Hindi kahani | शेखचिल्ली की कहानी | moral stories in hindi

 Hindi kahani       ।। हिरणा कूदा होए।।
तब शेखचिल्ली बोला ,”एक बार गांव में से कोई हाथी रात को गुजरा रास्ते में उसके पैरों के बड़े-बड़े निशान बन गए। सुबह लोगों ने एक गांव में हाथी के बड़े-बड़े पैरों के निशान देखे।
    अचंभे में पढ़कर लोग एक दूसरे से खुसर फुसर कर रहे थे ।
एक बूढ़ा बोला किसी ने रात में थाली के निशान बना दिए हैं ।
दूसरा बोला चांद गोल होता है वही नीचे आया होगा ।
और गांव से निकल गया होगा हो सकता है ।
कमल के पत्ते से कोई ऐसा निशान बन गया हो। तीसरे ने कहा लोग संतुष्ट नहीं हुए।
Hindi kahani शेखचिल्ली की कहानी
सब ने कहा कि लाल बुझाक्कड़ को बुलाया जाए गांव वालों ने उन्हें बुलाया । लाल बुझाक्कड़ बोले।
लाल बुझाक्कड़ बूझिया और ना बूझे  कोय ।
पग  में चक्का बांध के हिरण कूदा होय ।
सारी लड़कियां हंसते हंसते लोटपोट हो गई।
वे हँसे जा रही थीं । शेख साहब खड़े देख रहे थे।  तभी एक लड़की बोली- अब चल री- घर पर पिटाई भी कर देगी हमारी अम्मिया ” – और वह पानी के घडे सिर पर रखने लगी।
चलते-चलते एक साथ कई लड़कियों ने कहा” जीजा जी को सलाम कहियेगा, हमारी ओर से।”! जरूर कहूंगी । ना  कहोगी तब भी ।”
लड़कियां चली जा रही थी और शेख चिल्ली उन्हें देखे जा रहे थे।
वे अपनी भावी  पत्नी को बड़े ध्यान से देख रहे थे।
वे काफी देर वहां खड़े रहे ।
फिर से अपने दोस्तों के पास आ गये । दोस्तों ने पूछा -मियां।बोलो   मिल आये अपनी उनसे?
मिल आया — बातें भी कर  आया पनघट के कुए पर ।
अच्छा?- यार – दोस्तों की आंखें फैल गयी।
हां तुम लोग साथ होते तो बातें भी ना हो पाती।
कहते हुए शेख चिल्ली हंस पड़े ।
अपने सभी दोस्तों के साथ शेख चिल्ली घर के लिए लौट पड़े ।
कुछ दिनों के बाद शेख चिल्ली की शादी हो गई। सुहाग रात के समय नकाब उलटकर चिल्ली बोले  जानेमन । इधर देखो तो जरा गौर से ।
दुल्हन ने आंखें खोली और देख कर चौंक उठी।
चिल्ली हंसकर बोले= वही हूं …जो पनघट पर पानी पीने के बहाने तुम्हारा दीदार करने आया था। दुल्हन शरमाकर मुस्कुरा दी। चिल्ली मियां के जूते उतार दिए , पैर ऊपर किये  और पलंग पर लेट गए । दुल्हन उनके पैर दबाने लगी ।
शेख चिल्ली ने उसे बाहों में समेट लिया और बातें करने लगे ।
बातों- ही- बातों में उन्होंने दुल्हन को इतना खुश कर दिया कि दोनों दो शरीर होते हुए भी एक जांन हो गये।
फिर उनकी बीवी बोली – तुम अब कोई शानदार लतीफा सुनाओ ।
सुनाता हूं प्रिय… सुनो–
एक बार हम रेलगाड़ी में सफर कर रहे थे ।हमारी उम्र रही होगी साढे पांच साल की । अब्बा अपना और मम्मी का टिकट ले लिया था । पर मेरा नहीं लिया था। इतफाक से टिकट- चेकर आ गया। टिकट- चेकर ने पूछा- इसके टिकट कहां है?” बाबूजी! ये  बच्चा तो ढाई साल का ही है इसलिए   हमने इसका  टिकट नहीं लिया ।
ये बच्चा ढाई साल का  है ? कंडक्टर ने विसमय से  बच्चे की ओर देखा ।  हां  जी
अब्बा अब्बा झूठ मत बोलो..अम्मी हमे रोज रोज कहती है कि हमारा चिल्ली अब पांच साल का हो चुका है।
आप इन्हें ढाई साल क्यों बताते है?
चेकर  मुस्कुराकर बोला – बच्चा सच बोलता है और तुम झूठ बोलते हो।
लेकिन इसकी सच्चाई पर तुम्हें माफ करते हैं।
मियां जी …आईन्दा तुम इस बच्चे का आधा टिकट जरूर लिया करना ।
चेकर चला गया तो अब्बा का जोरदार थप्पड़ मारे गाल पर पड़ा। सच बोलने की मुझे जबरदस्त सजा मिली ।
तुम अब भी ऐसा ही सच बोलते हो।– बीवी ने पूछा।।
हां मैं कभी झूठ नहीं बोलता।
मुझसे भी सदा सच ही बोलना।
चिल्ली ने उससे वादा किया कि वह सदा सच ही बोलेगा।।

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