hindi stories with moral अनचाहे मेहमान हिंदी कहानी

 

hindi stories with moral हिंदी कहानी  अनचाहे मेहमान बहुत समय पहले रंजन नाम का एक गरीब आदमी रहता था। वह गरीब तो था, लेकिन साथ ही बहुत दयालु और उदार भी था। उसके पास जो भी थोड़ा बहुत सामान था, उसे वह हमेशा दूसरों के साथ बांटने के लिए तैयार रहता था।

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वह अक्सर ऐसे लोगों को भी अपने घर भोजन अथवा चाय पर बुला लेता था, जिनको वह जानता तक नहीं था। उसकी इस आदत से उसकी पत्नी बहुत परेशान हो गई थी । उसने कई बार अपने पति से कहा कि वह अजनबी लोगों को अपने घर ना बुलाया करें , लेकिन उसका पति उसकी बात को अनसुना कर देता था ।

 

कई बार मेहमान ऐसे समय भी उनके घर पर आ जाते थे, जब रंजन घर पर नहीं होता था। उस समय रंजन की पत्नी बहुत ज्यादा डर जाती थी ।

 

Hindi stories with moral एक बार रंजन की पत्नी ने कमरे की खिड़की से तीन मोटे आदमियों को अपने घर की ओर आते हुए देखा। उन्हें देखकर वह घबरा गई। वह तुरंत समझ गई कि उन्हें उसके पति ने भोजन के लिए घर पर बुलाया होगा। घबराकर जैसे वह खिड़की से परे हटी, उसकी नजर घर पर रखी ओखली और मूसल पर जा पड़ी ,जिनका इस्तेमाल व चावल को कूटने के लिए करती थी ।

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अचानक उसके दिमाग में एक योजना आई । कुछ ही क्षणों बाद वे तीनों आदमी उसके घर पर आ पहुंचे। रंजन की पत्नी ने उनका इस तरह स्वागत किया कि वे लोग भी खुश हो गए । तभी उनकी नजर कमरे में ही रखी होगी और मुसल पर पड़ी, जिनके पास ही पूजा का सामान भी रखा था। यह देखकर वे तीनों चौक पड़े ।

“यह क्या है? एक आदमी ने पूछा,” यहां ओखली और मुसल की पूजा कौन करता है?”

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“आपको नहीं पता क्या ?” रंजन की पत्नी ने चौंकने का अभिनय करते हुए कहा, मेरे पति इन्हीं की तो पूजा करते हैं। लेकिन मैं इन्हें पसंद नहीं करती क्योंकि यह रक्त मांगते हैं ।जब मेरे पति घर आएंगे तो वह तुम लोगों के सिर ऊपर मुसल मारकर तुम्हारा खून ओखली में भरेंगे।

 

मैंने तो कई बार उनसे इनकी पूजा छोड़ने को कहा है, क्योंकि बाद में खून की सफाई तो मुझे ही करनी पड़ती है न । लेकिन वे मानते ही नहीं।”

यह सुनकर तीनों आदमी सिर पर पैर रखकर वहां से भाग खड़े हुए । तभी रंजन घर लौट आया वह तीनों आदमियों को भागते देख कर उसने अपनी पत्नी से इसका कारण पूछा ।तब उसकी पत्नी बोली,” वह मुसल मांग रहे थे, लेकिन मैंने वह देने से इनकार कर दिया। इसीलिए वे नाराज हो कर चले गए। hindi stories with moral

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” अरे यह क्या किया तुमने?” पति चिल्लाया अगर वह मुसल मांग रहे थे तो तुम्हें तुरंत देना चाहिए था।” यह कहते हुए वह मूसल उठा कर उनके पीछे दौड़ा।

 

रुको, रुको ,जरा यह मूसल तो लेते जाओ।” वह उनके पीछे भागते हुए चिल्लाया। रंजन को अपने पीछे मुसल लिए आते देखकर वह और भयभीत हो गए और पूरी ताकत से भागने लगे। रंजन ने कुछ दूरी तक उनका पीछा किया, लेकिन वह उन्हें पकड़ नहीं सका।

 

थोड़ी देर में वह अफसोस करता हुआ घर लौट आया । उस दिन के बाद से कोई भी गांव वाला रंजन के घर कभी दावत खाने नहीं आया। रंजन ने कई बार लोगों से अपने घर भोजन के लिए आने को कहा। लेकिन लोग चुपचाप कन्नी काट कर निकल जाते थे। रंजन की पत्नी ने कभी उसे इस बात का राज नहीं बताया ।

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