हिंदी कहानी| मछलियों की खेती short moral stories in hindi

 (हिंदी कहानी ) मछलियों की खेती  कुछ लोगों को दूसरों को मूर्ख बनाने में मजा आता है पर वे यह भूल जाते हैं कि कभी कभी शेर को भी सवा-शेर मिल जाता है आइए ऐसी ही एक कहानी पढ़ें।

 

आजकल मुल्ला नसरूद्दीन होजा को बागबानी का नया नया शौक चढ़ा था। उसने अपने घर के पीछे की खाली पड़ी जमीन में तरह-तरह के फलों के पौधे लगाए और बड़े प्यार से उनकी देखभाल करने लगा। होजा की बागवानी के प्रति नई अभिरुचि देखकर उसके कुछ दोस्तों ने उसकी मदद भी की इससे होजा एक खूबसूरत बगीचे का मालिक बन गया ।

 

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(हिंदी कहानी )एक दिन बगदाद के सुल्तान का एक मुंह लगा हुआ वजीर इम्तियाज शिराजी नसरुद्दीन होजा से मिलने आया उस समय नसरुद्दीन बगीचे में घास की निराई करने में व्यस्त था ।

 

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“ क्यों नसरूद्दीन जी, सुना है आजकल आप अच्छे खासे माली बन गए हैं? पर यहां तो मुझे नए किस्म के पौधे ना के बराबर दिख रहे हैं।“ सिराजी ने मजाक उड़ाते हुए कहा।

 

“ ओह सिराजी साहब आइए आइए देखिए मुझे जो जो बीज मिलते हैं मैं बो देता हूं। अब नए पौधे के बीज ना मिले तो भला मैं क्या करूं?” नसरुद्दीन ने गंभीरता से कहा।

 

“ तभी तो मैंने पूछा नए बीज मैं दे सकता हूं। पर मुझे शक है कि आप उन्हें उगा सकेंगे।“

 

“ आप शक ना करें ।मैं हर तरह के बीच उगा सकता हूं।“

“ तब तो कल सवेरे अपने नौकर के हाथों में वह नायाब किस्म के बीज आपके घर भिजवा दूंगा ।“

 

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अगली सुबह सिराजी का एक नौकर एक पोटली लेकर आया और नसरुद्दीन को देते हुए बोला,” हमारे मालिक ने यह बीज दिए हैं। और इन्हें बड़ी हिफाजत से उगाने को कहा है। जब पौधे बढ़ने लगेंगे तो वे खुद आकर देखना चाहेंगे।“

 

“ जरूर, जरूर।“ नसरुद्दीन ने कहा और एक बीज परखने के लिए मुंह में डालकर उसे कुतरा। वह समझ गया कि सिराजी ने उसका मजाक उड़ाया है ।दरअसल, सिराजी ने बीजों के बजाय  मछलियों के सुखाए गए अंडे भेजे थे। यह देखकर नसरुद्दीन को गुस्सा तो आया लेकिन सिराजी से टकराना सुल्तान से टकराने के बराबर था इसलिए नसरुद्दीन उसे यथासमय सबक सिखाने का निश्चय करके उस समय चुप रह गया।

 

इस तरह दो-तीन सप्ताह बीतने पर एक दोपहर नसरुद्दीन को शिराजी के बीच बाजार में दर्शन हो गए।“ कहिए कैसे हैं आप? आप के पौधे तो खूब फल फूल रहे हैं ना?” शिराजी ने कुटिलता पूर्वक मुस्कुराते हुए पूछा।“ आपकी दुआ से इस बार बगीचा ऐसा खिला है कि पौधों के पत्ते तो दिखाई ही नहीं देते।“

 

“ वाह! और हां मैंने जो बीज भेजे थे, उन्हें बो दिया था ना?” शिराजी ने फिर शरारत की ।

 

“हां- हां मैंने तो उसी दिन बो दिए ।“ शायद उनमें अभी अंकुर नहीं फुटे होंगे । मेरे दामाद ने भी कहा था कि उन्हें उगाना ऐरे – गैरे के वस की बात नहीं।“

 

“ लेकिन मैं भी साधारण माली नहीं हूं। उचित प्रकार का खाद और पर्याप्त पानी डालकर बीज बो दे तो सब तरह के बीजों से अंकुर फूट जाते हैं ।आपने जो बीज भेजे थे, उनमें अभी अंकुर फूट रहे हैं, पर उन्हें कीड़े और धूप न लगे, इसीलिए मैंने उन पर उपले डक दिए हैं, आप कल सवेरे आकर खुद देख सकते हैं।“

 

 शिरा जी का चेहरा पीला पड़ गया। ला-हौल विला…।अच्छी बात है । तो मैं कल जरूर आऊंगा।“  वह बोला ।हिंदी कहानी 

 

अब नसरुद्दीन सीधे मछलियों की दुकान पर पहुंचा। उसने किलो भर छोटी-छोटी मछलियां खरीदी और घर वापस आ गया। फिर उसने उन मछलियों को अपने बगीचे की खाली जमीन में ले जाकर, कुछ इस तरह से पंक्तियों में आधा-आधा गाड दिया कि उनके मुंह जमीन से ऊपर दिखाई देने लगे। उसने फिर उन पर  उपले ढक दिए।

 

 दूसरे दिन शिराजी सुबह-सुबह नसरुद्दीन के घर जा पहुंचा । नसरुद्दीन उसे अपने बगीचे में ले गया और उपलो से ढकी फसल दिखाई। उसने जैसे ही उपले उठाएं मछलियों के मुंह यो दिखाई दिए जैसे जमीन से ऊपर आए हो।

 

 (हिंदी कहानी)यह दृश्य देखकर शिराजी का सिर चकरा गया। वह चकित होकर बोला,”  कमाल है, क्या यह चमत्कार है? कल बाजार मैं मुझे तुम पर विश्वास नहीं हुआ था। क्योंकि मैंने तो तुम्हें…. खैर छोड़ो अपनी आंखों से देख कर विश्वास करना ही पड़ेगा ।

 

“ इन बीजों को उगाना कोई कठिन काम नहीं। मेरे पास अगर एक एकड़ जमीन होती तो मैं खुद या फसल उसमें बो देता।“  नसरुद्दीन ने गंभीरता से कहा।

 

‘ अब यह काम मैं करूंगा।‘ मन ही मन शिराजी ने सोचा। घर लौट कर अपने नौकरों को बुलाकर उसने कहा,”  इस साल हमारे खेतों में मछलियों के सूखे अंडे बिखेर दो। अगर यहां ना मिले तो आसपास के शहरों से मंगवा लो,  मैं खुद नहीं मानता था पर अब तो अपनी आंखों से यह प्रयोग देख लिया है।“

 

 नौकरों ने उसके आदेशानुसार मछलियों के अंडों के लिए जमीन आसमान एक कर दिए। यह खबर सारे शहर में फैल गई कि शिराजी मछलियों के अंडे ढूंढ रहा है, उनकी खेती के लिए। जहां कहीं भी बाहर शिराजी दिखाई देता, लोग मुंह छिपाकर हंसने लगते। हिंदी कहानी

 

 

 सीख 

किसी को भी नीचा ना दिखाएं, स्वयं पर घमंड न करें, पर्यावरण की स्वच्छता का ध्यान रखें, पेड़ पौधों का संरक्षण व संवर्धन करें।

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