Short moral stories in Hindi for class 1


Short moral stories in hindi

      3  Short moral stories in Hindi

छोटे बच्चों के मनोरंजन के लिए short moral stories in hindiएक चींचीं चिड़िया की कहानी, मैं हूं मर्द  मुछन्दर,मूनिया रानी जैसी बहुत ही सुंदर कहानी लाई गई है।

 

           Hindi kahani   चींचीं चिड़िया की कहानी

Short moral stories in hindi एक थी चिड़िया। एक रोज वह राजा के बाग में दाना चुग रही थी कि उसे एक मोती मिला। चिड़िया ने उसे अपनी चोंच में पहना और इठलाती हूंई पेड़ पर जा बैठी थी। तभी वहां के राजा की सवारी निकली। उसे देखकर चिड़िया बोली।

 

राजा तेरी रानी है रोती
देख के मेरी नाक में मोती
मोती है मेरा जगमग जगमग
रानी है तेरी गड़बड़ गड़बड़

यह सुनकर राजा को ऐसी खीज चढी़ कि चिड़िया को कच्चा चबा जाएं ।लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। वह बगीचे में टहलकर वापस लौट गया। दूसरे रोज जब राजा दरबार में गया चिड़िया ने गाना फिर से शुरू कर दिया।

राजा तेरी रानी है रोती
देख के मेरी नाक में मोती
मोती है मेरा जगमग जगमग
रानी है तेरी गडबड गडबड

इस बार राजाआग बबूला हो उठा उसने जाल बिछाकर चिड़िया को पकड़ लिया। जिस मोती के कारण चिड़िया अंट संट बोल रही थी, वह भी उसे छीन लिया लेकिन चिड़िया थी निडर । वह राजा से बिना डरे बोली :

राजा तू कैसा भिखमंगा
छीन लिया मेरा मोती चंगा
मर जा डूब संग रानी के
कल कल कर बहती है गंगा

यह सुनकर राजा का पारा सातवें आसमान पर चढ़ गया। वह बडबडाया- मैं भिखारी हूं ?हरगिज नहीं।मैं तो राजा हूं , राजा , मुझे भला किस बात की कमी है ।तुरंत उसने चिड़िया को मोती लौटा दिया। चिड़िया भी कुछ कम नहीं थी। बोली :

राजा तू है कैसा वीर
दे दिया मोती बिन चलाएं तीर
छोड के गद्वी जा जंगल में
बन जा संत महंत या बड़का पीर

इस बार आजा क्रोध में चिल्ला उठा ,छोटा मुंह और बड़ी बात! पकड़ो इस नदान चिड़िया को ।सिपाहियों ने तुरंत उसे गिरफ्तार कर लिया फिर उसका सिर मुंडवा कर उस पर चूना लगाया उसे महल से बाहर कर दिया। चिड़िया जलभुनकर बुदबुदाई,’ राजा के पूरे परिवार का सिर न मुंडवाऊं तो मेरा नाम चीची चिड़िया नहीं।’ वह तुरंत उडी और शंकर जी के मंदिर में जा बैठी ।वहां राजा रोजाना दर्शन को आता और पूजा करता :

हे शंकर भगवान दो
भर भर के भंडार दो
अरबों दो फिर खरबो दो
फाड़ फाड़ के छप्पर दो।

रोज की तरह राजा ने आज भी सिर झुका कर शंकर भगवान की पूजा की, तो वहां छीपी चिड़िया आवाज बदल कर बोली ,’हम शिव जी बोल रहे हैं। राजा, तुम्हें फूटी कौड़ी भी नहीं मिलेगी।’ राजा सोच में पड़ गया कुछ समझ में नहीं आया तो उसने सिर नवाकर कहां क्षमा करें भगवान हमसे कोई कसूर हुआ हो तो माफ कर दो आप जो भी कहेंगे तो सो प्रायश्चित करेंगे, लेकिन छप्पर फाड़ के दो।’ चिड़िया फिर बोली,’ तब तुम्हें और तुम्हारे परिवार को सिर मुड़वा कर माथे पर चूना लगवाना होगा ।बोलो ,है मंजूर ?’राजा था लालची ।अरबों खरबों के लालच में उसने तुरंत हामी भर दी।

दूसरे रोज उसके पूरे परिवार ने सिर मुड़वाया ,सिर पर चूना लगाया और सभी मंदिर में आए। राजा ने कहा,’ हे भगवान !अब तो अरबों दो और खरबो दो, लेकिन छप्पर फाड़ के दो।’ तभी मूर्ति के पीछे छिपी चिड़िया फुर्र करती उडी।: फिर बोली:

राजा मैंने बजा दिया तेरा बाजा
राजा मैंने बजा दिया तेरा बाजा
मैं सिर मुंडी तू भी है सिर मुंडा
राजा मैंने बजा दिया तेरा बाजा

यह सुनकर राजा ने अपना सिर पीट लिया।

      Hindi Story  मैं हूं मर्द मूछंदर

 Short moral stories in hindi एक था बनिया। उसे घी खरीदना था। वह घी की कुप्पी और सौ रूपये लेकर दूसरे गांव जाने के लिए निकला ।रास्ते में शाम हो गई थोड़ी देर में अंधेरा भी छा गया ।वह मारे डर के कापने लगा। तभी उसने दूर में कुछ देखा ।उसे शंका हुई- कोई चोर तो नहीं है! बनिये का दिल नगाड़े की तरह बजने लगा। फिर भी साहस जुटाकर उसने गला खंखर कर मुझ पर ताव दिया और बोला:

अगर तू है चूहा छछूंदर
तो मैं भी हूं मर्द मुछंदर
अगर तू है नामी उचक्का
तो मैं भी हूं डाकू पक्का

बनिया यों बोलता, खांसता और गला खंखारत जा रहा था ,धीमे-धीमे आगे भी बढ़ रहा था। जब बिल्कुल पास पहुंचा तो देखा कि वहां पेड़ का एक ठूंठ खड़ा था। बनियों को अपनी बेवकूफी पर हंसी आ गई।

         Hindi Story  मुनिया रानी

 Short moral stories in hindi एक थी बुढ़िया ।जाने कहां से एक रोज उसके घर में एक गिलहरी आ गई बुढ़िया बहुत खुश हुई। उसने गिलहरी का नाम मुनिया रखा ।उसके लिए आंगन में झूला बांध उसे लिटा दिया। घर का काम करते-करते बुढिय़ा इधर तो कभी उधर जाती और गिलहरी को

झुलाते-झुलाते लोरी गाती:
हाथ के लूंगी हजार पर एक
पाव के लूंगी हजार पचास
नाक के लूंगी लाख पर एक
लाख के लूंगी पचास लाख

एक रोज पास के गांव का राजा शिकार के लिए निकला था ।उसने बुढ़िया की कुटिया के पास से गुजरते हुए लोरी सुनी। वह सोच में पड़ गया भला यह मुनिया रानी कौन होगी बुढ़िया उसके लिए धर की ढेरी मांग रही है तब जरूर ही वह बड़ी सुंदर होगी ।
राजा ने उससे ब्याह करने का फैसला किया। फिर गुड़िया के पास जाकर कहां,’ मांजी, हमें अपनी बेटी दिखाओ। हम उससे शादी करना चाहते हैं।’ बुढ़िया हंस कर बोली,’ महाराज, मेरी बेटी तो एक नन्ही सी गिलहरी है ।भला आप उससे शादी कैसे कर सकते हैं ?’ राजा था सनकी। बुढ़िया की बात उसने नहीं मानी।वह बोला,’ मांजी, भले ही आप की लाडली चौपाई हो, हम तो उसी से शादी करेंगे ‘ सुनकर बुढिया बोली, तब जाइए और सिर्फ एक कुल्हड़ भरकर रुपया ले आइए। मैं अपनी मुनिया बेटी का ब्याह करवा दूंगी।’

राजा रुपया लेने गया। बुढ़िया लालची थी। ढेर सारे रुपए लेने की उसने एक तरकीब सोची। एक बड़ा गड्ढा खोदा। गड्ढे पर पीपा रखा। पीपे पर एक मटका रखा ।मटके पर गगरी रखी और गगरी पर कुल्हड़ रखा ।ऊपर से नीचे तक सबके पेंदी में छेद था। राजा आया वह कुल्हड़ में रुपए डालने लगा लेकिन कुल्हड़ भरता ही नहीं था ।आखिर जब दस बोरे भरकर रुपए डाले गए तब कुल्लड़ भरा और राजा का ब्याह गिलहरी से हुआ राजा ब्याह कर गिलहरी से हुआ।

राजा ब्याह कर गिलहरी को महल में ले आया ।उसने महल की सातवीं मंजिल पर उसके लिए सोने का एक छोटा सा घर बनवाया ।फिर फरमान जारी किया कि उस मंजिल पर कोई न जाए। महल में सब सोचने लगे, राजा जरूर किसी परी को ब्याह कर लाया होगा और उसे किसी की नजर न लगे, इसीलिए प्रतिबंध लगाया होगा।’ कोई व्यंग्य में कहता,’ राजा मोम की गुड़िया लाया होगा। कोई उसे छू दे और वह पिघल जाए तो?’

गिलहरी को रोज बढ़िया दाने डाले जाते थे। वह दाने खाती और अपने कमरे में फुदकती रहती। राजा दिन में दो बार उससे मिलने आता। उसे अपने हाथ पर बैठाकर छत पर घुमाता। कभी उसके साथ आंख-मिचौली भी खेलता। एक बार राजा के रसोइए ने जानना चाहा कि रानी कैसी होगी। उसने रानी को आजमाने का तय किया। फिर राजा से कहा, ‘महाराज क्या रानी माता रसोई के काम में हमारी थोड़ी मदद कर सकती है?’ राजा बोला, ‘जरूर ,लेकिन काम क्या है।’रसोईया ने कहा,’ धान साफ कर चावल तैयार करने का है।’ राजा बोला,’ ले आओ’ रसोईया तुरंत भंडार से धान की टोकरी ले आया। राजा ने वह टोकरी गिलहरी के पास रख दे गिलहरी समझ गई उसने अपने दांतों से धान के छिलके इस खूबी के साथ निकाले कि एक भी दाना नहीं टूटा और एक ही रात में सारी टोकरी चावलों से भर गई।

सवेरे राजा ने टोकरी रसोइए को लौटा दी चकाचक चावल के दाने देखकर वह दंग रह गया। तभी दीवाना आया। वह भी रानी की परीक्षा लेना चाहता था। उसने राजा से पूछा,’ क्या राज माता गीली मिट्टी पर डिजाइन बना सकती है?’ राजा ने तुरंत उत्तर दिया,’ इसमें कौन बड़ी बात है ।

दीवान में एक कमरे में फर्श पर गीली मिट्टी बिछा दी और राजा से कहा रात भर में डिजाइन तैयार हो जाए तो बड़ी कृपा होगी।’ जब गिलहरी को मालूम हुआ तो उसने महल की छत पर से आवाज दी। करीब के पेड़ पौधों में खेल रही सारी गिलहरियां दौड़ आई।

फिर सब ने मिलकर कमरे में इधर से उधर उधर से इधर दौड़ शुरू कर दी देखते ही देखते चिकनी मिट्टी पर बढ़िया आधुनिक डिजाइन तैयार हो गई ।सवेरे फर्श देख दीवान भी चकित रह गया। उसने सोचा-रानी तो सचमुच बडी गुणी है ।

थोड़े दिनों बाद राजा का दिल्ली जाना हुआ। उसने गिलहरी के लिए सोने के घर में पर्याप्त दाना-पानी रख दिया। लेकिन लौटने में उसको देर हो गई ।दाना पानी खत्म हो गया। गिलहरी को प्यास लगी उसकी जबान सूखने लगी ।जब रहा न गया तो वह गले में कुल्हड़ लटका कर पानी भरने गई तभी आकाश में से शंकर-पार्वती का रथ निकला।

शंकर जी ने पूछा,’ पार्वती जी क्या आप जानते हैं कि यह गिलहरी कौन है पार्वतीजी, क्या आप जानती हैं कि यह गिलहरी कौन है?’पावर्ती जी बोली,’नहीं तो!’ शंकर जी ने कहा, यह तो राजकुमारी है ।इसे किसी ऋषि का श्राप लगा है। इसीलिए इसको गिलहरी का जन्म लेना पड़ा।’

पार्वती को दया आ गई। उन्होंने शंकर जी से प्रार्थना की कि वे झटपट इस गिलहरी को फिर से राजकुमारी बना दे। शंकर जी ने आकाश में से चमत्कारी जल छिडका तुरंत गिलहरी सुंदरी बन गई जब राजा दिल्ली से लौटा तो उसने सारा हाल सुना। वह बहुत खुश हुआ। उसने सारे नगर जनों को हलवा पूरी खिलाएं और आकाश में पटाखे छोडे। सारा आकाश रंगीन हो गया। short moral stories in hindi

 

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