short moral stories in hindi for class 1 हिंदी कहानी

 मुनिया की कहानी#2

 हिंदी कहानी तिकड़म जोशी 

Short moral stories in hindi एक था जोशी उसका नाम झींगुरीलाल था ।वह जानता कुछ भी नहीं था फिर भी महान ज्योतिषी होने का दावा करता था ।
 
एक रोज वह पड़ोस के नगर में जाने के लिए निकला ।रास्ते में उसने देखा कि दो सफेद बैल पोखर में पानी पी रहे हैं ,छपाक -छपाक उड़ा भी रहे हैं ।उसने यह बात अपने दिमाग में बैठा ली ।
जोशी नगर में पहुंचा और एक बनिए के घर ठहरा ।वहां उससे मिलने एक किसान आया। जोशी से उसने कहा झींगुरीलाल हमारे दो बैंल खो गए हैं। क्या आप अपनी पोथी में देख कर बता सकते हैं कि वह कहां गए होंगे ?तिकड़म जोशी ने कुछ श्लोक बुदबुदए ।फिर पूछा ,’क्या तुम्हारे बैल सफेद थे ?’किसान तुरंत बोला, ‘आपको कैसे पता चला ?’उतर देने के बजाय उसने झूठ मुठ पंचांग की पोथी खोली और दो चार पन्ने उल्ट कर कहा,’ तुम्हारे बैल सिवान पर पोखर के पास हैं ।जाकर ले आओ।’
 
 किसान वहां पहुंचा तो उससे अपने दोनों बैल मिल गए ।वह बहुत प्रसन्न हुआ और उसने सौ रुपए का एक नोट इनाम देकर जोशी को भी खुश कर दिया ।
 
दूसरे रोज जोशी की परीक्षा करने के लिए बनिए ने खुद उससे कहा,’ झीगुरीलाल अगर आपका ज्योतिष शास्त्र सच्चा है तो बताइए कि आज हमारे घर में बाजरे की कितनी रोटियां बनी है?’ जोशी के पास कोई काम तो था नहीं, इसलिए तवे पर डाले जाने वाली रोटियों की आवज वह सुन रहा था ।जब रोटी तवे पर गिरती, तपाक से आवाज उठती है ।यह आवाज उसने तेरह बार सुनी थी ।फिर एक बार थोड़े श्लोक बोलने का दिखावा कर उसने कहा ,’श्रीमान जी,आज तो आपकी रसोई में तेरह रोटियां बनी है।’ यह सुनकर बनिया भी भौचक्का रह गया।
 Short moral stories in hindi
इन दो घटनाओं से तिकड़की जोशी का नाम सारे नगर में चर्चा का विषय बन गया ।कोई कहता जोशी त्रिकाल ज्ञानी है ।कोई कहता उसके  वश में प्रेतों का राज है जो उसे राज की सारी बातें बताता है ।
 
उन्हीं दिनों राजा की चहेती रानी का नौलखा हार गायब हो गया ।जब राजा ने जोशी का बोलबाला सुना तो उसने फौरन सिपाही भेजकर उसे दरबार में बुलवाया ।
 
‘जरा अपनी पोथी में देखकर यह बताओ कि महारानी का हार कहां है ?हार मिल गया तो हम तुम्हें निहाल कर देंगे ।’
 
जोशी घबराया ।गहरी सोच में पड़ गया राजा ने आगे कहा आज की रात तुम हमारे महल में रहो और रात भर जाप जप करके सुबह तक हार ढूंढ निकालो ।याद रखना नाकाम रहे तो कोल्हू में पेर कर तुम्हारा तेल निकाला जाएगा।’
 
 रात रुकने के बाद विक्रम जोशी बिस्तर पर लेट गया। लेकिन उसे नींद नहीं आई मन में डर घुसा था ।राजा सवेरे सिपाहियों के साथ आएंगे वह हार मांगेंगे ।नहीं दिया तो प्राण ले लेंगे। अपना दुख भूलने के लिए वह खिड़की में से चांद को देख गुनगुनाने लगा :
 
चांद है तू गले का फंदा है तू
 इनका भी मरघट से न्योता है तू 
 
यह ऊटपटांगा गा रहा था और महल की एक दासी थर थर कांप रही थी ।संयोग से उसका नाम चंदा था और रानी का हार भी उसी ने चुराया था ।वह घबरा गई उसने सोचा अपने परम ज्ञान के बल से जोशी को उसका नाम मालूम हो गया है। तभी तो फांसी के फंदे की बात कर रहा है। वह तुरंत हार लेकर जोशी के पास पहुंची और बोली,’ मुझे क्षमा कर दो, झीगूरीलाल !यह है नौलखा हार, इसे आप रखिए ।कृपया मेरा नाम किसी को मत बताना। मैं आपके पांव पड़ती हूं ।’जोशी मन ही मन प्रसन्न होकर उदारता से बोला ,’तुम्हें माफ किया।अब तुम एक काम हमारा कर दो यह हार महारानी के कमरे में पलंग के नीचे रख दो।
 
 सवेरा होने पर सिपाही हाजिर हो गए। जोशी उनके साथ राजा के दरबार में आया और अंट संट श्लोक बोलने लगा ।फिर अपनी उंगलियों के पोर गिनकर पंचाग निकाला ।और दो चार पन्ने उल्ट कर बोला,’ महाराज मेरा शास्त्र कहता है कि महारानी का हार चोरी नहीं हुआ है। आप तलाश करवाइए। हार महारानी के कमरे में से ही मिलना चाहिए ।उनके पलंग के नीचे से।’
 
 फौरन तलाश करवाने पर हार पलंग के नीचे से मिल गया। राजा जोशी पर बहुत प्रसन्न हुए और उसे दस हजार का नगद इनाम दिया। तभी उसे ख्याल आया जोशी क्यों न एक बार आजमाया जाए।
 
राजा ने तरकीब सोची और जोशी को अपने साथ शिकार पर ले गए।  जोशी जब हिरनों के झुंड को कुलांचे भरते देखता एकटक देख रहा था। तब राजा ने चुपके से एक झींगुर पकड़ कर अपनी मुट्ठी में बंद कर लिया ।फिर जोशी से पूछा अब बताओ मेरी मुट्ठी में क्या है।ं याद रहे गलत कहा तो तुम्हारा सिर कहीं कलम कर दिया जाएगा जोशी झेंप गया। उसे लगा कि अब सारा भेद खुल जाएगा और वह पागल राजा उसे स्वर्ग लोक की यात्रा पर भेज देगा। उसने इकरार करने के इरादे से सच-सच बता दिया।
 
रोटियां गिनी टप टप टपाक
दो बैल देखें छप छप छपाक
 चंदा का फंदा दे गया हार
 रोए झींगुर झर झर झपाक 
 
झींगुर शब्द सुनकर राजा चकित हो गया उसे भरोसा हो गया कि तिकड़म जोशी सच्चा जोशी है। वरना उसे कैसे पता चलता कि महाराज की मुट्ठी में झींगुर फंसा है ।राजा ने मुट्ठी खोली और झींगुर को उड़ाते हुए कहा वह जोशी वह तुमने तो कमाल कर दिया जोशी ने सोचा बाल-बाल बच गया।
 वरना उसे कैसे पता चलता है कि महाराज की मुट्ठी में झींगुर फंसा है ? राजा ने मुट्ठी खोली और झींगुर को उड़ाते हुए कहा,वाह जोशी, वाह! तुमने तो कमाल कर दिया ।
जोशी ने सोचा- बाल-बाल बच गया, वरना …
 
राजा ने उसे एक हजार का और इनाम दिया और पूरे आदर के साथ महल से विदा किया। Short moral stories in hindi
 
 
 
Webuakti Reed 
 
 
 
 
 
 
 

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