Long story in hindi| love story in hindi| प्यार की कहानी

Love story सोचा ना था
# 2

 

मैंने जब मां को बताया तो वह मुझ पर ही बरस पड़ी, तू मुझे अब बता रही है। जब सब कुछ हो गया?

 

Love story in hindi मैं क्या करती मां मुझे भी तो अभी पता चला है । मम्मी का चीखना, बड़बड़ाना और मारिया को कोसना शुरू हो गया। मुझे यूनिवर्सिटी के लिए देर हो रही थी, मां को ऐसी चीखती चिल्लाती हालत मे छोड़कर मैं जा नहीं सकती थी। मुझे पता था कि वह किरण दीदी की शादी के समय से ही हार्ड की मरीज हैं ।और पापा तब से ही हमें समझाते आ रहे हैं कि तुम सब ऐसा कुछ नहीं किया करो कि मां के दिल पर असर पड़े।

 

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मैं ने पापा को फोन कर सारी बातें बताई और कहा पापा मेरा यूनिवर्सिटी जाना भी जरूरी है आप जितनी जल्दी हो सके घर आ जाओ।

 

मेरी बात सुनते ही पापा बोले, तू चिंता ना कर, मैं शीघ्र ही घर पहुंचता हूं, तब तक तो उन्हें ढंग से बैठा कर पानी पिला दे और सोबिट्रेट टेबलेट उनके मुंह में जीभ के नीचे रख दे।

 

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बड़ी मुश्किल से लाइफ सेविंग ड्ग मां की जीभ के नीचे में रख पाई, हालांकि मेरा समझना व्यर्थ ही था ।परंतु मैं उन्हें सभाले रही। फिर पापा के आते ही मैं यूनिवर्सिटी के लिए घर से निकल गई।

 

Love story in hindi मैं रास्ते भर इसी सोच में डूबी रही कि कैसे अपने और रितेश के प्यार को सहेज पाऊंगी।मैं भी तो एकांत पलों में बनारस के बोटैनिकल पार्क में उसके साथ जीने मरने की कसमें खा चुकी हूं।

 

बनारस का यह पार्क रितेश को तो पसंद था ही मुझे भी पसंद आने लगा क्योंकि अपने प्यार का इजहार करने के लिए वह मुझे पहली बार यही लाया था।

 

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बचपन में उसके पापा कर्नल शरद रायजादा अपनी वा इफ और नन्हे रितेश को इसी पार्क में साथ ले कर अक्सर घूमने ले आते थे ।कश्मीर पोस्टिंग के दौरान उसके पापा आतंकवादियों द्वारा किए गए एक हमले में शहीद हो गए थे और तब रितेश की मां डिंपी भी अपने इकलौते बेटे रितेश को लेकर इसी पार्क में आकर एक अजीब सा सुकून महसूस करती थी।रितेश अक्सर इस पार्क में मुझे किसी पेड़ के सहारे टीका कर बैठा देता।

 

Love story in hindi फिर मेरी गोद में आकर सिर रखकर लेटते हुए कहता सिम्मी अपने प्रिय साथी को खोने के बाद कितना अकेला रह जाता है इंसान। उसका इशारा अपनी मां की तरफ रहता था ।इस पर मैं अपनी उंगलियां उसके घुंघराले घने बालों में फंसा कर सहलाने लगती और कहती।

 

यह तो जीवन का खेल है, समय कुछ छीनता है तो समय के साथ बहुत कुछ दे भी देता है।ल

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यह कहते-कहते मैं उसके चेहरे पर झुक कर अपने सारे खुले बाल बिखरे देती और वह शरारत से अपना चेहरा उठाकर मेरे ओंठ चूम लेता, हमारे दिन एक दूसरे को समझाते हुए ऐसे ही बीत रहे थे। मुझे पता था कि रितेश आज क्लास नहीं अटैड कर पाएगा क्योंकि उसे आज मां को लेकर रेगुलर चेकअप के लिए मिलिट्री अस्पताल जाना था।

 

यूनिवर्सिटी में मेरा बिल्कुल भी मन नहीं लगा प्री एग्जाम प्रिपरेशन पीरियड्स चल रहे थे। इसीलिए अटेंड करना बहुत जरूरी था इसलिए और भी रितेश आज एब्सेंट था ।

 

शाम को यूनिवर्सिटी से जब मैं घर पहुंची तो घर में काफी हंगामा मचा हुआ था। मैंने घर में प्रवेश करने के साथ ही भाई को कहते हुए सुना मां तुम मुझे कितना ही मार लो पर मैं किरण दीदी की तरह कमजोर नहीं हूं मैंने मारिया से कोर्ट में शादी कर ली है।

तुम्हें उसे बहू के रूप में स्वीकार करना ही होगा।  गुस्से के मारे मां शायद भैया के गालों पर कई चाटे झड़ चुकी थी।  पापा उन्हें संभालने में जुटे हुए थे ।क्या कहूं तूने? एक तो गलत काम किया  मुझे बताएं बिना एक ईसाई लड़की से शादी कर ली। love story in hindi

 

मैंने तेरे लिए कितनी सुशील लड़की ढूंढ रखी थी। लेकिन जिसे आप मेरे गले मढ देना चाहती थी। वह तो मुझे बचपन से ही ना पसंद है ।

 

भैया आप चुप ना हुआ तो मम्मी फिर आपे से बाहर हो गई, मुझे अपनी करनी है तो इसी समय निकल जा इस घर से, अपने जीते जी मैं तेरी चाहेती के कदम कभी इस घर में नहीं पड़ने दूंगी।

 

यह कहते हुए हुए मां का हाथ, फिर से भैया के ऊपर उठ गया और लेकिन पापा ने बीच में ही उनका हाथ रोक कर जोरो से उन्हें डांटा पागल हो गई हो क्या, इतने बड़े लड़के पर हाथ उठाएं चली चली जा रही हो, जिसे वह चाहता ही नहीं उससे वह कैसे शादी कर ले, रही उर्मिला की बात तो उसे कोई दूसरा लड़का मिल जाएगा।

 

और सुजाता से किए वादे का क्या होग?

तुम्हें अपनी सहेली से ऐसा वादा करना ही नहीं चाहिए था।

अच्छा तो तुम भी अपने बेटे को समझाने के बजाय मुझे समझाने लगे, गांधारी, तुम शायद भूल रही हो कि थायराइड और डायबिटीज की दवाओं के साथ-साथ तुम्हें हार्ड की भी परेशानी है, तुम्हारा इतना गुस्सा करना ठीक नहीं है। चलो अपने कमरे में चलो कहकर पापा मां को संभालते हुए अपने कमरे में ले गए।

उनके कमरे में जाते ही भैया ने उपर अपने कमरे में जाकर पिट्ठू बैग उठाया और बाहर खड़ी अपनी बाइक लेकर तुरंत कहीं निकल गया।

मैं जब तक उसे रोकती, पापा ने मुझे आवाज देकर कमरे में बुला लिया, मां के सीने के बाएं तरफ तेज दर्द उठने लगा था।और वह अपनी सीने पर हाथ रखकर जोरो से कराह रही थी। मैं जब उनके पास पहुंची तो पापा ने मुझे मां के पास बैठने के लिए कहा। और मुझसे बताया की तुम्हारी मां को हार्ट-अटैक आया है। पापा ने मां को उनकी दवा दी। और मुझसे कहा

 

,”अभी तो आराम करने देते हैं नींद आ गई तो ठीक नहीं तो रात में ही अस्पताल ले जाना होगा तू आशीष को बुला कर ला”।

 

वह तो अपना पिटठू बैग लेकर बाइक से कहीं चला गया है।

 

ओह, पापा ने इतना ही कहा, फिर मुझ बोले अच्छा ऐसा कर तू मेरे लिए एक कप कॉफी बना कर ले आ।

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