Short moral stories for kids in hindi सही बंटवारा

BH IjjuShort moral stories for kids in hindi सही बंटवारा एक समय की बात है , एक गांव में साबू और बाबू नाम के दो भाई रहते थे। बड़ा भाई साबू एक लालची और चालाक आदमी था, जबकि छोटा भाई बाबू सीधा साधा और दयालु था।

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दोनों भाइयों के पास पुश्तैनी जमा पूंजी के नाम पर मात्र एक कंबल ,एक गाय और एक पेड़ था। एक दिन दोनों भाइयों ने अपनी संपत्ति को आपस में बांटने का निश्चय किया। बड़ा भाई होने के नाते साबू ने इस बात का फैसला किया कि कौन सी वस्तु कब, किसके पास रहेगी ।

 

यह तय हुआ कि कंबल दिन के समय बाबू के पास रहेगा जबकि रात में उसका इस्तेमाल साबू करेगा। इसका परिणाम यह हुआ कि साबू तो रात में कंबल ओढ़ कर आराम से सोता था। जबकि बाबू ठंड से कांपता रहता था।

 

Short moral stories जब गाय के बंटवारे की बात आई तो साधु ने फैसला किया कि गाय के अगले हिस्से का मालिक बाबू होगा जबकि उस का पिछला हिस्सा उसके पास रहेगा ।इसका नतीजा यह हुआ कि गाय को खिलाने पिलाने का जिम्मा तो बाबू का हो गया। जबकि गाय दुहने उसका दूध पीने और बेचने का अधिकार साबू को मिल गया ।

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पेड़ के बंटवारे में भी साबू ने चालाकी दिखाई। उसने कहा,” पेड़ की जड़ और तना तो तुम्हारा रहेगा, जबकि उसकी शाखाएं पत्तियां और फलों पर मेरा अधिकार होगा।” सीधे-साधे बाबू ने अपने बड़े भाई की यह बात भी मान ली ।

अब पेड़ को पानी देने का जिम्मा बाबू का हो गया, जबकि साबू आराम से डालो पर चढ़कर उसके फल तोड़ता और उन्हें बेचकर पैसा कमाता। कुछ ही दिनों में बाबू अपने भाई की चालाकी समझ गया। उसने दुखी होकर यह सारी बातें अपने मित्र शंकर को बताई ।

शंकर बहुत ही समझदार आदमी था। उसने बाबू को अपने चलाक भाई से निपटने का एक उपाय सुझाया। अगले दिन जब कंबल बाबू का मिलो तो उसने कंबल को पानी में भिगो दिया। शाम को उसने गिला कबंल अपने भाई साहब को दे दिया ।

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अब तो रात में साबू की हालत खराब हो गई वह पूरी रात ठंड से ठिठुरता रहा । अगले दिन जब साबू गाय दुहने बैठा तो उसी समय बाबू ने गाय की नाक में तिनका डाल दिया।गाय ने गुस्से में साबू को दुलत्ती जमा दी short moral stories

 

तब बाबू ने झुंझलाकर बाबू से बोला ,” तुमने गाय की नाक में तिनका क्यों डाला?” यह सुनकर बाबू बोला,” क्या तुम भूल गए , हमारे बीच क्या हुआ था? गाय का अगला हिस्सा मेरा है और मैं इसके साथ कुछ भी कर सकता हूं ।”

शाम को जब साबू फल तोड़ने के लिए पेड़ पर चढ़ा तो बाबू हाथ में कुल्हाड़ी लेकर वहां आ धमका और दनादन पेड़ के तने पर कुल्हाड़ी चलाने लगा ।

यह देखकर साबू जोर से चिल्लाया,” बाबू यह क्या कर रहे हो ? अगर तुमने पेड़ काट डाला तो मैं गिर जाऊंगा।” तब बाबू बोला,” यह सब मैं नहीं जानता । बंटवारे में तना मेरे हिस्से में आया है और मैं अपने हिस्से के साथ कुछ भी कर सकता हूं।”

बाबू समझ गया कि उसका भाई इतना मूर्ख नहीं जितना वह समझता था। वह नम्र होते हुए बोला,” भाई मुझे पेड़ से नीचे उतर आने दो हम सारी चीजों का बंटवारा दोबारा करेंगे।” बाबू यही तो चाहता था। उसने साबू को नीचे उतर आने दिया।

 

फिर दोनों भाइयों ने फैसला किया कि कंबल का उपयोग बारी-बारी से करेंगे । उन्होंने गाय की देखभाल करने और पेड़ को पानी देने तथा उसके फल बेचने का काम भी साथ मिलकर करने का फैसला किया अब दोनों भाई फिर से हंसी खुशी साथ रहने लगे।
sahi bantwara

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