Hindi stories for kids with moral| हिंदी नैतिक कहानियां

                अप्पाजी की चतुराई
Hindi stories for kids   बहुत समय पहले विजयनगर साम्राज्य पर कृष्णदेव राय नाम के एक प्रसिद्ध राजा  शासन करते थे। उनके दरबार में अप्पाजी नाम के एक  मंत्री थे जो अपनी चतुराई के प्रसिद्ध थे।
         राजा कृष्णदेव राय को भी पूरा विश्वास था कि अप्पाजी अपनी बुद्धिमत्ता से किसी भी समस्या को हल कर सकते हैं। कलिंग के राजा ने भी अप्पाजी की चतुराई के विषय में खूब सुना था।
एक बार उसने अप्पाजी की बुद्धिमत्ता की परीक्षा लेने की ठानी। एक दिन उसने राजा कृष्णदेव राय को भी पत्र लिखकर उसके कुछ गोभियां और मूलियां कलिंग भेजने का अनुरोध किया।
उसका पत्र पढ़कर राजा कृष्णदेव राय खूब हंसे। फिर वे अप्पाजी से बोले,  “मैं नहीं समझता था कि कलिंग का राजा इतना बेवकूफ है।
जरुर पढें:-   अकबर बीरबल की चतुराई वाली कहानी 
          क्या उसे इतना भी पता नहीं कि गोभियां और मूलियां वहां तक पहुंचते-पहुंचते सड़ जाएंगी?
         वह कोई और मूल्यवान वस्तु मंगवा सकता था। उस समय बिजयनगर से कलिंग तक पहुंचने में तीन महीने लगते थे।तब अय्यप्पा जी ने मांगी गई वस्तुएं कलिंग तक पहुंचाने की एक योजना बनाई ।
       Hindi Stories for kids उन्होंने एक बैलगाड़ी मंगवाई और सेवकों से वह गाड़ी मिट्टी और खाद से भरने को कहा। फिर उसने मिट्टी से भरी बैलगाड़ी में गोभी और मूली के बीज बो दिए और राजा की अनुमति प्राप्त करके स्वयं बैलगाड़ी लेकर कलिंग की ओर चल पड़े । मार्ग में रोज पानी से मिट्टी की सिंचाई की जा रही थी।
इसी तरह तीन महीने गुजर गए । कलिंग पहुंचने तक वे  वह पूरी तरह से विकसित पौधे बन गए। अपनी योजना को सफल होते देख अय्यप्पाजी मन ही मन बहुत खुश थे ।
जरुर पढें:- महाभारत की एक अदभुत कहानी जिसे आपने सुना नहीं होगा।    अश्वाथामा कौन था
 वहां पहुंचकर उन्होंने का कलिंग के राजा को ताजी गोभियां  और मूलियां  भेंट की। अप्पाजी की बुद्धिमत्ता देख कलिंग का राजा बहुत प्रभावित हुआ। और अप्पाजी से बोला, आपने असंभव को भी संभव कर दिखाया है, अप्पाजी !

अब मैं आपके हाथों विजयनगर के महाराज को एक उपहार भेजना चाहता हूं” यह कहकर कलिंग के राजा ने अप्पाजी को तीन मूर्तियां और एक सीलबंद पत्र दिया  वे  तीनों मूर्तियां देखने में बिल्कुल एक जैसी थी ।
अप्पाजी वहां उपहार लेकर विजयनगर लौट आए और कृष्णदेव राय को वह मूर्तियां तथा पत्र दे दिया । उस पत्र में लिखा हुआ था, ये  तीनों मूर्तियां एक दूसरे से भिन्न है। एक मूर्ति उत्कृष्ट है, दूसरी सम्मान और तीसरी निकृष्ट है । क्या आप के दरबार में से कोई इन मूर्तियों का भेद बताता बता सकता है ।

 Hindi stories for kids यह पढ़कर कृष्णदेव राय ने उन मूर्तियों को बड़े ध्यान से देखा । लेकिन उन्हें उन मूर्तियों में कोई अंतर समझ में नहीं आया।
अप्पाजी भी उन मूर्तियों को ध्यान से देख रहे थे। थोड़ी देर में वे सब कुछ समझ गए
फिर उन्होंने तार का एक पतला टुकड़ा मंगवाया और उसे एक मूर्ति के कान में डाल दिया।  लेकिन वह तार कान में अधिक अंदर तक नहीं गया।
इसके उसके बाद उन्होंने वह तार दूसरी मूर्ति के कान में डाला । इस बात वह तार मूर्ति के दूसरे कान से बाहर आ गया ।उन्होंने तीसरी मूर्ति के कान में वह तार डाला तो वह मूर्ति के मुंह से निकल आया।
         यह देखकर राजा ने अप्पाजी से पूछा कि वे क्या कर रहे हैं। तब अप्पाजी ने उत्तर दिया ,”महाराज पहली मूर्ति सर्वश्रेष्ठ है।  जब मैंने इसके तार डाला तो वह अधिक अंतर नहीं गया। इसका अर्थ है कि कोई अफवाह सुनने पर उसे बिना सोचे समझे सच नहीं मान लेना चाहिए।
दूसरी मूर्ति सामान्य कोटि की है।
       जब मैंने इसके कान में तार डाला तो यह दूसरे कान से बाहर निकल आया। इसका अर्थ है कि एक कान से सुनो दूसरे कान से निकाल देना भला है। इसलिए यह मूर्ति मध्यम श्रेणी की है। यह ना तो उत्कृष्ट है और ना ही निकृष्ट ।
लेकिन तीसरी मूर्ति निम्न कोर्ट की है ।जब मैंने उसके कान में तार डाला तो वह इसके मुंह से निकल  आया ।  इसका अर्थ है कि कुछ व्यक्ति ऐसे भी होते हैं जो बात सुनने पर उसे बिना सोचे समझे बता देते हैं। ऐसे लोगों के पेट में कोई भी बात पूछती नहीं है । इसलिए यह मूर्ति निकृष्ट है। अब आप ही बताइये कि जो कुछ भी मैंने कहा वह सही है या गलत
अप्पाजी की यह बात सुनकर राजा कृष्णदेव राय के चेहरे पर एक संतुष्टि भरी मुस्कान आ गई।

फिर उन्होंने अप्पाजी के फैसले के लिए विषय में कलिंग के राजा को सूचना भिजवा दी। आखिरकार कलिंग के राजा को अप्पाजी की बुद्धिमत्ता का लोहा मानना ही पड़ा ।

Leave a Comment