moral stories in hindi | बाघ की बीबी

moral stories in hindi बहुत समय पहले एक गांव में एक बूढ़ा ब्राह्मण अपने तीन बेटों और एक बेटी के साथ सुख पूर्वक रहता था। उसकी बेटी सबसे छोटी और लाडली थी।इसलिए उसका पालन पोषण ब्राह्मण ने बहुत प्यार से किया था।

 

परंतु इसका नतीजा यह हुआ कि लड़की बिगड़ कर बहुत जिद्दी हो गई। साथ ही उसमें एक कमी थी। जब भी हो किसी अच्छे लड़के को देखती तो अपने माता-पिता के पीछे पड़ जाती थी उसी के साथ उसकी शादी कर दें।

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तब उसके माता-पिता के लिए उसे समझाना बहुत मुश्किल हो जाता था। इसी तरह कुछ साल गुजर गए । लड़की व्यस्क हो गई, लेकिन शादी के लिए जिद करने की उसकी आदत पहले जैसी बनी रही ।

 

लड़की के माता-पिता यह भी जानते थे कि रिवाज के अनुसार अगर उन्होंने शीघ्र ही अपनी बेटी की शादी नहीं की तो बिरादरी हुक्का हुक्का पानी बंद कर देगी। इसलिए वे अपनी बेटी के लिए व्यग्रता से योग्य वर की खोज करने लगे ।

उस गांव के पास ही एक घना जंगल था , जिसमें एक खूंखार बाघ रहता था। उस बाघ ने किसी प्रकार काला जादू सीख लिया और वह कोई भी रूप धारण कर सकता था।

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उस बाघ को ब्राह्मणों के हाथ का भोजन खाने का बहुत शौक था, वह अक्सर ब्राह्मण का वेश रखकर मंदिरों में चला जाता था। और वहां पर ब्राह्मणों के साथ ही भोजन करता था । वह शादी भी किसी ब्राह्मण की बेटी से ही करना चाहता था, ताकि वह उसके हाथ से बना खाना खा सके ।

 

Moral stories in hindi एक दिन जब वह बाघ ब्राह्मण के रूप में बैठा भोजन कर रहा था । तभी उसने वहां बैठे लोगों से उस ब्राह्मण की लड़की के विषय में सुना, अच्छे लड़कों को देखकर उनसे शादी करने की बात करने लगती थी।

 

उनकी बातें सुनकर बाघ ने सोचा,’ मैं एक सुंदर ब्राह्मण युवक का वेश रखकर उस लड़की के सामने जाऊंगा । फिर तो वह लड़की मुझे देखते ही मुझसे शादी करने के लिए तैयार हो जाएगी।

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अगली सुबह बाघ एक विद्वान ब्राह्मण युवक का वेश रखकर उस लड़की के गांव की ओर चल पड़ा। गांव के पास ही स्थित नदी के तट पर बैठकर वह रामायण की चौपाइयों का पाठ करने लगा।

 

जब उस‌ गांव की स्त्रियां नदी से पानी भरने आई तो उसकी आवाज सुनकर आश्चर्य चकित रह गई। थोड़ी देर बाद वह लड़की भी अपनी मां के साथ वहां पानी भरने आ पहुंची, जिसे अपने चंगुल में फंसाने के लिए बाघ वहां आया था । तो वह भी युवक बने उस बाघ को देखकर ठगी सी रह गई। और उसके सुंदर रूप की ओर आकर्षित हो गई।

 

 

उसने फोरन अपनी मां से कहा कि वह उसकी शादी उस ब्राह्मण युवक से कर दे। उसकी मां को भी उस युवक का व्यक्तित्व बहुत अच्छा लगा था। उसने घर जाकर अपने पति से कहा कि उनकी बेटी के लिए एक योग्य वर मिल गया है जब लड़की के पिता ने नदी के तट पर जाकर उस युवक को देखा तो वह भी प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका। moral stories in hindi

 

फिर उसने उसी युवक को अपने घर भोजन के लिए आमंत्रित किया। बाघ को तो इसी अवसर की प्रतीक्षा थी। उसने तुरंत लड़की के पिता का मंत्रण स्वीकार कर लिया।

जब वह युवक उस लड़की के घर पहुंचा तो उसका खूब स्वागत सत्कार किया गया। बातों ही बातों में लड़की के पिता ने उस युवक से उसके वंश और गांव आदि के बारे में पूछा तो उसने चालाकी से जवाब दिया कि वह जंगल के पार गांव का रहने वाला है ।और ब्राह्मण वंश में उत्पन्न हुआ है।

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लड़की के रिश्तेदारों ने भी उस युवक से कई प्रश्न किए लेकिन युवक ने सारे प्रश्नों का बड़ा संतोषजनक उत्तर दे दिया। किसी को उस पर तनिक भी संदेह नहीं हुआ।

फिर युवक की उस लड़की के साथ शादी तय कर दी गई । निश्चित तिथि पर दोनों का धूमधाम से विवाह हो गया। विवाह के बाद भी लगभग एक महीने तक ब्राह्मण वेषधारी बाघ अपनी ससुराल में रहा।

फिर एक दिन वह अपने ससुर से बोला ,”ससुर जी अब मुझे यहां रहते हुए बहुत दिन हो गए हैं, मुझे अब वापिस जाना चाहिए। क्योंकि घर पर मेरे माता-पिता भी मेरा इंतजार कर रहे होंगे ।इसलिए आप मुझे अपनी पत्नी को साथ लेकर जाने की अनुमति दीजिए ताकि मेरे माता-पिता भी अपनी बहू को आशीर्वाद दे सकें ।”moral stories in hindi

बूढ़े ब्राह्मण को भरे ह्रदय से युवक को अपनी बेटी के साथ ले जाने की अनुमति देनी है पड़ी। अपनी बेटी के विदा होने की घड़ी आ जाने पर उसकी मां भी बहुत दुखी थी। पूरी रात वह अपनी बेटी और दामाद की यात्रा के लिए रोटियां और मिठाइयां बनाने में जुटी रही लड़की के रिश्तेदारों ने दामाद से निवेदन किया कि यात्रा के दौरान जब भी उनकी बेटी थक जाए। वह उसे आराम करने और भूख लगने पर भोजन करने की इजाजत दे दे। दमाद ने उनकी यह बात मान ली फिर युवक बना बाघ और उसकी पत्नी अपनी यात्रा पर चल पड़े।

कुछ दूर जाने के बाद लड़की ने एक तालाब देखा तो उसने अपने पति से उस तालाब में स्नान करते और कुछ देर वहां आराम करने की आज्ञा मांगी। लेकिन युवक ने उसे डांटते हुए जवाब दिया,” चुप रहो नहीं तो मैं तुम्हें अपना वास्तविक रूप दिखा दूंगा।”

 

उसकी बात सुनकर लड़की डर गई और चुपचाप उसके साथ चलने लगी। कुछ दूर जाने के बाद उसे एक और तालाब देखा तो उसने फिर अपने पति के सामने अपनी पहली बात दोहराई ,लेकिन उसके पति ने एक बार फिर उसे मना कर दिया ।अब तक लड़की को तेज भूख भी लग आई थी। इसलिए उससे रहा नहीं गया उसे वह झल्लाकर बोल पड़ी,” दिखाओ अपना वास्तविक रूप में भी देखूं कि तुम्हारा वास्तविक रूप क्या है?” Moral stories in hindi

उसके यह कहते ही उसका पति बाघ के रूप में बदल गया। अपने पति की जगह बाघ को खड़े देखकर लड़की की सिट्टी-पिट्टी गुम हो गई ।तभी वह बाघ उससे मनुष्य की आवाज में बोला ,”अब तुम यह बात अच्छी तरह समझ लो कि मैं वास्तव में कोई ब्राह्मण युवक नहीं हूं, बल्कि एक बाघ हूं। और मुझ में तुरंत कोई भी रूप ले लेने की क्षमता है।

 

अब जल्दी हम घर पहुंच जाएंगे वहां तुम्हें मेरे घर के सामने आधा दर्जन नांदे रखी दिखाई देंगे। उन नॉंदों को रोज भोजन से भरना अब तुम्हारा काम होगा।

 

Moral stories in hindi बाघ की यह बात सुनकर लड़की बुरी तरह रोने लगी, लेकिन उसके पास बाघ के साथ जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था। कुछ देर में वह बाघ के घर पहुंच गई। बाग अपनी पत्नी को घर में छोड़कर भोजन की व्यवस्था करने चला गया। थोड़ी देर बाद वह कुछ कद्दू और मांस लेकर वापस लौटा और अपनी पत्नी से स्वादिष्ट भोजन बनाने को कहा। ब्राह्मण की बेटी ने बढ़िया खाना बनाकर बाग को खिलाया। खाना खाकर बाघ अपनी पत्नी से बोला,” आज तुमने अच्छा खाना पकाया है। कल फिर मुझे ऐसा ही खाना मिलना चाहिए।” यह कहकर बाघ सो गया उसकी पत्नी काफी देर तक उसके पास बैठी सिसकती रही सिसकती सिसकते उसे भी नींद आ गई ।

अगली सुबह बाघ के जाने के बाद उसकी पत्नी ने फिर भोजन तैयार किया और सारी नांदो को भोजन से भर दिया। अब रोजाना उसका यही काम था इसी तरह समय गुजरता रहा कुछ समय बाद उसने एक पुत्र को जन्म दिया जो अपने पिता के समान एक बाघ ही था अब तो लड़की के दुःख का पार न रहा ।

बाघ के साथ रहते हुए बहुत घुटन महसूस करती थी। और किसी भी तरह वहां से भाग निकलना चाहती थी ।

एक दिन जब वह अकेली बैठी रो रही थी ।तभी एक कौआ उसके घर के बाहर आकर बैठ गया लड़की को रोते हुए देख कर वह भी रोने लगा ।

तब वह लड़की कौवे से बोली,” क्या तुम मेरी मदद कर सकते हो?”

क्यों नहीं ,”कौवे ने तुरंत कहा ।

फिर लड़की किसी पेड़ से एक बड़ी सी पत्ती ले आई और उस पत्ती पर उसने अपने भाइयों को एक पत्र लिख डाला । जिसमें उसने अपनी सारी आप-बीती उन्हें सुना कर उनसे जंगल में आकर उस बाघ के चंगुल से छुटकारा दिलाने का आग्रह किया था वह पत्र उसने कौवे के गले में बांध दिया और उसी से वह पत्र अपने भाइयों के पास पहुंचा देने का निवेदन किया ।

 

वह दयालु कौवा तुरंत पत्र लेकर उसके भाइयों के गांव की ओर चल पड़ा वहां वह उनके घर में जाकर अब उसके भाइयों के सामने जा बैठा ।भाइयों ने कौवे के गले में बंधी पत्ती खोली ,और पढ़ने लगे वह पत्र पढ़ते हुए आश्चर्य और कोध्र से कांपने लगे ।

 

उन्हें विश्वास नहीं हो रहा था कि उनका जीजा वास्तव में एक बाघ था ।तीनों भाई तुरंत अपनी बहन को वापस लाने के लिए जंगल की ओर चल पड़े ।वह अभी थोड़ी दूर ही गए थे कि उन्हें एक गधा दिखाई पड़ा ।सबसे छोटे भाई ने वह गधा भी साथ ले जाना चाहा ।

 

बड़े भाइयों ने पहले तो मना किया लेकिन बाद में वे गधे को साथ ले जाने के लिए तैयार हो गए। फिर वह आगे चल पड़े चलते चलते दोपहर हो गई ।और तीनों भाइयों को तेज भूख लगने लगी।

तब वह एक तालाब के किनारे भोजन करने जा बैठे किंतु भोजन की पोटली खोलने पर उन्होंने पाया कि वह बिल्कुल खाली था उस पोटली में एक छेद हो गया था और सारा भोजन उसे छेद से गिर गया था।

अब भूख के कारण उन्होंने उस तालाब का पानी पीकर ही अपना पेट भर लिया। फिर वह कुछ आगे चले तो उन्हें लोहे का एक बड़ा ट्ब दिखाई दिया। जो पास के ही एक गांव के धोबी का था। वह उस टब को भी साथ ले चले।

कुछ और आगे जाने पर उन्होंने एक चींटी मिली उन्होंने और चींटी को भी अपने साथ ले लिया ।बाघ के घर के पास पहुंच कर उन्होंने उससे लड़ने के लिए पेड़ भी उखाड़ लिया ।

चलते चलते वे अपने बाघ जीजा के घर पर जा पहुंचे। उस समय बाघ घर से बाहर गया हुआ था और सिर्फ उनकी बहन और उसका बच्चा घर में थे। उसकी बहन अपने भाइयों को देखकर बहुत खुश हुई और बोली ,”प्यारे भाइयों मुझे बहुत खुशी है कि मेरे पत्र पाते ही तुम लोग मुझे उस दुष्ट बाघ के चंगुल से छुड़ाने के लिए आ गए । लेकिन यह बाघ बहुत खतरनाक है । तुम जरा सावधान रहना ।

अब वह किसी भी समय घर पर लौट सकता है ।फिर भी एक साथ बैठकर दुष्ट बाग से निपटने की योजना बनाने लगे । फिर योजना के अनुसार तीनों भाई ,गधे ,चीटीं, पेड़, टब – सभी को लेकर अटारी पर चढ़ गए। उनको अटारी पर चढ़े दो मिनट भी नहीं हुए थे कि बाघ वहां आ पहुंचा ।

चतुर बाग ने वहां आते ही मनुष्य की गंध पहचान ली और अपने पत्नी से बोला ,”क्यों क्या कोई घर पर आया था?”

” मेरे भाई आपसे मिलने के लिए यहां आए हैं। वह अभी अटारी पर आराम कर रहे हैं।” उसकी पत्नी बोली।

” क्या बात है?” बाघ जोर से उन भाइयों से बोला बोलो ,” क्या कहना चाहते हो?”

तब सबसे छोटे भाई ने जो उनमें सबसे चतुर था, चींटी को गधे के कान में डाल दिया। चींटी ने गधे के कान में घुसकर जैसे ही उसे जोर से कांटा गधा कर्कश आवाज में रेंकने लगा।

” कैसी आवाज है तुम्हारे भाई की?” बाघ सकपका कर अपनी पत्नी से बोला ।

“वह आपका अभिवादन कर रहा है ।आखिर आप उसके जीजा जो है।” पत्नी ने तुरंत जवाब दिया।

” मुझे अपने पैर दिखाओ ।”बाघ ने कहा

बाघ के यह कहते ही बड़े भाई ने अपने पास रखा पेड़ अटारी से आगे कर दिया।

“बाप रे! इतना बड़ा पैर !”

बाघ के होश उड़ गए। इतना बड़ा पैर उसने कभी नहीं देखा था ।फिर भी वह हिम्मत करके बोला,” मुझे अपना पेट दिखाओ।”

उसके यह कहने पर भाइयों ने लोहे का टब आगे कर दिया ।अब तो बाघ घबराहट के कारण सिर पर पैर रखकर वहां से भाग खड़ा हुआ ।घबराहट के कारण वह बुरी तरह कांप रहा था।

फिर उसकी पत्नी ने बाघ के बच्चे को भी मार डाला और अपने भाइयों के साथ अपने घर लौट गई। moral stories in hindi

 

 

 

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