड़ लगाओ सब दो चार ।।


रमैया के इस जुनुन में धीरे-धीरे बहुत लोग शामिल हो रहे हैं। वे कहते हैं– दस रमैया मिल जाए तो धरती बच जाए, जंगल भर जाए खुशहाली आ जाए।।

  

                                  कछुआ और खरगोश

      Moral stories in hindi  एक बार एक कछुआ और खरगोश थे दोनों में बड़ी ही गहरी मित्रता थी ।दोनों साथ-साथ खेलते वह दोनों साथ-साथ ही टहलते।

 एक दिन खरगोश ने कछुए से कहा क्यों ना हम दोनों दौड़ लगाएं कछुआ बोला- ठीक है। मैं तैयार हूं ,दोनों ने अपने दोस्तों को बुलाया और सही रास्ता देखा और आखरी मंजिल तक का सफर तय करने के लिए एक निश्चित स्थान की घोषणा की।

दौड़ के दिन की घोषणा होने पर खरगोश एकदम निश्चिंत था। उसे पूरा विश्वास था कि कछुआ उस से दौड़ जीत नहीं पाएगा ।उधर कछुए ने भी अपनी तैयारी तेज कर दी थी ।जीतने के लिए वह तरह-तरह की योजनाएं बनाने में जुटा हुआ था ।

दौड़ के दिन निश्चित स्थान पर कछुआ और खरगोश पहुंच गए ।गिलहरी ने सीटी बजा कर दौड शुरू कराई। कछुआ धीरे-धीरे अपनी चाल चलने लगा जबकि खरगोश तेजी से दौड़ते हुए बहुत आगे निकल गया। 

एक पेड़ के पास पहुंचकर खरगोश ने सोचा कछुआ तो अभी बहुत पीछे होगा क्यों न मैं थोड़ी देर पेड़ की छांव में सुस्ता लू । और वह उस पेड़ की छांव में बैठकर सुस्ताने लगा। पेड़ों पर चिड़िया चहचहा रही थी।और वातावरण बहुत ही सुहाना था ,ऐसे में खरगोश को नींद आ गई। 

खरगोश को अपने आप पर विश्वास था कि वह कुछ देर बाद अपनी रफ्तार में दौड़ कर अपने निर्धारित स्थान पर पहुंच कर कछुए से जीत जाएगा। कछुआ धीरे-धीरे अपनी चाल चलने लगा है। कछुए ने पेड़ की छांव में खरगोश को आराम करते देखा 

खरगोश की नींद खुली तो उसने अपनी गर्दन घुमा कर दूर दूर तक देखा और उसे कछुआ नहीं दिखाई पड़ा ।उसे लगा कि कछुआ अभी पीछे है। और उसने दौड़ शुरू की पर जब वह गंतव्य स्थल पर पहुंचा तो उसने कछुए को वहां खुद से पहले पहुंचा पाया।


Webuakti   Reed    :—

महात्मा गौतम बुद्ध की प्रेरणादायक कहानी

विक्रम वेताल। कहानी  

बिजनेस आइडिया 

Leave a Comment