Hindi Kahani शेखचिल्ली की कहानी चार अफीमची

             ।।चार अफीमची।।

Hindi Kahani यह शेखचिल्ली की मजेदार कहानियो की दूसरी श्रृंखला है।मेरी कौशिश है यह कहानी पढ़कर आपको बहुत ही आनंद आएगा ।

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    एक दिन वे चारो एक जगह इक्कट्ठे हुये।सबने विचार किया कि हम लोगों को नौकरी ढूढने के लिए चलना चाहिए। वरना पैसे के अभाव मे हम लोग न तो चादं पर जा  सकेगें और न चुनिया बेगम प्राप्त होगी तालियों के बीच यह प्रस्ताव पास हो गया।

 

अगले दिन चारों एक रईस के घर पहुंचे और उससे प्रार्थना की हम चारों को नौकरी पर रख ले। रईस को उन दिनों नौकरों की जरूरत थी उसने उन चारों को नौकर रख लिया । शेख चिल्ली नंबर 2 को रईस की बूढ़ी मां की सेवा करने का काम मिला। शेखचिल्ली नंबर 1 को रसोईया बना दिया । तथा शेख  चिल्ली नंबर 3 को बकरिया भिंड चराने का काम मिला और शेख को जंगल से लकड़ी लाने का काम मिला उसे एक भैंसा गाड़ी और एक कुल्हाड़ी दे दी गई चारों अपने अपने काम पर लग गये।

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एक दिन चारों मित्र एक जगह इकट्ठे हुए शेख ने कहा यार हमारी मुश्किल तो नौकरी करने पर भी आसान नहीं हुई ।सोचा था कि नौकरी करने पर पैसे मिलेंगे तो चुनिया बेगम से मुलाकात और चांद का भ्रमण करेंगे । लेकिन यह भूल गया कि पैसे तो महीने के अंत में मिलेंगे आखिर इतने दिन हम अपनी  बेकरारी को कैसे रोकेंगे।

 

यह सुनकर शेख एक नंबर 1 बोला हमें पैसों के लिए और कोई तरकीब सोचनी होगी। चारों कुछ देर के लिए विचारों में खो गये। बहुत देर माथापच्ची करने के बाद से एक बोला मेरे विचार से मैं रोज जंगल में लकड़ियां काटने जाता हूं क्यों नहीं उनमें से कुछ लकड़ियां चुपके से बेच लिया करो।

 

बिल्कुल ठीक।” सब ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया कुछ दिनों तक यही सिलसिला चलता रहा लकड़ियों से जो पैसे प्राप्त होते चारों अफीम लेकर खाते और चांद का भ्रमण करते अब उन लोगों की अफीम की खुराक बढ़ गई थी। लकड़ियों से उनके खुराक के हिसाब से पैसे प्राप्त नहीं होते थे।

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तब बकरी के चरवाहे शेख हर दूसरे तीसरे दिन बकरी बेचकर इस समस्या का समाधान करना प्रारंभ कर दिया। कुछ दिनों बाद सारी बकरियां खत्म हो गई।

 

   एक दिन रईस ने अपनी बकरियों को थान में ना देखा पूछा?  बकरिया कहां है । शेख  नंबर 3 बड़े आराम से उत्तर दिया ।आजकल गर्मी अधिक पड़ने के कारण मैंने उन्हें हिमालय पर चरने के लिए भेज दिया है।

 

रईस ने गुस्सा होकर कहां पर नालायक उनकी देखरेख कौन करेगा । शेखचिल्ली बोला वही जिसने उन्हें पैदा किया है। रईस ने यह सुनकर अपना माथा पीट लिया और फिर शेख   नंबर 3 को मार मार कर घर से निकाल दिया । एक दिन रईस के यहां कुछ मेहमान आए रात के 2:00 बज गए थे अब तक खाना तैयार नहीं हुआ था ।

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जिसमें से एक नंबर एक से पूछा तो उसने कहा अभी देर लगेगी। इस पर रईस ने गुस्से में आकर  शेख एक नंबर एक को  भी निकाल दिया। अब हमारे हीरो शेखचिल्ली पर काफी बोझ पड़ा उसके दो साथी  बेघर हो गए थे। पर उनको कोई चिंता ना थी क्योंकि वह वहां रोज अपनी भैंस गाड़ी पर जंगल जाते और वहां लकड़ियां काटते उन्हें बाजार में बेचकर खाली गाड़ी लेकर वापस आते।

 

एक दिन रईस ने देखा की लकड़ियां का गोदाम खाली पड़ा है । उसने शेखचिल्ली से पूछा क्यों बे शेखचिल्ली के बच्चे यह गोदाम खाली क्यों पड़ा है ? शेखचिल्ली ने उत्तर दिया जी बात यह है कि जंगल में सूखी लकड़ियों की कमी हो गई है ।

रईस ने कहा बदमाश नमक हराम जंगल में बहुत लकड़ियां हैं पर तू निकम्मा है यदि आज लकड़ियां ना लाया तो मैं तुझे नौकरी से निकाल दूंगा।

 

अब शेख  बहुत घबराए पर धीरज रख कर जंगल की ओर चल पड़े इस बीच में भूल गए कि आज मालिक ने क्या कहा था। और रोज की तरह सब लकड़ियां बेच डाली  फिर ठेके से अफीम खरीद कर घर लौट गए। उन्हें अचानक उन्हें मालिक की बात याद आई और उन्होंने कुल्हाड़ी उठाकर गाड़ी के टुकड़े-टुकड़े कर दिए रईस ने देखा तो अपना माथा पीट लिया।

थोड़ी देर बाद बोला – यह क्या ?यह तो गाड़ी का मालवा  है शेख बोला आपने ही तो कहा था ।

 

यदि शाम को लकड़ी लेकर ना आया तो नौकरी से निकाल दूंगा ।इसलिए यह लकड़िया ले आया हूं कि कम से कम जलावन    समस्या तो हल हो जाए।

 

उसी  क्षण राइस ने उन्हें बिगड़ कर घर से   निकाल दिया तब जनाब शेख जी भी सीधे मठ पहुंच गए। शेखचिल्ली नंबर दो बच गए जो रईस की माता की देखभाल करते थे।

 

एक दिन अफीम के नशे में उन्हें लगा कि कमरे के ऊपर छत ही नहीं है। वह सोचने लगे कि कमरे में छत लग जाए तो कैसा रहे । अचानक वह चौक पड़े ।

 

बुढ़िया ने कहा- जरा मेरे मुंह से मक्खी तो उड़ा दो शेख नंबर दो ने मक्खियां उड़ा दी पर वह मक्खी बड़ी जिद्दी थी वह फिर उड़ कर वहीं बैठ गई।

 

शेख ने फिर उड़ाने की चेष्टा की पर वह उड़ कर फिर मुंह पर बैठ गई । तब शेख  जी को क्रोध आ गया उन्होंने एक भारी सिल उठाकर उस मक्खी पर दे मारी।

 

मक्खी तो उड  हो गई पर बुढ़िया का दम  निकल गया  शेख ने इत्मीनान की  सांस ली चलो मक्खी मर गई और बुढ़िया आराम से सो गई। उसे यह पता ही ना चला की बुढ़िया सदा के लिए सो गई है। शेख नंबर 2 को  रईस के आने के बाद पता चला कि बूढी  मर गई है।

 

बस शेख नंबर दो  ने  सर पे पांव रखकर भागना शुरू कर दिया। और मठ  पर पहुंचकर सारा हाल अपने साथियों को सुनाया ।उसकी बात सुनकर सभी वहां से भाग  निकले। वहां से भागकर वे चारो  एक सराय में पहुंचे और जाकर ठहर गए।

 

 

बकरियों की बिक्री की रकम अभी उनके पास थी ।चारों खुश थे। की जान बची तो लाखों पाए उस दिन रात को सराय की छत पर चारों यार  चांदनी में अफीम का आनंद ले रहे थे। वे नशे में धुत थे। उसी समय बड़े शेख बोले। यारों ।नीचे सड़क की ओर देखो कैसी नदी बह रही है।अहा  इस समय आज स्नान करने का मजा आ जाएगा।

 

हमारे शेख जी ने कहा वह कैसी शानदार नदी है, चलो नहाए और तैरने का आनंद लें। यह सुनते ही  एक-एक करके सब ने नीचे छलांग लगा दी तीनों शेख चिल्ली छलांग लगाते ही सदा के लिए आकाश की रानी के पास पहुंच गए ।

 

और हमारे शेख जी सौभाग्य से भूसे पर गिरे गिरने की वजह से बच गए ।फिर भी चोट बहुत आई थीः अब उनकी बेगम को पता चला तो  अपने भाग्य को कोसा और अपने शौहर को उठाकर ले गए ।

 

शेख जी ने जीवन में  पहली बार अकल से काम लिया। बेगम से माफी मांगी और  यह  भी वादा किया कि इस बार परदेस जाकर बिना बड़ा आदमी बने लौट कर नहीं आएंगे।।।

 

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