Long story in hindi| love story in hindi| प्यार भरी हिंदी कहानी

     Love story सोचा ना था। 

Long Love story in hindi मेरी बड़ी बहन किरण की शादी के 4 साल बाद जमा गांधारी को पता चला कि उनकी इकलौती बेटी आशीष का एक ईसाई लड़की मारिया के साथ कई महीनों से चक्कर चल रहा था और दोनों ने चर्च में शादी कर ली है।।

तो उनके दिल पर जबरदस्त आघात लगा ।
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  Love story in hindi    इलाहाबाद के संगम घाट के त्रिभुवन पंडा महाराज के यहां आज से 45 साल पहले जन्म लेकर पंडित यह संस्कारों के साथ उम्र के हर पड़ाव को पार करते हुए जब भी साल की गांधारी की शादी एक उच्च कुलीन ब्राह्मण घराने में हुई थी ।
     तब तक उसका मस्तिष्क लकीर का फकीर हो चुका था वाराणसी से ससुराल होने के कारण भी वह अपने समय को हमेशा सराहा करती
शादी के बाद अगले 7 सालों में ही किरण आशीष और मैं सिमरन गांधारी की कोख से जन्म लेकर इस पंडित परिवार का हिस्सा बन चुके थे।
    हम तीनों बच्चों को भी मां गांधारी अपने पुरातन विचारों के रंग में रंग देना चाहती थी तुरंत गांधारी के पति अर्थात मेरे पापा निशांत उपाध्याय बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में एक भारतीय कला और संस्कृति विभाग के प्रोफेसर होने के नाते बदलते युग की आहट को पहचानते थे।
   इसलिए  बड़े होने के साथ-साथ स्कूल और कॉलेज जाकर नई विचारधाराओं की आवश्यकता समझने वाले हम तीनों बच्चे जब मां का विरोध करते तो पापा हमेशा हमारे पक्ष में ही खड़े हो जाते थे ।
  मां जब कहती तुम हमेशा गलत बात पर बच्चों को समझाने के बजाय मुझे ही समझाने लग जाते हो तो पापा उन्हें समझाने लगते गांधारी हमारा तुम्हारा योग और था तब मनोरंजन के इतने साधन नहीं थे हम घर के बड़े बूढ़ों को बिना बताए घर से बाहर नहीं जा सकते थे ।
      साथ समय से घर लौटने को बाध्य थे बहुत सी बातें ऐसी थी जिन पर हम चाह कर भी विरोध नहीं कर पाते थे इसलिए आज समय की मांग है कि बच्चों को अपने हिसाब से चलने के बजाय उन्हें अपने हिसाब से जीवन जीने दो। love story in hindi
         पापा की बातें सुनकर मां गुनगुना कर रह जाती क्योंकि उनके दिमाग में तो सारी पुरानी रूढ़िवादिता से भरी बातें ही थी जिन्हें उन पर मन मस्तिष्क बाहर निकलने को तैयार ही नहीं होता था ।
       वे यही जानती थी कि अधिकतर अछूत और निम्न जाति के लोगों का मंत्रणा कर उन्हें जबरन इसाई बना दिया जाता है खानदान में भी मांस मछली के साथ-साथ स्त्री और पुरुष मदिरा का सेवन भी जमकर करते हैं और सबसे बढ़कर यह धारणा तो इतनी गहरी गहराई से जड़े जमा चुकी थी कि इस धर्म के लड़के और लड़कियों का स्वच्छ चरित्र नहीं होता है कई कई लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फंसा कर वासना की पूर्ति करते रहना इनका शौक होता है।
      Love story in hindi  इसलिए वह आशीष के लिए अपनी पंडिताइन सहेली सुजाता की बेटी उर्मिला को बहू बनाकर इस घर में लाने का सपना सजाए बैठी थी
       सुजाता आंटी से उन्होंने पक्का वादा करते हुए कह दिया था अब उर्मिला शादी के लायक हो रही है।
     तो मैं उसे अपने घर की बहू बनाकर अवश्य लाऊंगी मेरे आशीष के लिए इससे अच्छा कोई मैच हो ही नहीं सकता ।
       किरण दीदी की शादी के अवसर पर हल्दी की रस्म के समय भी जब सुजाता आंटी ने एक बार फिर मां का ध्यान इस बात की ओर यह कहकर दिलाया।
     वह देखो तुम्हारी छोटी बेटी सिमरन के साथ सजी-धजी थीउर्मिला कितनी प्यारी लग रही है
       बस उसकी शादी हो जाए तो मेरी चिंता दूर हो जाती ।पता नहीं तू इतनी फिक्र क्यों करती है मेरा आशीष कहीं भागा थोड़ा ही जा रहा है बस वह फार्मेसी का कोर्स करके फार्मेसिस्ट बनकर अपने पैरों पर खड़ा हो जाए तो फिर मैं तेरी प्यारी गोरी गुड गारी और गोलचा लड़की को अपनी बहू बना कर लाऊंगी ।
      तू चिंता मत कर मैं उन्हें हिम्मत देती लेकिन फार्मेसी कोर्स के फाइनल ईयर के दौरान एक दिन जब मदर टैरेसा चैरिटेबल अस्पताल की पार्किंग में आशीष अपनी बाइक को पार करके मुराही था कि उसकी नजर मारिया पर पड़ी ।
     मारिया नर्स वाली ड्रेस में बहुत ही सुंदर व आकर्षक लग रही थी अपनी एक्टिवा को तत्परता से स्टैंड में खड़ी करके वह आशीष पर एक नजर डालती हुई अस्पताल के एक टैक्स गेट की ओर बढ़ी ही थी कि आशीष ने उसे पीछे से आवाज लगाई अरे मैडम आप अपना पर्स एक्टिवा के हुक्के में लटका हुआ छोड़ जा रही हैं ।
        ओक थैंक यू कहते हुए मारिया ने वापस लौट कर अपना पर्स ले लिया और बोली मुझे पहले ही देर हो गई थी आज एक क्रिटिकल ओपन हार्ट सर्जरी के डॉक्टर पानी कल की नर्स टीम का हिस्सा हूं मैं दस मिनट लेट हो गई हूं यह बनारस का ट्रैफिक भी ना वैसे मैं इस अस्पताल की सिस्टर मारिया  मैं आशीष !
        आशीष मारिया ने इस नाम को दोहराया लेकिन उसके पास समय नहीं था जो वह और रुकती।
     सॉरी कहती हुई मारिया अपना पर्स उठाएं पलक झपकते ही अस्पताल के अंदर दौड़ती चली गई ।
      आशीष को लगा कि वह तो इतनी तेज दौड़ नहीं लगा पाएगा लेकिन उसका दिल जरूर मारिया के संग दौड़ पड़ा था ।
अचानक उसे बचपन के प्ले स्कूल में साथ पढ़ने वाली बार्बी डॉल जैसी दिखने वाली मारिया नाम की सुंदर सी नीली आंखों वाली ईसाई लड़की का ख्याल आ गया। love story
        उसकी भी तो आंखें नीली ही थी कही यह वही मारिया तो नहीं जो प्ले स्कूल में के बाद किसी और स्कूल में पढ़ने चली गई थी।
मदर टेरेसा अस्पताल की फार्मेसी में अपने प्रोजेक्ट रिपोर्ट के लिए आवश्यक मेडिसिन रिलेटेड नोट्स ले कर आशीष वापस जाना चाहता था पर उसके कदम ना जाने क्यों अस्पताल के क्रिटिकल केयर यूनिट के ऑपरेशन थिएटर की ओर मुड़ गया ओटी के बाहर तेज लाल बल्ब जल रहा था इसका मतलब था कि अंदर सघन ऑपरेशन चल रहा था।
         आशीष सोचने लगा कि इस समय मारिया को मास के से ढके हुए कैसी लग रही होगी एक तरफ ऑपरेशन टेबल पर जिंदगी और मौत से जूझता भी होश मरीज और दूसरी तरफ उसकी जान बचाने वाले डॉक्टर हेल्पर और नर्सेज जिनके में एक मारिया भी थी ।
Love story in hindi  उस दिन ऑडी के बाहर बस मारिया की एक झलक पाने के लिए वह घंटों बैठा रहा और मारिया से मिलकर ही रहा मारिया ने जब उससे पूछा तुम्हारा उस मरीज से क्या संबंध है ।तो वह बोला मेरा मरी से कोई संबंध नहीं है पर हां उस मरीज की जान बचाने वाली टीम के एक सदस्य से आवश्यक आज मेरी जान पहचान हुई है और मैं उसी से संबंध बनाना चाहता हूं।
कौन है वह
       वही जो मेरे सामने खड़ी है,
     .ओह लेकिन उसे संबंध बनाने में रुचि ही ना हो तो
तब तो मैं और भी रूचि लूंगा यह जानने के लिए कि उसे रुचि क्यों नहीं है,।
      मारिया ने गौर से आशीष को देखा फिर बोली अभी तो तुम अपना मोबाइल नंबर दे जाओ और फिर जब मैं फोन करूं तो उस सपोर्ट पर मुझसे मिलने आ जाना ।
      दो दिन यूं ही बीत गए चौथे दिन लैंडलाइन नंबर से फोन आया
मैं मारिया बोल रही हूं आज दोपहर 1:00 बजे लंच टाइम में द टेस्ट ऑफ बनारस रेस्टोरेंट में मिलो ।
     जैसे जल अपने लिए जाने का मार्ग खोल लेता है ऐसे ही मजनू रूपी प्यार भी अपनी लैला खोज ही लेता है ।
        आशीष को भी अपने बचपन की लैला मिल गई और दोनों का प्यार मां बाप का डर और मजाक की सभी दीवारें लगता हुआ कोर्ट मैरिज कर के विवाह के बंधन में बंध गया ।

सबसे पहले यह खबर आशीष ने मेरे मोबाइल पर फोन करके मुझे बताइए ।

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