Short moral stories in hindi vaphaadaar oont 

                वफादार ऊंट 

 

यह एक Short moral stories है। आपको इस कहानी में एक वफादार ऊंट की कहानी बताई जा रही है।

      जंगल का राजा केसरी बहुत निर्भीक तथा बलवान था। जंगल के सभी जानवर उससे बहुत डरते थे। वह अपनी राजा के लिए अक्सर कुछ उपहार लाते रहते थे।

Moral stories in hindi बाघ की बीबी 

 एक दिन उसने सोचा कि मेरे ऊपर काम का बहुत बोझ है। मुझे अपनी सहायता के लिए कुछ मंत्री चुन लेने चाहिए। यह सोचकर उसने सबसे पहले लोमड़ी को बुलाया और बोला,” तुम बहुत ही बुद्धिमान और चालाक समझी जाती  हो,इसीलिए मैं तुम्हें अपना गृहमंत्री बनाता हूं ।”

Short moral stories in hindi बच्चों की मनोरंजन भरी मजेदार कहानी

“धन्यवाद महाराज! यह मेरे लिए बहुत ही सम्मान की बात है।”लोमड़ी ने सिर झुकाते हुए कहा ।

 

 Short moral stories    इसके बाद उसने तेंदुए को बुलाकर कहा तुम बहुत कर्मठ और  तीव्र चाल  वाले हो, इसलिए मैं तुम्हें अपना रक्षा मंत्री नियुक्त करता हूं।”

 

 ” धन्यवाद महाराज! धन्य भाग्य हमारे , कि आपने मुझे इस लायक समझा,” तेंदुआ बोला। 

 

    इसके बाद शेर ने कौवे को बुलाकर कहा,” तुम आकाश में बहुत ऊंचा उड़ सकते हो, इसीलिए मैं तुम्हें अपना विदेश मंत्री नियुक्त करता हूं।” 

Love story in hindi 

  ” मुझे छोटे से जीव  को इतना सम्मान देने के लिए धन्यवाद,” कौवे ने कृतज्ञ होते हुए कहा कवि ने कृतज्ञ धोते हुए कहा। उस दिन तीनों ने केसरी के प्रति ईमानदार रहने की शपथ ली और शेर ने बदले में उन्हें भोजन तथा सुरक्षा देने का वचन दिया।

 

   इसके बाद वे तीनों मंत्री राजा के प्रत्येक काम में उसकी सहायता करने लगे। केसरी जी जहां भी जाते। वे तीनों पीछे पीछे जाते। शेर के भोजन के उपरांत उन तीनों के लिए भी काफी भोजन बच जाता।

 

  एक दिन विदेश मंत्री कौवे ने आकर शेर से कहा ,” महाराज ! क्या आपने कभी ऊंट का मांस खाया है? मेरे विचार से वह बहुत ही स्वादिष्ट होगा।” शेर ने भी ऊंट मांस कभी नहीं खाया था,

 

 इसलिए उसे यह विचार बहुत पसंद आया।” पर यह ऊंट  हमें कहां मिलेगा?  शेर ने पूछा ।” यहां से कुछ मील दूर मैंने एक ऊंट को रेगिस्तान में देखा है,” कौवे ने जवाब दिया।

 

“ठीक है, फिर कल हम सभी वहां चलेंगे,” शेर ने कहा और सब सोने चले गए।

 

    अगले दिन केसरी जी अपने तीन मंत्रियों के साथ ऊंट की खोज में रेगिस्तान के लिए निकले । चलते चलते हुए बहुत दूर निकल आए। वे रेगिस्तान तक पहुंच गए, पर अब तक सूरज का ताप बहुत बढ़ गया था शेर के पंजे रेगिस्तान की गर्म रेत से बुरी तरह झुलस रहे थे ।बहुत परेशान होने पर शेर ने अपने मंत्रियों से कहा कि हम जंगल वापस चलते हैं। मैं अब और आगे नहीं जा सकता ।

 

  शेर की बात से तीनों बहुत निराश हो गए, क्योंकि उसके बिना ना तो वे ऊंट का शिकार कर पाती है और ना ही उसका मांस खा सकते थे। पर तीनों ही अवसर खोना भी नहीं चाहते थे।

 

 सभी लोमड़ी को एक तरकीब सूझी वह दौड़ी दौड़ी ऊंट के पास गई और बोली ,” मेरे साथ चलो आज मैं तुम्हें जंगल के राजा से मिलवाती हूं।” ऊंट भी जंगल के राजा से मिलने की लालसा में लोमड़ी को अपनी कूबड वाली पीठ पर बैठा कर चल दिया।  रास्ते में लोमड़ी बोली,” तुम्हारे स्वामी को हमारे राजा ने मार दिया है। तुम अब आजाद हो अब हम सब मिलकर जंगल में रहते हैं ।” 

 

Short moral stories शेर के पास पहुंचकर लोमड़ी बोली,”  चलिए महाराज आप सब ऊपर बैठ जाइए  हम सब अपने घर चलेंगे।” सारे ऊंट की पीठ पर बैठ कर आराम से जंगल पहुंच गए।  जंगल में तीनों मंत्री ऊंट को मारकर खाना चाहते थे ।पर शेर ने यह कहकर उसको छोड़ दिया कि इसने हमें तपते रेगिस्तान से निकालकर सही सलामत जंगल तक पहुंचाया है ।

 

   किसी को भी यह बात अच्छी नहीं लगी सभी बहुत भूखे भी थे शेर ने अपने तीनों मंत्रियों से भोजन ढूंढ कर लाने के लिए कहा।।तीनों ने कुछ दूर जाकर एक योजना बनाई। शेर के पास पहुंचकर सबसे पहले कौवा बोला,”  महाराज बहुत ढूंढने पर भी भोजन नहीं मिल सका पर हम आपको भूखा नहीं छोड़ सकते, इसलिए आप मुझे खा लीजिए।”  योजना अनुसार लोमड़ी ने कौवे को हटाते हुए कहा,”  आप मुझे खा लीजिए मैं इससे आकार में बड़ी हूं, मुझे ही खाकर अपकी भूख शांत होगी।”  तेंदुए ने भी लोमड़ी को पीछे धकेल ते हुए खुद को खाने की पेशकश की।

 

ऊंट  ने सोचा कि इन तीनों ने तो अपनी स्वामी भक्ति दिखाई है। मुझे भी शेर के सम्मुख खुद को प्रस्तुत करना चाहिए। जैसे ही ऊंट ने शेर के सामने जाकर स्वयं को खाने का प्रस्ताव रखा तीनों मंत्रियों ने अपनी सहमति जताई, पर राजा तो ठहरा राजा वह उनकी यह चाल समझ गया और मुस्कुराते हुए बोला,”  मैं जानता हूं तुम मेरी वफादार प्रजा हो तुम्हारे इन प्रस्ताव ने मेरे दिल को छू लिया। मैं बारी बारी से तुम सब को उसी क्रम से खाऊंगा, जिस क्रम से मैं तुम ने स्वयं को खाने का प्रस्ताव रखा है ।”

 

शेर की आवाज सुनते ही तीनों मंत्री वहां से नौ दो ग्यारह हो गए। शेर हंसते हंसते लोटपोट हो गया । वह ऊंट से बोला,”  वास्तव में तुम ही सबसे वफादार हो। तुम मेरे साथ पूरी जिंदगी रह सकते हो। मैं तुम्हें कभी नुकसान नहीं पहुंचाऊंगा।” इसके बाद वे दोनों खुशी-खुशी रहने लगे। Short moral stories

Leave a Comment