मुनिया की कहानी Kids Story in Hindi 2021

 मुनिया की कहानी भाग#1

अगर मगर

 
           Short story in hindi एक थी नदी उसमें अगर नाम का एक मगर रहता था। गर्मियों के दिन आए नदी का पानी सूख गया।
 
 पानी की एक बूंद भी न बची तो उस अगर मगर के प्राण भी सूखने लगे। वह ना तो चल सकता था ना ही हिल-डुल सकता था।
 
 नदी से कुछ दूर एक तालाब था उसमें थोड़ा पानी बचा था ।लेकिन अगर मगर वहां जाए तो कैसे।
           तभी वहां से एक पारसी बाबा गुजरे, अगर मगर ने उनसे प्रार्थना की,” बाबा जी-बाबा जी आप मुझे तालाब तक पहुंचा दें तो भगवान आपका भला करेगा।” वह बोले पहुंचा तो दो लेकिन तेरा क्या भरोसा तालाब पहुंचा कर तू मेरे को ही खा जाएगा।
 
           अगर मगर ने कहा,’ भला मैं आपसे ऐसा सलूक कैसे कर सकता हूं?’
 
             बाबाजी थे भोले ।उन्होंने अगर मगर पर भरोसा कर उसे उठा लिया और तालाब तक ले आए ,लेकिन जैसे ही उसे पानी में छोड़ा कि उसने बाबा जी का पैर पकड़ लिया।
 
         बाबा जी बोल उठे,” छोड़ दे मुझे। तू ने जवाब दिया है, मुझे तू नहीं खाएगा। अगर मगर ने कहा,” नहीं खाऊंगा तो मैं खुद ही मर जाऊंगा। मेरे पेट में चूहे,-बिल्ली- कुत्ते बोल रहे हैं ।
           
        आज आठ दिन का भूखा जो हूं।” कह कर उसने बाबाजी को पानी में खींचना शुरू किया। बाबा जी बोले जरा ठहर भी जा बेटा इंसाफ की है देख कोई आ रहा है।
 
           Short story in hindi वह थी एक सफेद बिल्ली उसने काला चश्मा पहन रखा था। बाबा जी ने हाथ जोड़ा और कहा हम इंसाफ उससे करवाएंगे ।अगर मगर ने सोचा थोड़ी देर में क्या फर्क पड़ेगा, चलो यह तमाशा भी देख लेते हैं ।
 
            बाबाजी का पांव मजबूती से पकड़े हुए वह धूर्त बोला,’ हां सफेद बिल्ली से इंसाफ करवा लो, चाहे काली बिल्ली से करवा लो। जिसे चाहो उस से करवा लो मुझे मंजूर है।”
          
  बाबा जी ने काले चश्मे वाली बिल्ली को सारा किस्सा सुनाया ।फिर पूछा,’ अब तुम ही बताओ या अगर मगर मुझे खाना चाहता है ।क्या यह इंसाफ की बात है?’ काला चश्मा आंखों पर से हटाकर सफेद बिल्ली बोली मैं यह इंसाफ नहीं कर सकती, मैं क्योंकि मैं वकील हूं। मेरा काम मुकदमा लड़ना है, न्याय करना नहीं।’
 
            वह गई तो अगर मगर फिर से बाबाजी का पांव खींचने लगा। वह बोले,” इतना रुक है तो थोड़ा और सही देख सामने से सफेद चश्मा लगाए काली लोमड़ी आ रही हैै। हम उससे साफ करने को कहेंगे ।आखिरी बार। फिर भले ही मिर्च मसाला डालकर तू मुझे खा जाना।”
 
        बाबा जी ने सफेद चश्मे वाली काली लोमड़ी को सारा किस्सा सुनाया। फिर कहा,” अब तुम ही बताओ या अगर मगर मुझे खाना चाहता है। क्या यह इंसाफ की बात है?’
 
        यह सुनकर काली लोमड़ी खुश हो गई क्योंकि वह न्यायधीश थी। और बहुत दिनों से कोई उसके पास पचरा लेकर नहीं आया था दूसरे वह सयानी भी उतने ही थी ।अब तक वह जान गई थी कि अगर मगर धूर्तो का सरदार है ।उसे सबक सिखाना चाहिए ।
 
        इसलिए काली लोमड़ी ने आंखों पर से सफेद चश्मा हटाकर बाबा जी से उल्टा सवाल पूछा,’ तो आप पड़े थे। सूखी नदी में और मगर आप को उठाकर यहां ले आया,सही? ‘अगर मगर तुरंत बोल उठा,’ गलत। वह तो मैं पडा था और उठाकर मुझे बाबाजी लाए।’
     Short story in hindi
            लोमड़ी मुस्कुरा कर बोली,’ओहो, तो तुम पडे थे वहां। अब जरा यह भी बता दो कि कैसे पड़ थे?’ उसकी बातों में आकर अगर मगर ने बाबाजी का पांव छोड़ दिया फिर पानी में से किनारे पर आकर लेटते हुए कहा ,’ऐसे पड़ा था ।’
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          इस मौके का लाभ उठाकर बाबाजी भागे और उसके पीछे सफेद चश्मे वाली काली लोमड़ी भी भाग निकली। अगर मगर जल भूल कर राख हो गया उसने वही सौगंध ली,’ नहीं छोडूंगा ,मैं उस काली कलूटी को, नहीं छोडूंगा।’
 
       कुछ दिनों बाद मूसलाधार वर्षा शुरू हुई अगर मगर नदी में जाकर रहने लगा एक रोज काली लोमड़ी नदी पर पानी पीने जा रही थी ।अगर मगर ने उसे दूर से ही देख लिया वह फर्राटे से किनारे पहुंचा। और छिछले पानी में छिप कर बैठ गया।
 
 न हिले न खुले। दो आंखें पानी की सतह से ऊपर थी काली लोमड़ी की नजरों में आ गई वह किनारे की रेत पर से ही बोली:
 
 नदी के जल दो नयन झिलमिल
 जैसे रात में दो सितारे झिलमिल 
 
यह सुनकर अगर मगर ने अपनी एक आंख मींच ली।  मुस्कुराते हुए काली लोमड़ी ने फिर कहा ।
 
नदी के जल दो नयन झिलमिल
 जैसे रात में एक सितारा झिलमिल 
 
अगर मगर समझ गया कि सफेद चश्मे वाली काली लोमड़ी ने उसे पहचान लिया है । चिढ़कर सोचा कोई बात नहीं अगली बार मुलाकात होगी। तो उसे नानी के साथ नाना भी याद दिला दूंगा।
 
 थोड़े दिन बीत गए काली लोमड़ी कहीं दिखाई नहीं दी ।एक रोज वह नदी में पानी पी रही थी कि यकायक अगर मगर ने आकर उसका पांव पकड़ लिया। काले लोमड़ी ने सोचा ,अब मेरी खैर नहीं ।यह पट्ठा मेरे प्राण लेकर ही दम लेगा। लेकिन वह जरा भी नहीं डरी ।बल्कि ठहाका लगाकर हंसते हुए बोली,’अरे मूर्ख यह डंडा किसलिए पकड़ रखा है? मेरा पैर पकड़ न!’
 
 अगर मगर को लगा उससे कुछ भूल हुई है उसने फौरन काली लोमड़ी का पांव छोड़ दिया और पास पड़े हुए एक डंडे को पकड़ लिया। लोमड़ी हंसती हुई भागते हुए उसने कहा,’ अगर मगर वह मेरा पैर नहीं, डंडा है। देखो, मेरे चारों पैर कैसे दौड़ रहे हैं ।
 Short story in hindi
अगर मगर ने सिर पीट लिया लेकिन निराश होना वह नहीं जानता था। दूसरे दिन से वह काली लोमड़ी का इंतजार करना शुरू कर दिया ।दिन-रात वह घाट पर नजरे बिछाए पड़ा रहता लेकिन काली लोमड़ी नदी पर क्यों आती ।अगर मगर सोच में पड़ गया ।अब क्या किया जाए?
 
 नदी किनारे एक अमराई थी। वहां काली लोमड़ी अपनी सहेलियों के साथ रोजाना आम खाने आती।
 
 अगर मगर को पता चला तो वह तुरंत अमराई में पहुंच गया। वहां माली ने आम उतारकर बड़े-बड़े दो ढेर बनाए थे। अगर मगर उनमें के बड़े ढेर में छिप गया रोज की तरह काली लोमड़ी अपने सहेलियों के साथ बतियाते हुए अमराई में आई।
       तभी उसकी नजर बड़ी-बड़ी दो आंखों पर पड़ी वह सावधान हो गई ।फिर अपनी सहेलियों से कहा,’ सुनो-सुनो-सुनो आज हम उस बड़े ढेर से आम नहीं खाएंगे। वह हिस्सा भगवान का है। छोटे ढेर से जितने चाहो उतने खा लो ।’सहेलियों ने वैसा ही किया और आम खा कर चली गई ।
 
काली लोमड़ी इस बार भी हाथ नहीं आई। अगर मगर ने सोचा सिर्फ एक ही उपाय बचा है। और वह है काली लोमड़ी की गुफा में जाकर छुप जाने का। वहां तो वह फंस ही जाएगी।
 
 दूसरे रोज अगर मगर गुफा में घुस कर बैठ गया।दिनभर जंगल में भटकने के बाद जब अंधेरा होने को आया तो काली लोमड़ी अपनी गुफा में लौटी भीतर पांव रखते ही उसे अगर मगर की दिए से दो आंखें दिखाई दी।
        वह बोल उठी ,’कमाल है! मेरे घर में आज दो तो दिए जल रहे हैं यह सुनकर अगर मगर ने अपनी एक आंख बंद कर ली। काली लोमड़ी ने तपाक से कहा,’ धत्त तेरी की एक दिए का तेल खत्म हो गया!’ ।
           अगर मगर ने अपनी दोनों आंखें बंद कर ली यह देख काली लोमड़ी ने झूठ-मुठ अफसोस जताते हुए कहा,’ हाय रे किस्मत!’ दोनों दिए बुझ गए। अब इस अंधेरी गुफा में रहने का कोई मतलब नहीं है। कोई नया घर, नई गुफा को ढूंढना पड़ेगा। क्यों ना अभी से तलाश शुरू कर दी जाए।’
 
         उस रोज के बाद से सफेद चश्मे वाली काली लोमड़ी ऐसी गायब हुई कि अगर मगर तो क्या किसी को भी आज तक दिखाई नहीं दी। Short story in hindi
 
 
Webuakti Reed

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