Long story for kids in hindi बच्चों की कहानियां

 Long story for kids in hindi   स्वावलंबी बनो     अपना  काम करने में किसी तरह की शर्म नहीं होनी चाहिए कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता इस कहानी के माध्यम से आपको यह बताया जाएगा hindi kahani for kids

 

“नहीं अम्मी, मैं नहीं जाऊंगा!” आसिफ ने अम्मी से कहा।

“ चला जा बेटा, तू नहीं जाएगा तो फिर कौन जाएगा?” अम्मी बोली।

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 अम्मी आशिफ से बार-बार कह रही थी कि वह गेहूं पिसवा कर ले आए लेकिन आसिफ था कि जाने को तैयार ही नहीं हो रहा था।

 

 आसिफ के अब्बू एक अधिकारी हैं। उनके घर पर काम करने के लिए एक सेवक नियुक्त है। पिछले चार-पांच दिनों से वह छुट्टी पर था और अगले चार-पांच दिनों तक उसकी आने की कोई संभावना भी नहीं थी। घर में आटा खत्म हो चुका था । इसलिए यह काम आसिफ के सिर पर आ पड़ा था। आसिफ इस काम को करने में शर्म महसूस कर रहा था। उसने सोचा कि जब वह गेहूं का डिब्बा साइकिल पर रखकर जाएगा तो लोग उसे देखकर हँसेंगे। उसने कहा,” अम्मी मैं गेहूं पिसवाने नहीं जाऊंगा, यह मेरा काम नहीं है ।“

 

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Hindi kahani for kids अम्मी ने उसे समझाते हुए बोली,” बेटा! काम मेरा या तेरा नहीं होता ।यह नियम हमारे ही बनाए हुए हैं कि या काम इसका है और वह काम उसका है। यह बहाने करना छोड़ो और चक्की पर जाओ।

 

 आसिफ अम्मी की बात काटते हुए बोला अम्मी मैंने इससे पहले यह काम कभी नहीं किया है। फिर यह  मुझसे कैसे होगा? इतना भारी डिब्बा में कैसे उठा पाऊंगा?”

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 आसिफ की इस बात का जैसे मम्मी पर कोई असर ही नहीं हुआ। उनके पास आसिफ की इस दलील का भी जवाब था। वह बोली,” बेटा !यहां साइकिल पर डिब्बा रखने में मदद कर दूंगी और चक्की के पास इसे उतारने में चक्की वाला तेरी मदद कर देगा। वापसी में भी मैं दरवाजे पर खड़ी होकर तेरी राह देखूंगी।

और हम दोनों मिलकर एक डिब्बा उतार लेंगे ।रही बात रास्ते की तो तुझे कौन सा बोझा ढोना है। डिब्बा तो साइकिल पर होगा तुझे तो बस अपने हाथ से सहारा भर ही देना है ।

 

Hindi kahani for kids आसिफ ने अम्मी की बात सुनकर भी अपने पक्ष को मजबूती से रखते हुए अपनी बात दोहराई।“ लेकिन अम्मी मैंने काम पहले कभी नहीं किया ।“

 

अम्मी को इस बार आसिफ की बात पर हंसी आ गई। वह बोली,”  अरे पगले कोई भी काम व्यक्ति कभी न कभी तो पहली बार करता ही है। तू ही सोच, जब पहली बार तू स्कूल गया था, तो तू कितना रोया था । यदि तू उस दिन स्कूल न जाता तो क्या आज यहां पर पहुंच पाता?  चल चल समय बर्बाद मत करो डिब्बा उठा!”

 

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मम्मी के आदेश की वजह से आसिफ ना चाहते हुए भी जाने को राजी हो गया। उसने अपनी नई साइकिल निकाली। अम्मी की मदद से गेहूं से भरा डिब्बा साइकिल के पीछे रखा और गेहूं पिसाने चल पड़ा। आटा चक्की उसके घर से ज्यादा दूर नहीं थी। इसलिए उसने पैदल चलना ही ठीक समझा। उसने बाएं हाथ से साइकिल का हैंडल और दाहिने हाथ से डिब्बे को पकड़ रखा था। अपनी शरण मिटाने के लिए उसने गर्दन नीची कर ली थी । हर आने-जाने वाले की निगाहों से बचने का वह असफल प्रयास कर रहा था। चक्की के पास पहुंच कर उसने राहत की सांस ली। डिब्बा उतारकर के हूं तूलवाया।

 

चक्की वाले ने आसिफ से कहा,”  भैया! एक दो आदमी और आ जाए तो चक्की चालू करूंगा। आपको कोई और काम हो तो, वह कराएं।

 

“अच्छी बात है, मैं आधे घंटे में आता हूं ।“ इतना कह कर आसिफ ने अपनी साइकिल उठाई। वह सोचने लगा- मैंने चक्की वाले से आधे घंटे में आने के लिए कह तो दिया लेकिन आधे घंटे के समय का क्या उपयोग करूं? अभी घर लौटने से कोई फायदा नहीं है, फिर कहां जाऊं ? चलो अपने सहपाठी दिनेश से ही मिला आऊं।

 

 

Hindi kahani for kids दिनेश अपनी दुकान में झाड़ू लगा रहा था। आसिफ कब उसकी दुकान पर आकर खड़ा हो गया उसे इसका एहसास ही ना हुआ। अचानक उसकी नजर ऊपर उठी ,तो उसने आसिफ को सामने खड़ा पाया । आशीष को देख कर उसे आश्चर्य हुआ ।

 

“ अरे आसिफ! आ अंदर आ ! एक मिनट,यह  कूड़ा फेंक दूं।“  झाड़ू कोने में रखते हुए दिनेश बोला।

 

 आशीष ने आश्चर्य से पूछा,”  दिनेश ! तू झाड़ू लगा रहा है?”

 झाड़ू रखते हुए दिनेश ने जवाब दिया,” हां  आसिफ, आज सेवक नहीं आया है इसलिए मैं ही यह काम कर रहा हूं। और फिर सेवक रहे ना रहे इससे क्या फर्क पड़ता है ।उसके रहने पर भी मैं कई बार झाड़ू लगा चुका हूं।

 

  आसिफ का मुंह आश्चर्य से खुला कि खुला ही रह गया। उसने फिर पूछा,”  तुझे यह सब करने में शर्म नहीं आती ?”

 

 Hindi kahani for kids Grदिनेश बोला,”  अपना काम करने में शर्म कैसी ? फिर हमारे स्कूल में भी तो हमें सिखाया जाता है कि स्वावलंबी बनो, यानी अपना काम स्वयं करो ! ओह! तू भी कौन सी बात लेकर बैठ गया अंदर आ ! मैं तुझे क्रीम वाले बिस्कुट खिलाता हूं।“

 

“ हां, आता हूं।“ बिस्कुट खाते आसिफ लगातार सोच रहा था कि कक्षा में सबका प्रिय दिनेश अपनी दुकान में झाड़ू लगा रहा है। इसे यह काम करने में जरा भी शर्म नहीं आ रही है ।कितना भला है यह!

 

 

 वह आधा घंटा दिनेश की दुकान पर बैठा ।इधर-उधर की कुछ और बातें हुई ।इसके बाद वह वहां से उठकर चक्की पर जा पहुंचा ।चक्की वाले ने गेहूं पीस कर तोलकर पहले ही रख दिए थे। पैसे देकर आसिफ ने आटे का डिब्बा पीछे रखा और घर की ओर रवाना हुआ। अब वह गर्दन नीचे नहीं बल्कि गर्व से ऊंची किए चल रहा था ।आज उसे स्वावलंबी होने का सही अर्थ पता चल चुका था।

सीख

माता पिता का कहना मानना चाहिए ।अपना काम स्वयं करना चाहिए ।अपनी जिम्मेदारी को समझना चाहिए ।किसी भी काम को छोटा या बड़ा नहीं समझना चाहिए।

 

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