स्वास्थ्य के लिए योगा का महत्व क्या है। संतुलित आहार

Yoga के अर्थ योगासन के प्रकार योग के महत्व
योगासन
योग का महत्व योग का  हमारे जीवन में बहुत महत्व है। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है ।जिस व्यक्ति का स्वास्थ्य अच्छा होता है ।उसी के मन में श्रेष्ठ विचार आते हैं। अतः सुखमय और आनंद में जीवन व्यतीत करने के लिए अच्छे स्वास्थ्य की आवश्यकता होती है ।तो चलिए जानते हैं योग का महत्व 
 
       एक कहावत है तंदुरुस्ती हजार नियामत है अर्थात स्वास्थ्य ईश्वर की हजार दिनों के बराबर है अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमें प्रातः काल जल्दी उठना चाहिए ताजा हवा में घूमना चाहिए और योग तथा व्यायाम आदि करना चाहिए । शरीर को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण योगदान होता है।योग और व्यायाम करने से शरीर स्वस्थ निरोग सुंदर तथा सुडौल बनता है शरीर से आलस्य दूर होता है और शरीर में चुस्ती-फुर्ती आती है।

व्यायाम करते समय निम्नलिखित बातों का विशेष रूप से ध्यान रखना चाहिए

> व्यायाम करते समय ढीले वस्त्र पहनने चाहिए।
 > व्यायाम खुली एवं ताजी हवा में करना चाहिए।
> व्यायाम प्रातः काल खाली पेट करना चाहिए।
> गलत या आवश्यकता से अधिक व्यायाम नहीं करना चाहिए
> व्यायाम करते समय नाक से सांस लेनी चाहिए।
>  व्यायाम प्रतिदिन नियमित रूप से करना चाहिए।

व्यायाम करते समय ढीलें वस्त्र पहनने चाहिए:-– व्यायाम करते समय या योगा करते समय हमें ऐसे वस्त्र पहनने चाहिए जो हमारी किसी भी शारीरिक प्रक्रिया में बाध्य न बने।
 
व्यायाम खुली हवा में करना चाहिए:–  व्यायाम करते समय हमें खुली हवा अर्थात किसी ऐसी जगह जहां सुबह की ताजी हवा हो जिससे हमारे शरीर के आक्सीजन लेबल में भी वृद्धि होती है।
 
 
व्यायाम हमेशा खाली पेट ही करना चाहिए:–  सुबह के समय खाली पेट व्यायाम करने से हमें अधिक फायदा होता है। सुबह उठकर दैनिक नित्यक्रम से निवृत्त होकर हमें व्यायाम करना चाहिए।
 
 
गलत या आवश्यकता से अधिक व्यायाम नहीं करना चाहिए :–  व्यायाम करते समय हमें हमेशा यह ध्यान रखना चाहिए की व्यायाम को इतना ही करें जितना उचित हो शरीर थकना जरूरी है, पर शरीर थक कर चूर हो जाए यह जरूरी नहीं ।व्यायाम हमेशा सही बताई गई तरीके से ही करना चाहिए चाहे वह सांस लेने का तरीका, चाहे वह आपके हाथ पैरों पर की जाने वाली कोई प्रतिक्रिया हो ।यदि व्यायाम गलत तरीके से किया जाए तो उसके परिणाम स्वरूप हमारे शरीर में उसका गलत प्रभाव पड़ जाता है।
 
 
व्यायाम करते समय नाक से सांस लेनी चाहिए:— 
व्यायाम करते समय हमें हमेशा नाक से सांस लेनी चाहिए। मूंह से नहीं नाक से चलिए इसके विषय में जानें।
वैसे तो हर व्यक्ति नाक से सांस लेता है। किन्तु उसै इस बात की खबर नहीं होती है। कि क्या उनके शरीर को जितनी सांस लेनी चाहिए वो ले रहे हैं की नहीं।सांस लेना अर्थात “आक्सीजन ” को शरीर में फेफड़ों द्वारा प्रवेश कराना सांस लेने का काम फेफड़ों का होता है। और नाक एक जरिया होती है जिसके द्वारा सांस ली जाती है। 
 
हमारे सांस लेने की प्रक्रिया में वे सभी हवाएं जो वायुमंडल में होती है।और इन हवाओं के साथ छोटे-छोटे धूल और कण भी प्रवेश कर लेते हैं। किन्तु हमारे नाक में छोटे-छोटे बाल होते हैं।जो इनको अंदर जाने से रोक लेते है। इसलिए मुंह की बजाय हमें नाक से सांस लेनी चाहिए।

व्यायाम हमेशा नियमित रूप से करना चाहिए:—  

योग का महत्व हमें स्वास्थ रहने के लिए प्राय थोड़ा-बहुत व्यायाम ज़रूर करना चाहिए। इससे हमारे शरीर में नयी ऊर्जा का विकास होता रहता है।
 
इस प्रकार सुविधानुसार दो चार प्रकार के आसन करने से हमारा शरीर स्वस्थ रह सकता है आइए कुछ आसनों के विषय में जानकारी प्राप्त करें।

योगासन के प्रकार:—  

पदमासन। 
 

विधि:–       

Yoga के अर्थ योगासन के प्रकार योग के महत्व
पदमासन

               यह आसन समतल भूमि पर बैठकर किया जाता है ।इस आसन में बाएं पैर को दाएं पैर की जांघ पर इस प्रकार रखा जाता हैै, कि दोनों पैरों की एड़ियां नाभि के नीचे पेड़ू के मध्य भाग में आकर जुड़े तथा दोनों पैरों के तलवे ऊपर जांघ पर स्थिर होकर रुक जाएं। गर्दन तथा रीढ़ की हड्डी को सीधा रखें कमर में बिल्कुल भी झुकाव की स्थिति नहीं होनी चाहिए।

 
लाभ :—इस आसन को करने से मन तथा इंद्रियां शांत रहती है ।पाचन शक्ति बढ़ती है। कब्ज, आलस्य आदि विकार दूर होती है। यह आसन ध्यान लगाने हेतु लाभदायक है ।
 

  शीर्षासन। 

 

Yoga के अर्थ योगासन के प्रकार योग के महत्व
शीर्षासन

 

विधि:—    इस आसन में भूमि पर कोई तकिया अथवा गद्दा रखकर अपना सिर उस पर टिकाते हैं ।दोनों हाथ सिर की बगल में टीका लेते हैं अब पैरों को धीरे-धीरे ऊपर उठाते हैं ।और धीरे-धीरे पैरों को सीधा कर देते हैं ।कुछ देर तक इसी स्थिति में रहकर पैरों को मोड़ते हुए भूमि पर दिखा देते हैं ।इसके बाद सीधे खड़े हो जाते हैं ।और कुछ देर इसी अवस्था में खड़े रहते हैं इससे शरीर का रक्त जिसका दबाव शीर्षासन करते समय नीचे की ओर हो गया था ।फिर से अपनी पहली अवस्था में आ जाता है।
 
 लाभ:–  शीर्षासन  करने से हमारे शरीर के प्रत्येक अंग में रक्त का संचार ठीक प्रकार से हो जाता है मस्तिष्क में रक्त संचार ठीक प्रकार  से होने से बुद्धि का विकास होता है ।इससे शरीर की सभी आंतरिक अंग मजबूत बनते हैं। 
 
 
वज्रासन
 
विधि:– 
                   इस आसन को करते समय पैर दोनों पंजों एवं उंगलियों को आपस में मिलाकर सीधे खड़ा होना चाहिए। इसके बाद घुटनों को भूमि को झुकाते हुए सामने की ओर भूमि पर टिका देना चाहिए ।  पैरों के तलवे आकाश की ओर रहे तथा नितंब भाग एड़ियों पर टिका होना चाहिए ।इस आसन में दोनों पैर मिले होने चाहिए पूरे शरीर का वजन घुटनों और टखनों पर रखें ।आरंभ में घुटनों और टखनों में दर्द होगा लेकिन बाद में ऐसा नहीं होगा दोनों हाथ सीधे पैर के घुटनों पर रखिए ।इस आसन में कमर के ऊपर का हिस्सा गर्दन और सिर एक सीध में होता है। इस आसन में काफी लंबे समय तक आराम से बैठा जा सकता है।
 
 लाभ  :–इस आसन को करने से मानसिक निराशा दूर होती है ।तथा स्मरण शक्ति बढ़ती है। नियमित रूप से यह आसन करने वाला उच्च रक्तचाप , घुटनों, जांघों के दर्द जैसी बीमारियों से दूर रहता है ।पाचक रस अधिक मात्रा में बनता है ।जिस कारण व्यक्ति कब्ज,ज्वर आदि बीमारियों से पीड़ित नहीं होता। इस आसन को भोजन से पहले अथवा बाद में भी किया जा सकता है।
 
 
मयूरासन
 
विधिः– 

 

Yoga के अर्थ योगासन के प्रकार योग के महत्व
मयूरास
 
इस आसन को करते समय शरीर को आकृति मोर की तरह हो जाती है। इसलिए इसे मयूरासन कहा जाता है इसमें पहले दोनों हाथों को भूमि पर टिखाया जाता है ।फिर कहानियों को मोड़कर छाती और पेट से सटा दिया जाता है। 
और शरीर का संपूर्ण भार उन पर डालते हुए पैरों को ऊपर उठाया जाता है। और ध्यान रहे कि सिर भी भूमि से न लगे इस प्रकार सारे शरीर का भार कुहानियों पर आ जाएगा ।और पूरा शरीर भूमि के तल के समांतर हो जाएगा ।कुछ समय तक इस स्थिति में रहकर पैरों को भूमि पर टिका कर सीधे खड़े हो जाना चाहिए।
 
 लाभ:— इस आसन को करने से हमारे पेट की आंतरिक प्रिय प्रणाली स्वस्थ और सफल होती है बुक अच्छी लगती है और कब्ज आदि शिकायतें समाप्त हो जाती हैं 
 
         संतुलित आहार 
 
सभी प्राणियों को अपने जीवन में स्वस्थ रहने के लिए भोजन की आवश्यकता भी होती है ।हमारा भोजन संतुलित होना चाहिए जिससे शरीर को सभी आवश्यक पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में मिल सके भोजन में अनाज दालों साग सब्जी गुड़ शक्कर फलों,घी- तेल और दूध-दही का उचित मात्रा में समावेश होना चाहिए। मांसाहारी लोग अपने भोजन में मांस मछली और अंडे का प्रयोग कर सकते हैं ।
 
 
शिक्षा:– योग का महत्व हमें अपने शरीर को स्वस्थ रखने के लिए स्वास्थ्य के नियमों का पालन करना चाहिए स्वस्थ नागरिक एवं देश को मजबूत बना सकता है 
Webuakti Reed 
 

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