Hindi Stories with moral gopoo kee chaturaee

Hindi Stories with moral gopoo kee chaturaee  बहुत समय पहले भीमराज नाम का एक राजा था। उसे अपनी महानता की शेखी बघारने का बहुत शौक था। इतना ही नहीं,जो भी दरबारी उसकी चिकनी चुपड़ी भाषा में प्रशंसा करता, वह उसे खूब इनाम देता था। दरबार में बहुत से लोग राजा के इस स्वभाव को पसंद नहीं करते थे, लेकिन उनकी राजा के सामने कुछ भी कहने की हिम्मत नहीं थी। उस राजा की एक और आदत थी।

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जब भी कोई उस राजा को कोई कहानी या घटना सुनाता तो वह तुरंत कहता था-” फिर?” उसकी ‘फिर’ कहने की आदत से दरबारी तो दरबारी ,उसकी रानी तक परेशान हो गई थी।

 

एक दिन राजा ने अपने दरबार में एक प्रतियोगिता आयोजित करने की सूची। वह अपने दरबारियों और मंत्रियों से बोला,” मैं आप सब को एक चुनौती देता हूं। जो भी मुझे ऐसी कहानी सुनाएगा, जिसे सुनकर मैं ‘फिर’ ना कह सकूं उसे मैं अपना राज्य सौंप दूंगा। मैं स्वयं उसके सिर पर अपनी पगड़ी रख दूंगा।”

 

निश्चित दिन सभी मंत्री,सामंत और बहुत से ग्रामवासी अपनी किस्मत आजमाने के लिए दरबार में इकट्ठे हो गए । फिर राजा ने प्रतियोगिता शुरू करने की घोषणा कर दी।

Hindi stories बहुत से मंत्री और सामंत राजा को कहानी सुनाने के लिए आगे आए और उन्होंने राजा को बहुत सी कहानियां सुनाई, लेकिन राजा हर कहानी को सुनकर ‘फिर ‘कह देता था। अंत में कहानी सुनाने वाला ही तंग होकर लौट जाता था।

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अंत में गोपू नाम का एक ग्रामीण लड़का राजा को कहानी सुनाने के लिए आगे आया तो उसे देखकर सभी मंत्री और सामंत हंसते हुए बोले,” इस बेवकूफ लड़के को देखो। अच्छे-अच्छे तो हमारे राजा से निपट नहीं सके ।यह गवार भला क्या कर लेगा?”

लेकिन गोपू उनकी बातों की कोई परवाह न करते हुए राजा के सामने पहुंचकर अपनी कहानी सुनाने लगा,” महाराज ,बहुत समय पहले अलीपूरम की झील के पास एक बहुत बड़ा सागौन का पेड़ था।” यह सुनकर राजा ने कहा,” फिर?”

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गोपू आगे बोला ,”उसकी घनी शाखाएं मजबूत बांहों की तरफ फैली थी।” राजा ने तुरंत कहा,” फिर?” गोपू बोला,” वह पेड़ चिड़ियों का घर था।” राजा बोला,” फिर?”

गोपू ने कहा,” आसपास के गांव के लोग रोजाना पेड़ के चारों ओर अनाज बिखेर देते थे।” तब राजा ने तुरंत कहा ,”फिर?”

 

तब गोपू मुस्कुराते हुए बोला,” चिड़िया पेड़ से नीचे आकर दाने चुगतीं और पेड़ पर जाकर बैठ जाती।” “फिर?” राजा गर्व से बोला।

Hindi stories गोपू ने फिर वही बात दोहरा दी। राजा अपनी आदत के अनुसार ‘फिर’ बोला ।गोपू ने पुनः वही उत्तर दिया। यही क्रम घंटों चलता रहा। अंत में राजा वही सवाल दोहराते दोहराते थक गया।

 

वह समझ गया था कि गोपू बहुत ही चतुर लड़का है। उसने सिंहासन से उतरकर गोपू को शाबाशी दी और फिर उसे अपने सिंहासन पर बैठा दिया। उसने अपनी पगड़ी भी गोपू के सिर पर रख दी और स्वयं संन्यास लेकर वन की ओर चला गया। इस तरह गांव में रहने वाला गोपू अपनी चतुराई से राजा बन गया और उस राज्य पर शासन करने लगा।

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