Short moral stories guru Kun tha hindi| kahani

     short moral stories बहुत समय पहले एक धनी गुरु था। पूरे संसार में उसके बहुत से शिष्य थे। वह बहुत प्रसिद्ध था और सभी जगह लोग उसे जानते थे। सभी लोग उस गुरु का सम्मान करते थे।

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 गुरु बहुत ही विलासिता पूर्ण तरीके से रहता था हर साल वह पालकी में बैठकर अपने धनवान शिष्यों से मिलने जाता था। सभी शिष्य गुरु को खूब दक्षिणा देते थे। और गुरु ढेर सारी दौलत लेकर अपने आश्रम में लौटता था। अपने सभी शिष्यों से मिलने में गुरु को कई महीने लगते थे।

 

   एक दिन गुरु अपने सबसे ज्यादा धनवान शिष्य से मिलने जा रहा था तभी एक पालकी उसकी पालकी के सामने रुकी और एक आदमी उसे निकलकर गुरु के सामने आ खड़ा हुआ। गुरु के चरणों में नमस्कार करके वह उसी से पूछने लगा,” महान गुरुदेव, जब तक आप मेरे प्रश्न का उत्तर नहीं देंगे मैं आप की पालकी के सामने से नहीं हटूंगा।

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   गुरु को पहले ही देर हो चुकी थी। फिर भी वह उस आदमी से बोला,”  ठीक है जो कुछ भी कहना है , जल्दी कहो मेरे पास अधिक समय नहीं है“ उस आदमी ने कहा,”  मैं स्वर्ग जाना चाहता हूं। लोग कहते हैं कि आप संसार के सबसे बड़े गुरु हैं। और किसी को भी स्वर्ग भेज सकते हैं आप मुझे भी स्वर्ग भेज दीजिए।“  

 उस

गुरु हंसकर उससे बोला,” अच्छा तो तुम स्वर्ग जाना चाहते हो । यह तो बहुत आसान है। आकाश की ओर हाथ करके तुम खुले मैदान में खड़े हो जाओ । कभी ना कभी तुम स्वर्ग जरूर पहुंच जाओगे।

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 Short moral stories   इससे पहले कि वह आदमी कुछ और पूछता गुरु ने अपने आदमियों को पालकी आगे ले चलने का आदेश दिया ।बारह सालों बाद वह गुरु फिर उसी रास्ते से गुजरा। उसने उस आदमी को आकाश की ओर दोनों हाथ उठाए खड़े हुए देखा।

 

    वह आकाश की ओर एकटक देख रहा था। उसकी लंबी सफेद दाढ़ी थी। वह बहुत दुबला हो गया था और बहुत ही थका हुआ लग रहा था। उसके नाखून लंबे और गंदे हो गए थे।

 

    कुल मिलाकर उसकी हालत बहुत ही दयनीय थी। तभी गुरु को याद आया कि वह तो वही आदमी है, जो बारह साल पहले उससे स्वर्ग जाने का रास्ता पूछ रहा था गुरु को उस आदमी की मूर्खता पर हंसी आ गई। उसने मन में सोचा,‘ इतने बड़े मूर्ख दुनिया में कम ही होंगे।

 

      गुरु ने अपने शिष्यों से पालकी रोकने को कहा। वह उस आदमी से बात करके उसे समझाने के लिए उसकी ओर बढ़ा। तभी एक चमत्कार हुआ। वह बेवकूफ आदमी आकाश की ओर उड़ने लगा।

 

       यह दृश्य देखकर गुरु हैरान रह गया संसार का समूचा आश्चर्य उसकी आंखों में उतर आया था। अब उसने एक क्षण भी व्यर्थ नहीं किया वह भागता हुआ उस आदमी के पास पहुंचा और उसके पैर पकड़ कर लटक गया उसके साथ वह भी स्वर्ग जा पहुंचा तब जाकर गुरु को यह बात पता लगी कि श्रद्धा और समर्पण भाव का जीवन में कितना महत्व होता है। आज वह आदमी उसके लिए गुरु से कम नहीं था। क्योंकि उसी से उसने यह बात सीखी थी। Short moral stories

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