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                            बड़ा कौन
Hindi kahani New बहुत समय पहले एक नगर में एक भिखारी रहता था। प्रत्येक सुबह वह अपना लंबा-चोगा पहनता और फिर अपना कटोरा उठाकर भीख मांगने के लिए निकल जाता। वह आवाज लगाते हुए कहता हमारे पास जो कुछ भी है वह ईश्वर का ही और दिया हुआ है हम सब उसी के बच्चे हैं।
उस  भिखारी का नाम कृपाल था उसे जो कुछ भी मिल जाता था उसी में व संतोष कर लेता था। उनका जगन्नाथ नाम का एक दोस्त था।
वह भी एक भिखारी था वह आवाज देकर कहता था राजा की कृपा से मुझे भोजन अवश्य प्राप्त होगा।
जगन्नाथ की आवाज सुनकर तो वहां का राजा भी खुश होता था लेकिन कृपाल की बात से वह सहमत नहीं था वह कृपाल  को दिखाना चाहता था कि उसकी बात गलत है ।एक दिन राजा ने कृपाल की बात को गलत साबित करने के लिए एक युक्ति सोची।
Hindi kahani New  राजा ने एक बड़ा पपीता खरीदा, उसका एक हिस्सा काटा और उसे सोने के सिक्के से भर दिया।इसके बाद उसने दोनों हिस्सों को फिर से बड़ी सफाई से जोड़ दिया उसी समय कृपाल भीख मांगता हुआ उधर से निकला‌।
राजा ने अपने सेवकों से कृपाल को कुछ चावल देने को कहा चावल लेकर कृपाल वहां से चला गया ।थोड़ी देर बाद जगन्नाथ भी भीख मांगता हुआ वहां आ पहुंचा और आवाज लगाई ,राजा की कृपा से मुझे भोजन अवश्य मिलेगा
जगन्नाथ की बात सुनकर राजा बहुत खुश हुआ।उसने उसे सोने सिक्कों से भरा पपीता दे दिया जगन्नाथ ने सिर झुका कर वहां पपीता स्वीकार कर लिया और वहां से चला गया।
कुछ समय बाद कृपाल उस फलवाले  के पास जाकर भीख मांगने लगा फल वाले ने उसे वही पपीता दे दिया घर पहुंचने पर कृपाल वह  पपीता खाने बैठा लेकिन वह जब उसने पपीता काटा तो यह देखकर हैरान रह गया कि वह सोने के सिक्के से भरा हुआ है
कृपाल भिखारी जरूर था लेकिन वह बहुत ही ईमानदार भी था। वह किसी दूसरे व्यक्ति की स्वर्ण मुद्राएं कभी इस्तेमाल नहीं कर सकता था वह तुरंत फलवाले के पास जाकर उसे वह सिक्के देता हुआ बोला पपीते के अंदर यह सिक्के मिले हैं इन्हें ले लो।
फल वाला ईमानदार था वह तुरंत बोला यह जगन्नाथ के होंगे उसी ने यह पपीता मुझे बेचा था।
तब तक जगन्नाथ भी वहां आ पहुंचा उसने उन्हें बताया कि वह पपीता उसे राजा ने दिया था। फिर कृपाल राजा के पास सोने के सिक्के वापस करने जा पहुंचा।
          Hindi kahani New कृपाल के पास हुए सिक्के देखकर राजा हैरान रह गया उसे मानना ही पड़ा कि संसार में हर किसी को सब कुछ ईश्वर द्वारा ही दियाlll जाता है बाद में उसने वे सिक्के कृपाल को ही दे दिए।

कौन है झूठा

       Hindi kahani New एक दिन कितूर के शासक के दरबार में शंकर शेट्टी नाम का एक अपराधी पेश किया गया। उसका अपराध साबित हो जाने के बाद राजा ने उसे उम्र कैद की सजा दे दी।अपनी सजा सुनकर शंकर शेट्टी बहुत दुखी हुआ और अपनी स्थानीय भाषा में राजा को गालियां देने लगा।
          शंकर शेट्टी जानता था कि अब इसका शेष जीवन कारागार के सलाखों के पीछे ही काटना है। अगर वह चुपचाप कारागार चला भी जाएगा, तो भी राजा उसे मुक्त नहीं करेगा इसलिए वह बिना किसी भय के राजा को गालियां दे रहा था लेकिन राजा वह भाषा न जानने के कारण उसकी बातों का मतलब समझ नहीं पा रहा था।
 Hindi kahani New जब शंकर शेट्टी का बड़बड़ाना शांत नहीं हुआ तो राजा ने माधव नाम के अपने एक मंत्री से पूछा “यह अपराधी क्या बक रहा है तुम मुझे इसका मतलब बताओ उम्र कैद पाकर भी इसकी दुष्टता अभी गई नहीं लगती है” माधव एक दयावान व्यक्ति था
उसने सोचा, अगर मैं राजा को सच बता बता दूंगा तो वह इसको कोड़ों से पिटवाएगा।यह तो दुख के कारण ही अनर्गल प्रलाप कर रहा है।
       यह सोचकर माधव राजा से बोला है “यह कह रहा है कि जो व्यक्ति अपने क्रोध पर नियंत्रण रखते हैं और दूसरे के अपराध क्षमा कर देता ह, ईश्वर उन पर कृपा करता है” यह सुनकर राजा को शंकर शेट्टी पर दया आई। उसने सोचा कि शंकर इतना बुरा नहीं है,जितना प्रतीत होता है यह सोच कर उसने शंकर को मुक्त कर दिया
        उसी समय पूर्वधन नाम का एक मंत्री भी वहां खड़ा था वह राजा और मंत्री माधव की बातचीत पूरे ध्यान से सुन रहा था। उसने देखा कि माधव ने जब शंकर राजा को शंकर शेट्टी की बातों का गलत मतलब बता कर उसे कठोर दंड से बचा लिया। यह देखकर पूर्वधन बहुत खुश हुआ क्योंकि वह माधव से ईर्ष्या करता था।
        माधव के इस कार्य से उसे माधव को राजा के सामने नीचा दिखाने का अच्छा मौका मिला था। उसने सोचा मैं यह मौका छोडूंगा नहीं मैं ऐसा उपाय करूंगा कि राजा आप कभी माधव पर विश्वास नहीं करेगा यह सोचकर वह राजा से बोला ,”महाराज माधव ने आपको शंकर शेट्टी की बातों का गलत अर्थ बताया वास्तव में शंकर शेट्टी आपको अपशब्दों का प्रयोग कर रहा था। क्योंकि आपने उसे उम्रकैद का दंड दिया था।” राजा ने माधव से अपनी सफाई देने को कहा उसकी बात सुनने के बाद।
    Hindi kahani New राजा बोला माधव के झूठ बोलने पर के पीछे कोई स्वार्थ नहीं था। वह मानवता के नाते शंकर शेट्टी को कठोर दंड से बचाना चाहता था। इसलिए उसने परोपकार की भावना से ही झूठ बोला। लेकिन पूर्वधन को तुम मात्र माधव से ईर्ष्या करने के कारण मुझे सच्चाई बता रहे हो।
         तुम्हारे सत्य बोलने के पीछे किसी को लाभ पहुंचाने का उद्देश्य नहीं है।इसलिए मैं अनुभव करता हूं। कि माधव का झूठ तुम्हारे सबसे अधिक प्रशंसनीय है। मैं ईर्ष्या के कारण बोले गए सत्य की प्रशंसा नहीं करता”
          Hindi kahani New  सात रंगों वाला पन्ना
Hindi kahani New   बहुत समय पहले एक देश का नागार्जुन नामक राजा शासन करता था। वह अपनी अपार धन-संपत्ति और अच्छे शासन के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध था।
नागार्जुन की दो रानियां थी।बड़ी रानी के एक बेटी राजकुमारी लक्ष्मी आधौर एक बेटा राजकुमार प्रताप था दूसरी रानी राजकुमार राघवेंद्र की मां थी। राजा नागार्जुन ने अपने बड़े बेटे प्रताप को ही यूवराज घोषित किया था प्रताप एक योग्य राजकुमार था। और प्रजा उस से प्रेम करती थी।
जब राजा नागार्जुन बूढ़ा हो गया तो उसने अपना खजाना अपने दोनों बेटो के बीच बांटने का निश्चय किया। खजाने के अलावा राजा के पास सात रंगों वाला एक सुंदर पन्ना भी था। राजा ने खजाना तो बराबर बराबर बांट दिया लेकिन पन्ने के बंटवारे पर समस्या खड़ी हो गई।
राजा उस पन्ने को युवराज को देने देना चाहता था। लेकिन छोटे बेटे को राजा का एक फैसला पसंद नहीं आया। दरबार में भी आधे लोग युवराज के पक्ष में थे। तो आधे छोटे राजकुमार की तरफ थे। फिर धीरे-धीरे प्रजा में भी इस बात के कारण फूट पड़ गई।
राजा नागार्जुन इस संबंध में कोई अंतिम निर्णय नहीं कर पा रहा था। तभी एक दिन कोई चोर महल में घुसकर उस पन्ने को चुरा ले गया।इस प्रकार जिस सात रंग वाले पन्ने के कारण राजकुमारों सहित पूरी प्रजा में फूट पड़ गई थी वह किसी को भी नहीं मिला सका।
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