Short moral stories in hindi| हेनरी फोर्ड की कारें

Short moral stories अगर दिल में कुछ कर दिखाने की लग्न हो और दिमाग में जुनून हो तो दुनिया का शायद ही कोई काम है ऐसा हो जिसे मनुष्य अपने दम पर करके न दिखा दे हेनरी फोर्ड ने ऐसे ही एक काम को अंजाम दिया आइए इस कहानी को पढ़कर जाने ।

संयुक्त राज्य अमेरिका में स्थित मिशीगन के डियरबॉन नामक स्थान पर बहुत साल पहले एक गरीब किसान रहता था । 1863 ई. में एक किसान के घर एक नन्हे बालक ने जन्म लिया । किसान ने अपने बेटे का नाम हेनरी फोर्ड रखा।

 

ये भी पढ़ें:- सेहतनामा health tips in hindi स्वास्थ्य रहने के तरीके,बालों की देखभाल कैसे करें।

हेनरी फोर्ड के पिता का सपना था कि उनका बेटा बड़ा होकर कुछ ऐसा काम करें जिससे लोगों का भला तो हो ही साथ ही उनकी गरीबी और बदहाली भी दूर हो जाए। गरीब किसान होने के कारण हेनरी फोर्ड के पिताजी अपने बेटे के लिए शिक्षा की बहुत अच्छी व्यवस्था नहीं कर पाए। परंतु हेनरी भी बचपन से ही अद्भुत प्रतिभा और लगन थी इसके साथ ही अपने पिताजी के सपने को पूरा करने के लिए उनमें साहस और उत्साह भी था।

 

Short moral stories बचपन से ही हेनरी को खेलने या दोस्तों के साथ घूमने से कहीं ज्यादा कल पुर्जों में लगे रहना तथा घर घड़ियों की मरम्मत करना अच्छा लगता था । जबकि इन सब के लिए उनके पास औजारों के नाम पर केवल एक कील कुछ बुनने की सलाइयां और एक चिमटी ही थी ।

 

ये भी पढ़ें:- top 10 moral stories in hindi

16 वर्ष की आयु में हेनरी फोर्ड मशीनों की एक दुकान में काम करने लगे वह बिना घोड़े की चलने वाली एक गाड़ी बनाना चाहते थे। उन्होंने इसके लिए नए नए प्रयोग करने शुरू किए रात रात भर जागकर वे इसके लिए काम करते रहते , अतः 1886 की एक रात दो बजे उनकी  मेहनत रंग लाई। और उनकी कार बनकर तैयार हो गई।

 

 

 उस वक्त बड़ी तेज बारिश हो रही थी पर फोर्ड ने उसी समय अपनी गाड़ी बाहर निकाली और उस पर बैठकर पूरे मोहल्ले का चक्कर लगाया। वह बहुत खुश थे क्योंकि गाड़ी ठीक चल रही थी ।

ये भी पढ़ें:- मुनिया की कहानी

 

Short moral stories कुछ दिनों बाद फोर्ड ने अपनी पहली गाड़ी $200 में बेच दी । इस रकम से उन्होंने एक और अच्छी गाड़ी बनाई। हालांकि उन दिनों अमेरिका में कारे बननी शुरू हो गई थी, पर वो इतनी महंगी होती थी कि बहुत अमीर लोग ही उन्हें खरीदते थे।

 

फोर्ड ऐसी कारे बनाना चाहते थे जो इतनी सस्ती हो कि अधिकांश लोग उन्हें खरीद सकें। जब फोर्ड ने दो रेसिंग कार बनाई तो लोगों ने उनकी कंपनी में विशेष रूप से रुचि लेनी शुरू कर दी फोर्ड की पहली रेसिंग कार 999 थी।

 

 इसनें जितनी भी दोडों में हिस्सा लिया हमेशा प्रथम स्थान प्राप्त किया। आखिरकर वर्ष 1903 में फोर्ड मोटर कंपनी की स्थापना हुई वर्ष 1909 ने अपनी टी मॉडल कार बनाई या कार बहुत प्रसिद्ध हुई।

ये भी पढ़ें:- love story in hindi प्यार भरी कहानी

 

 उस समय उनके पास पैसे की जैसे बाढ़ ही आ गई थी। इसके बाद फोर्ड के कारखाने में पहले सैकड़ों फिर हजारों और उसके बाद लाखों कारों का निर्माण होने लगा। फोर्ड की कारे अच्छी और सस्ती होती थी। उनका तथा उनके पिताजी का सपना अब पूरा हो गया था ।

 

दरअसल फोर्ट सस्ती और अच्छी कार्य बनाने में इसलिए सफल हो पाए क्योंकि उनके कारखाने में सब काम बड़े व्यवस्थित ढंग से होते थे। बनती हुए कारे जब एक मजदूर से दूसरे मजदूर के पास जाती तो उसके पास केवल एक औजार होता था।

 

 जिसका वह पूरी कुशलता से उपयोग करता था। फोर्ड ने विदेशों में भी अपने कार्य सस्ते दामों पर बेचने की युक्ति निकाल ली थी। वह केवल कल-पुर्जों को विदेश भेजते थे। जहां पहले से नियुक्त उनके मजदूर उन्हें जोड़कर कारे तैयार कर देते थे।

 

 इस तरह फोर्ड की कारें पूरी दुनिया में सस्ते दामों पर मिलने लगी इसके लिए संसार आज भी फोर्ड का आभारी है। इस समय फोर्ड कंपनी की कारों के अत्याधुनिक मॉडल तैयार हैं। बस शोरूम में जाकर टेस्ट ड्राइव करना है ।

सीख    हमें परिश्रमी एवं दृढ़ निश्चय बनना है। सपनों को साकार करने के लिए प्रयत्नशील रहना है। और अपने माता-पिता की आशाएं पूरी करनी है। समाज और देश की प्रगति के विषय में सूचना है। short moral stories

Leave a Comment