नागपंचमी की एक लोककथा | नागपंचमी कब मनाई जाती हैं।

    ।नाग पंचमी की कहानी  🐍
 

नाग पंचमी कब मनाईं जाती है? 
   नागपंचमी की कहानी  सावन माह के पांचवे दिन नाग पंचमी मनाई जाती है। इस दिन सांपों की पूजा की जाती है। इस त्यौहार को गरुडपंचमी भी कहते हैं।
   क्षइस दिन खेत जोतना और सब्जियां काटना जैसे काम बंद रहते हैं। इसके पीछे एक प्रसिद्ध कहानी है।
      नागपंचमी की कहानी कहते हैं कि बहुत पहले एक गांव में एक किसान रहता था। नागपंचमी के दिन वह अपने खेत जोतने पहुंचा। कुछ समय तक काम करने के बाद वह आराम करने के लिए के लिए बैठ गया। तभी उसका आठ साल का बेटा भी वहां आ पहुंचा।प पिता और पुत्र दोनों ही बातें करने लगे
        नाग पंचमी की कहानी कुछ समय बाद किसान फिर से खुदाई करने में जुट गया। लेकिन अब वह अपने पुत्र से बातें भी कर रहा था।अपने पुत्र की तोतली बोली उसे बहुत अच्छी लग रही थी।वह उससे बातें करने में इतना खो गया कि वह देख ही  नहीं सका कि उसके खेत में सांप का एक बिल भी है।
      अनजाने में उसने उस पर भी हल चला दिया। हल् के  आघात से बिल में मौजूद नागिन के छोटे बच्चे की उसी समय मौत हो गई। जब नागिन वापिस  लौटी तो अपने बच्चों को मरा हुआ देखकर   उसके गुस्से का ठिकाना ना रहा। वह गुस्से में  अपना फन उठाकर फुफकारने लगी।
हल पास में ही पड़ा था। उसने हल पर खून के धब्बे लगे हुए देखे। पल भर में वह समझ गई।
      किसान और उसका बेटा उस समय  पास में ही बैठे  बात कर रहे थे।उन्हें नागिन के वहां मौजूद होने का कोई भान नहीं था। नागिन उसके पास जा पहुंची। इसके पहले कि वह कुछ समझ पाते, उसने उन्हें काट लिया।
इसके बाद भी नागिन का क्रोध शांत नहीं हुआ। वह किसान के घर जा पहुंची। उस दिन नाग पंचमी थी और किसान की पत्नी नाग देवता की उपासना कर रही थी।
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      नागिन ने तय किया कि पूजा खत्म होने के बाद वह उसे भी काट लेगी। वहां एक कटोरे में नाग देवता के लिए दूध रखा हुआ था।
नागिन को बहुत भूख लगी थी। इसलिए उसने सारा दूध पी लिया। तब तक किसान की पत्नी की पूजा खत्म हो गई थी। उसनेे और जैसे ही आंखे खोली, वह सांप को देखकर भौचक्का  रह गई । उसने सिर झुकाकर नागिन को प्रणाम किया।
      त्रअब तो नागिन के लिए उसे काटना मुश्किल हो गया। उसने किसान की पत्नी को साफ-साफ बता दिया। कि उसने  उसके पति और बच्चों को काट लिया है।  उसने उसे इस बात का कारण भी बता दिया। पत्नि सुनकर रोने लगी और नागिन से माफी मांगने लगी।
       त्रअब नागिन सोचने लगी, ‘किसान ने जानबूझकर मेरे बच्चे को नहीं मारा था, लेकिन मैंने तो सिर्फ बदला लेने के लिए उसकी हत्या कर दी।मैंने बहुत बड़ा पाप किया है।’
      त्रइसके बाद उसने किसान की पत्नी से कहा, “मेरे साथ आओ। मैं तुम्हारे पति और बच्चे के शरीर से सारा जहर खींच लूंगी। इस तरह वह फिर से उठ बैठेंगे।
       किसान की पत्नी नागिन के साथ खेत पर जा पहुंची‌ नागिन ने दोनों के बदन से सारा जहर चूस लिया।
        थोड़ी ही देर में किसान और उसका बेटा उठ बैठे। यह देखकर किसान की पत्नी की खुशी का ठिकाना ना रहा। फिर उन तीनों ने सिर झुकाकर नागिन को प्रणाम किया। नागिन रेगति   हुई वहां से चली गई। उस दिन के बाद से नागपंचमी हर साल मनाई जाती है।
       नागपंचमी की कहानी यह  हमें बताती है कि लापरवाही किसी बड़े नुकसान की वजह बन सकती है इसीलिए लापरवाही नहीं करनी चाहिए।

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