Short moral stories in hindi for kids| बच्चों की शिक्षाप्रद कहानी

Short moral stories in hindi एक छोटे से गांव में रामनाथ नाम का एक किसान रहता था ।उसकी पत्नी की बीमारी की वजह से ही मृत्यु हो गई थी घर में उसकी देखभाल करने वाला कोई नहीं था। इसीलिए उसने भानुमति नाम की एक नौकरानी रख ली थी। भानुमति एक अच्छी नौकरानी थी, घर के सभी काम जैसे साफ सफाई करना,खाना बनाना, कपड़े धोना आदि वह आसानी से कर लेती थी ।

उसके साथ बस एक ही समस्या थी वह खाती बहुत थी ।हर समय उसका मुख चलता ही रहता था ।रसोई में खाना बनाते समय भी वह खाती रहती थी। रामनाथ ने कई बार उसे रंगे हाथों पकड़ा ,लेकिन इससे उस पर कोई प्रभाव नहीं पड़ा हुआ झूठ बोलकर या माफी मांग कर हमेशा बच जाती थी।

थकहार कर एक दिन रामनाथ ने उसे चेतावनी भी दे डाली। आज के बाद अगर मैंने तुम्हें चोरी से कुछ खाते हुए पकड़ लिया, तो मैं तुम्हें नौकरी से निकाल दूंगा। यह चेतावनी सुनकर भानमती रसोई से खाना चुराना बंद कर दिया ।

Short moral stories in hindi एक दिन रामनाथ बाजार से बढ़िया आम लेकर आया उसके दोस्त आनंद को शाम को उससे मिलने आना था। भानुमति को बुलाकर वह बोला,’ यह आम ले जाओ शाम को मेरे एक दोस्त को आना है इन आमों को धोकर करीने से काट लेना और फिर उसके सामने इन आमों को एक तश्तरी में ले आना’। भानमती को आम बहुत पसंद थे ।

उसने अपनी इच्छा को मन ही मन में दबाने की बहुत कोशिश की लेकिन वह कामयाब नहीं हो सकी आखिर उससे नहीं रहा गया। तो उसने सारे आम खा डाले, शाम को रामनाथ ने उससे कहा भानुमति आम ले आओ और मेरा दोस्त किसी भी समय यहां आ सकता है।

भानुमति घबरा गई वह समझ गई कि अब तो उसे अपनी नौकरी गंवानी ही पड़ेगी अचानक उसके दिमाग में एक उपाय आया उसने रामनाथ से कहा मालिक जरा चाकू में धार लगा दीजिए। धार कुंद हो जाने की वजह से आम ठीक से नहीं कट रहे हैं।

Short moral stories in hindi भानुमति की बात सुनकर रामनाथ चाकू में धार लगाने लगा इस बीच आनंद दरवाजे पर आ पहुंचा था। लेकिन रामनाथ ने उसे आते हुए नहीं दे सका था ,भानमती उसे तुरंत एक तरफ ले जाकर बोली मालिक आप से किसी बात पर नाराज लगते हैं। वह इस समय आपना चाकू तेज कर रहे हैं और बड़बड़ा रहे हैं कि आज तो आनंद की नाक काट लूंगा ।

अनंत ने अंदर जाकर देखा तो पाया कि रामनाथ चाकू को धारदार बनाने में जुटा हुआ है ।यह देखकर भयभीत होकर भाग खड़ा हुआ, फिर भानुमति फौरन रामनाथ के पास जाकर बोली मालिक आपका दोस्त मुझसे आम छीनकर भाग खड़ा हुआ। आप तुरंत उसको पीछे से पकड़ लीजिए।

रामनाथ हाथ में चाकू लिए ही अनंत के पीछे भागा ।जब अनंत ने उसे चाकू लिए आते देखा वह और भी तेजी से भागने लगा ।इस पर रामनाथ चिल्लाया ,”अरे अनंत,कम से कम मुझे आने आम तो दे दो।”

अनंत ने सोचा कि रामनाथ उसकी आधी नाक काट लेना चाहता है ।वह और तेज दौड़ने लगा और जल्द ही बहुत दूर निकल गया। थोड़ी-ही देर में वह नजरों से भी ओझल हो गया।

रामनाथ भी आखिर कब तक अनंत का पीछा करता ?वह भी घर लौट आया।वह बड़बड़ा रहा था,”भला अनंत को आम लेकर भागने की क्या जरूरत थी? यही बात वह मुझसे भी कह सकता था।”

जब भानमती ने देखा कि उसके उपाय ने उसकी नौकरी बचा ली है तो वह बहुत खुश हुई।

राजा को सबक

Short moral stories in hindi बहुत समय पहले राजा राम राय नाम का एक राजा विशाल और समृद्धशाली राज्य पर शासन करता था ।उसका जीवन विलासिता से भरा हुआ था और सांसारिक सुख सुविधाओं की उसके पास कोई कमी नहीं थी।

उसे शिकार करना बहुत पसंद था कई बार तो वह शिकार की तलाश में अपनी राजधानी से बहुत दूर निकल जाता था ।

एक बार उसने शिकार खेलने के लिए काणकोट  नामक एक घने जंगल में जाने का निश्चय किया ।वह कुछ सैनिकों को साथ लेकर उस जंगल की ओर चल पड़ा।

जंगल में पहुंचने के बाद राजा और उसके सैनिक किसी जानवर की खोज में लग गए। कुछ देर बाद राजा की दृष्टि एक जंगली सूअर पर पड़ी राजा ने तुरंत अपना घोड़ा उस सूअर के पीछे दौड़ा दिया। और बहुत देर तक उसका पीछा करने के बाद उसे मार डाला ।उसका शिकार करने के बाद जब वह पीछे मुड़ा तो उसने पाया कि उसके सिपाही उसे अलग हो गए हैं।

अब तो राजा परेशान होकर जंगल से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढने लगा लेकिन बहुत कोशिश करने के बाद भी उसे कोई रास्ता नहीं मिला। काफी देर बाद राजा की दृष्टि एक पतली पगडंडी पर पड़ी कुछ सोचकर वह उस पगडंडी पर आगे बढ़ चला।

तभी आकाश में काले बादल घूमड़ आए । और तेज वर्षा होने लगी राजा तेजी से अपना घोड़ा दौड़ आते हुए किसी आश्रय की तलाश करने लगा। कुछ दूर जाने के बाद उसे छोटा सा गांव दिखाई दिया।

राजा ने वह रात उसी गांव में गुजारने का निश्चय किया तभी उसे एक झोपड़ी में रोशनी चमकती दिखाई दी। उसने उसी झोपड़ी के सामने अपना घोड़ा रोककर उसका दरवाजा खटखटाया राजा के खटखटाने पर एक किसान ने झोपड़ी का दरवाजा खोला।

“मैं एक यात्री हूं ,”राजा जानबूझकर किसान से अपना वास्तविक परिचय छुपाते हुए बोला,” मैं रास्ता भटक गया हूं कि आप मुझे आज रात के लिए अपनी झोपड़ी में शरण दे सकते हैं?”

किसान गर्म जोशी से अपने मेहमान का स्वागत करते हुए बोला ,”आप जब तक चाहे यहां आराम से रह सकते हैं। हम तो अतिथि को भगवान का ही रूप मानते हैं।”

यह कहते हुए किसान राजा को आदर के साथ अपनी झोपड़ी के अंदर ले गया और उसे अपने कपड़े देते हुए बोला,” आपके कपड़े भीग गए हैं इसलिए आप इन्हें उतारकर सूखे कपड़े पहन लीजि।ए मेरी पत्नी भोजन तैयार कर रही है। इस बीच मैं बाहर जाकर आपके घोड़े को भी चारा डाल देता हूं।

कुछ देर बाद किसान की पत्नी ने राजा को साधारण लेकिन स्वादिष्ट भोजन परोसा राजा ने रुचि पूर्व भोजन किया और फिर सो गया ।

Short moral stories in hindi अगली सुबह जब राजा की नींद खुली तो किसान ने फलों और दूध का नाश्ता तैयार कराया राजा किसान और उसकी पत्नी के अतिथि सत्कार से बहुत प्रसन्न हुआ।और उनकी प्रशंसा करते हुए बोला,” तुमने मुसीबत के समय मेरी सहायता करके मुझ पर उपकार किया है मैं इसे सदैव याद रखूंगा” यह कहकर उसने किसान से एक कागज मांगा और उस कागज पर कुछ लिखकर किसान को दे दिया ।

फिर वह किसान से बोला ,”अगर तुम्हारे ऊपर कभी कोई मुसीबत पड़े तो तुम मेरी राजधानी में आ जाना और यह कागज राज महल के दरबानों को दिखाना। वहां तुम्हें हर तरह की मदद मिल जाएगी ।”

यह कह कर वह अपने घोड़े पर बैठकर वहां से चला गया किसान राजा की बात ठीक ढंग से समझ नहीं सका। फिर भी उसने राजा का दिया वह कागज संभाल कर संदूक में रख दिया।

कुछ सालों बाद उस गांव में अकाल पड़ा और गांव वाले तथा उसके मवेशी भूखे मरने लगे। किसान की हालत भी बहुत खराब हो गई। तभी उसे अपने अतिथि द्वारा दिए गए कागज की याद आई तब उसने उस अनजान अतिथि के पास जाकर सहायता मांगने का निश्चय किया।

राजधानी पहुंच कर उसने राजमहल के दरबानों को वह कागज दिखाया। वह कागज देखते ही एक दरबान उसे अंदर स्थित देवी चामुंडेश्वरी  के मंदिर के सामने ले गया और उस मंदिर के अंदर जाने को कहा।किसान सकुचाता हुआ मंदिर के अंदर चला गया।

मंदिर के अंदर राजा चामुंडेश्वरी से प्रार्थना कर रहा था,” हे माता! आपने जो कुछ भी मुझे दिया है, उसके लिए मैं आपका आभारी हूं। लेकिन मैं इससे संतुष्ट नहीं हूं ।मुझे आशीर्वाद प्रदान करें कि मैं और भी अधिक धनी और शक्तिशाली बन जाऊं ।”

किसान या देखकर हैरान रह गया कि उस दिन उसके घर आने वाला अतिथि और कोई नहीं बल्कि खुद राजा था ।वह राजा से कुछ कहे बिना अगले ही क्षण मंदिर से बाहर निकल आया। उसने अपना कागज मंदिर के बाहर फर्श पर फेंक दिया। और किसी से बिना कुछ कहे अपने गांव वापस चला गया।

मंदिर के बाहर खड़े दरबान ने किसान द्वारा फेंका गया कागज़ उठा लिया। और राजा के पास पहुंचकर उसे व कागज देता हुआ बोला,” महाराज अभी एक किसान यहां आपसे मिलने आया था लेकिन वह आपसे बिना मिले ही चला गया”।वह कागज देखते ही राजा समझ गया कि वह किसान कौन था तब उसने स्वयं उस किसान के पीछे जाकर सारे मामले का पता करने का फैसला किया।

फिर राजा उस किसान के पास जा पहुंचा और उसे राजमहल से बिना उससे मिले लौट आने का कारण पूछा तब किसान ने उत्तर दिया,” मैं आपसे सहायता मांगने के लिए आए था, लेकिन मैंने देखा आप खुद देवी से याचना कर रहे हैं ,जबकि आप स्वयं एक राजा हैं और आपके पास धन दौलत और सांसारिक सुख सुविधाओं की कोई कमी नहीं है ।

मैंने सोचा कि जो व्यक्ति अपने प्रजा के लिए कुछ मांगने की बजाय स्वयं धन-संपत्ति की मांग कर रहा है,उससे  क्या मांगना ?इसीलिए मैं वहां से वापस लौट आया।”

किसान की बात सुनकर राजा सकते में आ गया वह अपनी गलती समझ गया था वह जान गया था कि उस उस का सबसे बड़ा कर्तव्य धन दौलत प्राप्त करना नहीं बल्कि अपनी प्रजा के सुख और कल्याण का ध्यान रखना है।

अगर उसकी प्रजा प्रसन और उसे संतुष्ट रहेगी तो उसका राज्य भी शक्तिशाली बनेगा। उसने तुरंत अपने सेवकों को अकाल पीड़ित ग्राम वासियों के लिए अनाज की व्यवस्था करने का आदेश दिया और उस गांव को उस साल कर से मुक्त कर दिया। तब सारे ग्रामवासी प्रसन्न  होकर राजाराम राय की जय-जयकार करने लगे।

इस प्रकार एक राजा भी एक साधारण ग्रामवासी से सबक सीख कर एक महान शासक बन गया।

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