hindi moral stories for kids |दुष्ट साधु

दुष्ट साधु

Hindi moral stories kids  एक दिन एक गरीब बुनकर अपनी झोपड़ी के बाहर बैठक कंबल बुन रहा था तभी उसने एक साधु को अपनी झोपड़ी के पास ही खड़े हुए देखा। उस साधु के कपड़े फटे हुए और गंदे थे तथा उसके बाल उलझे हुए थे। उस साधु को देखकर बुनकर ने पूछा “बाबा जी, मैं आपकी क्या सेवा कर सकता हूं? ”

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“कुछ भी नहीं,” साधु ने कहा,” मैं सिर्फ यह देखना चाहता था कि कंबल कैसे बनाया जाता है। तुम्हारी कारीगरी देखकर मैं बहुत प्रभावित हुआ हूं।”

” मैंने कंबल बुनने की कला अपने पिता से सीखी थी। वह अब इस दुनिया में नहीं है, लेकिन मैं उनकी कला आज भी जीवित रखे हूं। अगर तुम कंबल की बुनाई देखना चाहते हो तो यहीं बैठ कर आराम से देखो। मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं है।”

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Hindi moral stories kids यह कहकर बुनकर ने फिर कंबल बुनना शुरू कर दिया। साधु उसके पास ही बैठ गया। जब बुनकर कंबल बुनने में मस्त था, तभी साधु ने उसकी नजरें बचाकर अपने बालों के कुछ गुच्छे तोड़े और उन्हें उस ऊन में मिला दिया, जिसे बुनकर कंबल बुन रहा था।

कंबल बुनने के बाद बुनकर उसे बेचने बाजार चल दिया। वहां वह एक छायादार पेड़ के नीचे बैठकर ग्राहक का इंतजार करने लगा। तभी उसे लगा कि कोई उसके पीछे खड़ा हुआ है। उसने मुड़कर देखा तो अपने पीछे उसी साधु को खड़ा हुआ पाया।

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” कुछ नहीं, मैं तो बस यह देखना चाहता था कि कंबल कैसे बेचा जाता है ।”साधु आप ही आप हंसकर बोला। कुछ समय बाद एक बूढ़ा आदमी कंबल खरीदने वहां आ पहुंचा ।

काफी देर तक बुनकर और उस आदमी की कंबल की कीमत को लेकर बहस होती रही। अंत में वह बुढ़ा कंबल खरीदने को तैयार हो गया ।फिर बुनकर ने पैसे लेकर वह कंबल उसे दे दिया।

” अब मुझे भी मेरा हिस्सा दे दो।” वह साधु बड़ी कुटिलता से बुनकर से बोला। उसकी आंखों से ही धूर्तता टपक रही थी।

” हिस्सा ?कैसा हिस्सा ?”बुनकर साधु की बात सुनकर हैरान रह गया।” तुम तो ऐसे नाटक कर रहे हो जैसे तुम्हें कुछ पता ही नहीं है मुझे नहीं पता था कि तुम इतनी बेईमान हो। क्या तुमने कंबल बनाने में मेरे बाल इस्तेमाल नहीं किए।” साधु चिल्लाया।

” बकवास ना करो ।”बुनकर उससे भी तेज आवाज में चिल्लाया ।उसे भी अब गुस्सा आ गया था ।

“अच्छा, यह बात है ।अभी दिखाता हूं।” कहते हुए साधु ने कंबल खरीदने वाले बुढ़े के हाथ से कंबल छीन लिया और चीख-चीख कर लोगों को कंबल में बुने गए अपने बाल दिखाता हुआ कहने लगा,” यह देखो ,यह रहे मेरे बाल । देखो ,यह भी देखो।”

धूर्त साधु कि वह हरकत देखकर ब्रोकर को बहुत गुस्सा आ रहा था। लेकिन किसी तरह उसने खुद पर नियंत्रण किया।वह वहां बाजार में सबके सामने मारपीट करके ग्राहकों के सामने अपनी छवि खराब नहीं करना चाहता था। इसलिए उसने चुपचाप उस दुष्ट साधु की मुट्ठी में कुछ पैसे ठूंस दिए साधु पैसे लेकर हंसता हुआ वहां से चला गया।

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