हिंदी कहानी बगुला बना बेटा| hindi kahani for kids

   हिंदी कहानी बगुला बना बेटा यह एक लोक कथा है  

 

बहुत समय पहले एक औरत अपने इकलौते बेटे के साथ रहती थी। जब बेटा बड़ा हो गया तो उसने उसकी शादी एक सुंदर लड़की के साथ कर दी। वह लड़की जितनी सुंदर थी उतनी ही साफ और अच्छे दिल की भी थी ।वह पूरा मन लगाकर अपने पति और सास की सेवा करती थी।

 

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एक दिन पत्नी पति के लिए भोजन लेकर खेत पर गई ।उस समय पति खेत जोत रहा था। पत्नी को खाना लेकर आया देखकर उसने हाथ-पैर धोए और भोजन करने बैठ गया । पेट भर कर स्वादिष्ट भोजन करने के बाद उसने पत्नी से सुपारी का डिब्बा मांगा। पत्नी ने तुरंत पति के हाथ में सुपारी का डिब्बा थमा दिया। 

 

पति ने सुपारी कतरी और फिर उस पर चुना लगाकर उसे चबाने लगा ।  यह देखकर पत्नी की भी सुपारी खाने की इच्छा हुई। पति ने कुछ सुपारी कतर कर पत्नी को भी दे दी। पत्नी ने चूने की डिबिया खोली लेकिन उसमें चूना खत्म हो गया था । तभी पत्नी की नजर पेड़ के तने पर लगी किसी चूने जैसी चीज पर पड़ी। वह उस चीज को चूना समझ बैठी । वह उस पदार्थ को सुपारी पर लगाकर खा गई लेकिन वह पदार्थ वास्तव में चूना नहीं बल्कि बगुले की बीट थी।

 

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कुछ समय बाद पत्नी गर्भवती हो गई। परिवार में हर कोई प्रसन्न था।  पांचवे महीने पत्नी को रिवाज के अनुसार मायके भेज दिया गया। मायके में भी खूब खुशियां मनाई जा रही थी क्योंकि वह उसका पहला बच्चा था । नौवें  महीने पत्नी ने बच्चे को जन्म दिया, लेकिन यह देखकर सब ने दांतो तले उंगली दबा ली कि वह बच्चा इंसान, नहीं बल्कि एक बगुला था। खुद पत्नी भी बहुत भौंचक्की रह गई ।वह समझ नहीं पा रही थी कि उसके गर्भ से बगुला क्यों पैदा हुआ है ।

 

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पंडित और वैद्य लाख  कोशिशों के बाद भी इसका कारण बताने में नाकाम रहे। पत्नी ने बगुले को ही अपनी संतान के रूप में स्वीकार कर लिया। और बड़े लाड प्यार से उसका लालन-पालन करने लगी । कुछ दिनों बाद वह अपनी ससुराल लौट गई ।ससुराल वाले भी उसकी संतान के रूप में एक बगुले को देखकर वह चकित रह गए। 

 

एक दिन उन सभी को शादी में शामिल होने का निमंत्रण मिला। पत्नी सोच रही थी कि बगुले को साथ लेकर वह शादी के समारोह में कैसे जाएगी। लेकिन पति अपनी पत्नी और अपनी संतान बगुले से बहुत प्यार करता था। वह अपनी पत्नी से बोला,” भला हम इसमें क्या कर सकते हैं, यह सब तो ईश्वर द्वारा बनाया गया विधान है।”

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    वे दोनों अपने बगुले बेटे को लेकर ही शादी में पहुंच गए। पत्नी अन्य स्त्रियों के साथ खाना पकाने में लग गई । वह खीरे काट कर अपने बगल में रखती जा रही थी। बगुला इन खीरो के बीजे उठाकर पड़ोसी गांव की ओर चल पड़ा । वहां उसने एक विशाल खेत देखा। फिर उसने वे बीच उस खेत में सो  दिए। और अपनी मां के पास लौट आया ।

 

कुछ महीनों बाद बगुला फिर से उस खेत में गया और ईश्वर से प्रार्थना करने लगा ।उसने ईश्वर से अपने माता-पिता के लिए एक घर मांगा । ईश्वर ने उसकी प्रार्थना स्वीकार कर ली। उसे एक सुंदर घर दे दिया ।

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अगले दिन बगुले ने अपनी मां के पास जाकर कहा,” मैंने आपके और पिताजी के लिए घर बनवाया है। जरा मेरे साथ आइए । मैं आपको वह घर दिखाना चाहता हूं।” 

 

माता ने पूछा,” कहां है वह घर?  क्या वह यहां से दूर है ? तुम तो उड़ कर आसानी से वहां पहुंच जाओगे, लेकिन हमारे लिए तो वहां पहुंच पाना मुश्किल होगा।” 

 

” मैं आप दोनों को आसानी से वहां ले चलूंगा । पिताजी मेरे बाय पंख पर बैठ जाएंगे और आप मेरी दाएं पंख  पर बैठ जाइए।”  बगुले ने कहा ।

 

माता-पिता दोनों ही बगुले के पंखों पर जा बैठे फिर बगुला दक्षिण दिशा की ओर उड़ चला । थोड़ी ही देर में वह उस खेत में जा पहुंचा। वहां एक विशाल और सुंदर घर था ।उस घर की भव्यता तो देखने लायक थी। किसान और उसकी पत्नी ने घर देखकर बहुत प्रसन्न हुए।

 

 उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इतना सुंदर घर देखा था । उस घर के चारों ओर एक सुंदर बगीचा था ।जिसमें बहुत सी सब्जियां थी। अब वह सभी  हंसी खुशी से रहने लगे। बगुले ने अपनी मां से कहा,”  मां मैंने यह सारी सब्जियां आप लोगों के लिए उगाई है। इन्हें किसी और को मत दीजिएगा नहीं तो मुझे अपनी जान देनी पड़ेगी।”

 

  मां ने बगुले को भरोसा दिलाया कि वह वो सब्जीयां  किसी और को नहीं देगी। एक बार एक बूढ़ी भिखारिन उनके घर आकर भीख मांगने लगी । उसकी हालत बहुत ही खराब थी उस समय बगुला घर पर नहीं था। मां को उस गरीब भिखारी की दशा पर दया आ गई। और उसने कुछ सब्जियां उसे दे दी। इत्तेफाक से उसी समय बगुला घर लौट आया। और उसने मां को वह सब्जियां भिखारिन को देते हुए देख लिया।

 

 जब बूढी भिखारिन चली गई तो बगुला गुस्से में अपनी मां से बोला,” यह क्या कर दिया आपने ? मैंने आपसे कहा था ना कि किसी को इस घर की सब्जियां  मत देना । आपकी इस गलती की कीमत अब मुझे अपनी जान देकर चुकानी पड़ेगी । यह कहकर बगुले ने अपने प्राण त्याग दिए ।अगले ही पल बगुले की जगह एक अट्ठारह साल का लड़का खड़ा था। मां ने कहा,” अरे! मेरा बगुला मर गया, लेकिन उसकी जगह मुझे इंसानी बच्चा मिल गया है ।” यह कहते हुए मां ने उस बच्चे को अपने कलेजे से लगा लिया। इसके बाद किसान और उसका परिवार हंसी खुशी रहने लगा ।

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