Hindi kahani| शेखचिल्ली की रोमांटिक कॉमेडी| comady Kahani

           ।।हसीन मौका  मुलाकात का ।।

 

शेखचिल्ली की कहानी प्रतीक्षा की घड़ियां जल्दी  ही समाप्त हो गई और वह घड़ी आ गई। जब मुल्ला नसरुद्दीन को अमीर के हरम में घुसने का हसीन मौका मिल ही गया ।

 

गुलजान  को एक नजर देखने के लिए उनकी आंखें तरस रही थी । हरम  के मुख्य द्वार पर आते-आते मुल्ला नसरुद्दीन ने  रास्ते का पूरा नक्शा अपने दिमाग में बिठा लिया था। पूरे रास्ते में सख्त पहरा था

हिजड़ा उन्हें लेकर एक कमरे में आ गया। कमरे में बीचों -बीच एक पर्दा लटक रहा था।

 

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उस बेशकीमती पर्दे के पीछे गुलजान एक नर्म बिस्तर पर बैठी थी । झीने पर्द के पार उधार और गुमसुम सी बैठी  गुलजान को देखकर मुल्ला  नसरुद्दीन के सीने में हुक सी उठी। और उसका दिल चाहा कि पर्दा हटा कर अंदर घुसे और अपनी गुलजान  को सीने से लगा ले। शेखचिल्ली की कहानी

 

मगर चाहकर भी वह ऐसा न कर सका।

  किसी प्रकार उसने आप पर काबू पाया और धीरे से गुलनाज को पुकारा “गुलजार ।” उसकी आवाज सुनते ही गुलजान  के मुख से हैरत और दहशत भरी चीख उबल पडी।

 

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  मुल्ला नसरुद्दीन को आशंका हुई कि घबराहट में कहीं गुलजान उसे असली नाम से ना पुकार बैठे, अंत: बड़ी जल्दी से वह बोला- मेरा नाम मौलाना हुसैन है। मैं नया हकीम नजूमी और आलिया हूँ  और अमीर की खिदमत के लिए बगदाद से आया हूं।

 

तुम समझ रही हो गुलजान। मैं….। बोलते बोलते वह रुका और अमीर की तरफ पलटा-  शायद यह मेरी आवाज सुनकर डर गई हैं। हो सकता है कि अमीरे आजम की गैर मौजूदगी में इस हिजड़े ने  इसके साथ  बदसलूकी की हो।”

 

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अमीर ने क्रोध भरी नजरों से हिजड़े   को घूरा। हिजड़ा कांपता  हुआ जमीन पर झुक गया। दहशत के मारे एक भी शब्द उसके हलक से ना निकला । ऐ गुलजान।” मुल्ला नसरुद्दीन पुनः गुलजान से मुखातिब हुआ- तुम्हारे सिर पर मौत का साया मंडरा रहा है लेकिन विश्वास रखो कि मैं तुम्हें बचा लूंगा, तुम्हें  मुझ पर पूरा भरोसा होना चाहिए।

मैं हर परेशानी मुसीबत.और रोग पर काबू पा सकता हूं।”

 

शेखचिल्ली की कहानी मुल्ला नसरुद्दीन की आवाज वह लाखों में पहचान सकती थी। ये  जानकर कि मुल्ला नसरुद्दीन उस तक आ पहुंचा है, उसकी खुशी का ठिकाना ना रहा। मगर वह सावधान भी थी। वह जानती थी कि उसकी कोई भी गलत हरकत मुल्ला नसरुद्दीन का सिर कलम करवा सकती है ।

अतः बड़ी बारीक और धीमी आवाज में वह बोली मैं आपकी बातें सुन रही हूं।

 

 मैं जानती हूं कि आप मुझे ठीक कर देंगे। मैं आप पर विश्वास करती हूं। ऐ  गुलजान। तुम जरा मुझे अपना हाथ दिखाओ ताकि मैं तुम्हारे नाखूनों की रंगत से तुम्हारी बीमारी का कारण जान सकूं । धीरे से पर्दा हीला  और रूई जैसे नाजुक हाथ बाहर आ गया ।

 

मुल्ला नसरुद्दीन ने धीरे से गुलजान  का हाथ थाम लिया। सिर्फ उसका हाथ दबाकर ही सांकेतिक भाषा में वह अपने दिल की बात कह सकता था। जब उसने हाथ दबाया तो धीरे से गुलजान ने भी उसका हाथ दबा दिया।

 

मुल्ला नसरुद्दीन ने दिल में हुक सी उडी ।

वह कोई और भी हरकत कर सकता था यदि अमीर उसके कंधे पर न झुका होता। वह बड़े गौर से एक-एक हरकत देख रहा था। मुल्ला नसरुद्दीन को अपने कंधे पर उसके सांस लेने की सरसराहट साफ सुनाई दे रही थी। मुल्ला नसरुद्दीन ने उनकी  छोटी उंगली पकड़ लि और गौर से उसका नाखून देखने लगा।

 

उसने चिंतित दृष्टि से अमीर की और देखा, और गुलजान से पूछा- कहांँ दर्द है  गुलजान?” 

“दिल में।” एक लंबी सांस लेकर वह बोली- मेरा दिल गम और चाहत से लवरेज है।

तुम्हारे गम का कारण क्या है? ” मैं जिससे मोहब्बत करती हूं उससे जुदा हूं। मुल्ला नसरुद्दीन ने अमीर के कान में कहा-” यह अमीरे आजम की जुदाई में बीमार है ।

 

यह सुनते ही अमीर का चेहरा खिल उठा ।

गुलजान पुनः बोली-  जिसे मै दिलो जान से चाहती हूं वह मुझसे जुदा है। मुझे लगता है कि मेरा प्यार मेरे बिल्कुल करीब है, लेकिन ना तो मैं उसे गले ही लगा सकती हूं और ना ही प्यार ही कर सकती हूं ।

 

हाय न जाने वह मुबारक घड़ी कब आएगी, जब वह प्यार में मुझे गले लगाएगा ।

मुल्ला नसरुद्दीन ने गहरा आश्चर्य जाहिर किया- वा अल्लाह। इतने थोडे  समय में ही शहंशाह ने इनकी दिल पर कैसा जादू कर दिया है। वाह   मरहवा । यह सुनकर अमीर की खुशी का ठिकाना ना रहा  एक जगह खड़े नही हो पा रहे थे बल्कि आस्तीन के मुँह छिपाए पागलों की भांति खी-खी करके हंस रहे थे।

 

अमीर की हरकतें देखकर पर्दे के पीछे बैठी गुलजान बड़ी मुश्किल से अपनी हंसी रोक पाई। मुल्ला नसरुद्दीन ने पुनः उसे सांकेतिक भाषा में समझाना शुरू किया। गुलजान तुम किसी प्रकार की चिंता मत करो ।मैं तुम्हें प्रत्येक खतरे से बचा लूंगा।

 

फिलहाल तो अमीर -आजम तुम्हारे करीब नहीं आ सकते, क्योंकि मैंने उन्हें आगाह कर  दिया है कि सितारों का आदेश है कि वह किसी औरत का नकाब न उलटे।

 

लेकिन इसके बावजूद तुम्हारी खुशी का दिन निकट है। सितारे धीरे-धीरे अपना अंदाज बदल रहा हैं। तुम समझ रही हो ना गुलनाज? सितारे शीघ्र ही मुबारक होंगे और तुम अपने प्यार अपने सपनों के शहजादे की बाहों में होगी। मैं जिस से जिस रोज तुम्हें दवा भेजूंगा उससे अगले रोज तुम्हारी खुशी का दिन होगा। हां दवा पिने के अगले रोज तुम तैयार रहना, आपने दामन की खुशियांँ भरने के लिए ।

 

गुलजान से यह खुशी बर्दाश्त नहीं हो पा रही थी। वह कभी  रोती कभी हंसती।

वह बोली। शुक्रिया ऐ मौलाना हुसैन। आपका लाख-लाख शुक्रिया , ऐ मौलाना हुसैन मैं समझ गई कि मेरा प्यार बिल्कुल मेरे नजदीक है। मुझे लगता है कि उसके और मेरे दिल की धड़कने एक हो गई है। मैं उसके बिना जिंदा नहीं रह सकूगी ।और फिर ;

 

उसे समझा-बुझाकर मुल्ला नसरुद्दीन की अमीर हरम से वापस लौट आए दरबार में आकर अमीर ने उसे सोने के सिक्के से भरी थैलियाँ दी। फिर मुल्ला अपने आवास की ओर बढ़ गया।

  

 

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