Short moral stories in hindi | very short story in hindi

Short moral stories in hindi नमस्कार दोस्तों आज मैं आपके लिए एक नहीं कई कहानियां लेकर आया हूं। जिसे पढ़कर आपका मनोरंजन और ऐसी कई बातें पता चलेगी जो हमें सिर्फ ‌‌‌कहानियों के जरिए ही पता चलती है ‌‌‌‌‌तो चलिए शुरू करते हैं पढ़ना Short moral stories in hindi    

                       (#1) शिकारी का समर्पण

Short moral stories in hindi

Short moral stories in hindi यह कहानी आंध्रप्रदेश के श्री काल हस्ति मंदिर से जुटी है यह मंदिर भगवान शिव का है। तेलुगु भाषा में श्री का अर्थ मकड़ा,काल का अर्थ सांप और हस्ति का अर्थ हाथी होता है कहा जाता है कि बहुत समय पहले यह तीनों प्राणी भगवान शिव की उपासना करते थे।

यही कारण है कि इस मंदिर को श्री काल हसस्ती मंदिर कहते हैं, यह मंदिर स्वर्णमुखी नदी के निकट स्थित है ।

बहुत समय पहले की इस क्षेत्र में एक शिकारी रहता था। जंगल में जानवरों का शिकार करके ही वह अपना और अपनी बीवी का पेट पालता था। वह भगवान शिव परम भक्त था भगवान शिव की आराधना किए बिना वह कोई भी कार्य नहीं करता था वपह भोजन करना भले ही भूल जाता था। लेकिन भगवान शिव की पूजा करना वह किसी भी स्थिति में नहीं भूलता था ।

उसकी बीवी अक्सर इसके लिए उसे खरी-खोटी सुनाती रहती थी लेकिन इससे शिकारी के समर्पण और श्रद्धा पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता था।

एक दिन भगवान शिव ने अपने भक्तों की परीक्षा लेने का निश्चय किया वह देखना चाहते थे कि शिकारी के मन में उसके प्रति कितना प्रेम है और वह उनके लिए किस सीमा तक त्याग कर सकता है।

Short moral stories in hindi उस दिन जब शिकारी पूजा करके करने के लिए मंदिर में गया तो वह एक दृश्य देखकर ठगा सा रह गया शिवलिंग पर बनी बाई आंख से खून बह रहा था विना एक क्षण गवाएं ।शिकारी ने तुरंत चाकू उठाया और

उसकी मदद से अपनी  बाई आंख निकाल कर बाई आंख की जगह लगा दी।वहां आंख लगते ही उस जगह से खून बहना रुक गया ।इसके बाद शिकारी पूरी श्रद्धा के साथ पूजा करने लगा ।

पूजा समाप्त करने की करने के बाद उसे भगवान शिव को भोजन अर्पित किया परंतु वह शिकारी ने भगवान शिव के सामने भोजन रखा तो यह देखकर हैरान रह गया कि इस बार शिवलिंग पर बनी दाई आंख से खून बह रहा है ।

शिकारी ने तुरंत अपनी दाईं आंख निकालने के लिए चाकू उठाया तभी उसके मन में विचार आया। अगर मैंने दूसरी आंख भी निकाल ली तो मैं अंधा हो जाऊंगा फिर मुझे यह कैसे पता चलेगा कि किस जगह से खून बह रहा है ।तब यही मैं गलती से गलत जगह आंख ना लगा दू।

अब तो शिकारी असमंजस में पड़ गया वह निश्चित नहीं कर पा रहा था कि अब वह करे तो क्या करें मंदिर के आसपास भी कोई नहीं था जो उसकी सहायता कर सके ।

तभी शिकारी के दिमाग में एक विचार आया उसने सोचा मुझे घाव वाली जगह पर अपना हाथ रख लेना चाहिए ।फिर मैं आसानी से अपनी आंख निकाल कर सही जगह लगा सकूं इसके बाद उसने अपना हाथ शिवलिंग पर बनी दाएं आंख पर रखकर अपनी दाईं आंख निकाल ली। जैसे ही उसने ऐसा किया मंदिर में घंटियां बजने लगी।

भगवान शिव स्वयं उसके सामने प्रकट हो गए उनके शिकारी के सिर पर हाथ रखते ही वह. फिर से देखने में सक्षम हो गया भगवान शिव शिकारी से बहुत प्रसन्न थे। वह उसे आशीर्वाद देकर अंतर्धान हो गए शिकारी भी भगवान का गुणगान करता हुआ अपने घर लौट गया ।

(#2)डम डम डिगा डिगा ।।

 Short moral stories in hindi बहुत समय पहले एक घने जंगल में एक शैतान बंदर रहता था। उसने अपनी शैतानियां से अपने सभी बंदरों की भी नाक में दम कर रखा था। कभी वह उनका सामान छीनकर खा जाता। तो कभी उनकी पूंछ खींचता।

एक दिन जब वह एक पेड़ पर चढ़कर बेर तोड़- तोड़कर खा रहा था। तभी उसकी पुंछ में एक कांटा घुस गया। अब तो वह दर्द के कारण परेशान हो गया। उसने अपनी पूंछ से कांटा निकालने की बहुत कोशिश की लेकिन वह कामयाब ना हो सका। तभी उसके दिमाग में एक विचार आया।

फिर वह दौड़ता हुआ। पास के एक गांव में जा पहुंचा। वहां उसने एक नाई के घर का दरवाजा खटखटाया। जब नाई ने घर का दरवाजा खोला तो बाहर एक बंदर को खड़ा देखकर वह आश्चर्यचकित रह गया।

फिर बंदर विनम्रतापूर्वक नाई से बोला दोस्त, मेरी पूछ में कांटा घुस गया है। अगर तुम उसे निकाल दो तो मैं तुम्हें बढ़िया इनाम दूंगा। यह सुनकर नाई अपना उस्तरा लाकर उसकी पूंछ से कांटा निकालने की कोशिश करने लगा ।

लेकिन गलती से वह बंदर की पूंछ का सिरा काट बैठा ।अब तो वह आगबबूला हो उठा और जोर से नाई पर चिल्लाया ,”मेरी पूछ मुझे वापस दो या फिर अपना उस्तरा मुझे दे दो ,”।

बेचारा नई बंदर को पूछ कैसे वापस करता आखिरकार उसे अपना उस्तरा ही बंदर को देना पड़ा। बंदर उस्तरा लेकर वापस जंगल में आ गया। फिर वह उस्तरा लेकर पेड़ों पर चढ़ गया और उछल कूद मचाने लगा।

उसे उस्तरा मिलने पर बहुत खुशी हो रही थी और वह सोच रहा था कि उस उस्तरे को किस तरह इस्तेमाल करें तभी उसकी दृष्टि एक बूढ़ी औरत पर पड़ी जो एक पेड़ से लकड़ियां काट रही थी।

लकड़िया काटते काटते उसका दम फूल गया तो वह हाफने लगी,” दादी मां दादी मां बंदर उस बुढ़िया से बोला ,”इस पेड़ की लकड़ी बहुत कठोर है।

ऐसा करो तुम मेरा उस्तरा ले लो इससे यह पेड़ जल्दी कट जाएगा बंदर की यह बात सुनकर बूढ़ी औरत खुश हुई। उसने बंदर से वह उस्तरा लेकर उसे धन्यवाद दिया और फिर उसी उस्तरा से लकड़ी काटने लगी लेकिन थोड़ी ही देर में उस्तरा घिस गया।

बंदर तो इसी मौके का इंतजार कर रहा था वह तुरंत बोला दादी मां तुमने मेरा उस्तरा खराब कर दिया है। अब मुझे नया उस्तरा दिलवाओ या अपनी लकड़ियां मुझे दे दो।

बुड़िया के पास नया उस्तरा खरीदने के लिए पैसे नहीं थे ,इसलिए उसने अपनी सारी लकड़ियां बंदर को देनी पड़ी ।अब बदमाश बंदर अपने सिर पर लकड़ियों का गट्ठर लादकर उन्हें बेचने के लिए एक गांव की ओर चल पड़ा ।

रास्ते में उसने एक बुढ़िया को सड़क के किनारे दलिया बनाते हुए देखा उस बुढ़िया का ईंधन खत्म होने वाला था यह देखकर वह बुढ़िया से बोला दादी मां आप मेरी लकड़ियां ले लीजिए तब उस बुढ़िया ने बंदर को धन्यवाद दिया और लकड़ियों को जलाकर दलिया पकाने लगी।

बुढ़िया ने दलिया पकाने में बंदर की सारी लकड़िया जला दी तब चालाक बंदर उस बुढ़िया को बोला तुमने मेरी सारी लकड़ियां जला दी। अब या तो मेरी लकड़ियां मुझे वापस करो या अपना दलिया मुझे दे दो।

बेचारी बुढ़िया लकड़ियां तो वापस कर नहीं सकती थी, इसलिए उसे अपना सारा दलिया बंदर को देना पड़ा ।फिर बंदर दलिया लेकर उछलता कुदता  जंगल की ओर चल पड़ा वह यह सोच कर बहुत खुश था कि उसने पूंछ के बदले उस्तरे के बदले लकड़ियां और लकड़ियों के बदले दलिया हासिल कर लिया था ।

तभी जंगल के रास्ते में उसे एक नगाड़े वाला मिल गया उसे देखकर लगा रहा था कि वह बहुत दिनों से भूखा है ।अब बंदर उसके पास जाकर बोला,” भैया लगता है आपको भूख लगी है, चिंता मत करो मेरे पास यह स्वादिष्ट दलिया है ।तुम अपना यह नगाड़ा मुझे दे दो और इसके बदले में मैं तुम्हें अपना दलिया दे दूंगा।,” उस नगाड़े वाले को उस समय बहुत तेज से भूख लग रही थी इसलिए उसने तुरंत बंदर का प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।

उसने बंदर को अपना नगाड़ा दे दिया और उससे दलिया ले लिया फिर वह वहीं बैठकर मज़े से दलिया खाने लगा इधर नगाड़ा पाकर बंदर बहुत प्रसन्नता से फूला न समा रहा था वह नगाड़ा लेकर एक पेड़ की सबसे ऊंची डाल पर चढ़ गया। और नगाड़ा बजाता हुआ अपने कारनामों से भरा गीत गाने लगा।

पूछ देकर मैंने उस्तरा कमाया ।,डम डम 

उस्तरा देकर मैंने लकड़िया कमाई ।,डम , डम

लकड़िया देकर मैंने दलिया कमाया डम ,डम।

दलिया देकर मैंने नगाड़ा बजा या डम ,डम”

(#3)     ( एक राजा का जीवन।)

Short moral stories in hindi एक दिन श्रीरंगपटट्नम का राजा जंगल में शिकार खेलने गया। राजा के जंगल जाने के बाद उसका नौकर नजैया उसका शयनकक्ष साफ करने लगा शयनकक्ष साफ करते हुए अचानक नजैया के मन में आया क्यों ना थोड़ी देर राजा के बिस्तर पर लेटने का मजा लिया जाए ।

यह सोचकर वह राजा के कोमल और आरामदेह बिस्तर पर लेट गया। और जल्दी ही उसे झपकी आ गई तभी राजा शिकार करके लौट आया जब उसने नौकर को अपने बिस्तर पर सोते हुए देखा ।तो उसे कोध आ गया । उसने नौकर को हिलाकर जगाया ।

राजा को सामने देखकर नौकर घबरा गया तथा हड़बड़ाकर उठ गया। लेकिन फिर वह हंसने लगा ,कि थोड़ी देर बाद उसने रोना शुरू कर दिया। नौकर का इस तरह व्यवहार देखकर राजा भी हैरान रह गया ,और उसने नजैया से पूछा तुम पहले हंसे और फिर रोने लगे ।

तुमने ऐसा क्यों किया? तब नजैया ने उत्तर दिया ; महाराज शाही बिस्तर बहुत ही आरामदायक था उस पर लेटकर मुझे बहुत आनंद प्राप्त हुआ इसलिए मुझे हंसी आ गई लेकिन इस तरह लेट कर मुझे यह भी पता चला कि शाही बिस्तर पर लेटने वाला व्यक्ति कितना चिंताओं और परेशानियों से घिर जाता है ।

यह सोच कर मुझे रोना आ गया नौकर की सच्चाई पर खुश होकर राजा ने उससे कहा तुमने ठीक कहा नजैया । राजा का बिस्तर फूलों की सेज नहीं है यह तो कांटों का विस्तर है इस बिस्तर देखने में तो कोमल लगता है।

लेकिन इस पर कभी भी चैन की नींद नहीं आती क्योंकि राजा इस पर लेट कर हमेशा अपनी प्रजा के कल्याण के बारे में सोचता रहता है ।यह बिस्तर बहुत सी समस्याओं और कठिनाइयों से भरा हुआ है ।इसकी ऊपरी कोमलता से धोखा नहीं खाना चाहिए यह कहकर राजा ने नजैया क्षमा कर दिया।

        (#4)  घोड़े का चोर ।

Short moral stories in hindi

Short moral stories in hindi बहुत समय पहले एक गांव में अचूतन नाम का एक व्यापारी रहता था। एक दिन अपने घोड़े पर सवार होकर वह एक अन्य गांव में रहने वाले अपने एक दोस्त से मिलने गया।

चलते-चलते जब वह बहुत थक गया, तो उसने एक पेड़ के नीचे आराम करने का फैसला किया। फिर उसने अपने घोड़े को वहीं पर बांधा और पेड़ की छाया में लेट गया। जल्दी ही उसे नींद आ गई। कुछ देर बाद जब उसकी आंख खुली तो उसने अपने घोड़े को गायब पाया।

घोड़े को ढूंढते ढूंढते वह शहर जा पहुंचा वहां उसने अपने घोड़े को एक अजनबी के साथ देखा। जब उसने उस अजनबी से अपना घोड़ा मांगा तो वह उससे झगड़ने लगा। उसका कहना था कि घोड़े का असली मालिक वही है। फिर वह अपने झगड़े का निपटारा कराने का एक न्यायाधीश के पास गया न्यायाधीश भी उसकी बात सुनकर चकरा गया उसे भी इस झगड़े का फैसला करना मुश्किल लग रहा था।

जब अचूतन ने अपनी बात साबित करने का एक तरीका सोचा उसने झटपट घोड़े के चेहरे को एक मोटे कपड़े से ढक दिया। और अजनबी से पूछा बताओ घोड़े की कौन सी आंख फूटी है।

यह अजनबी उसका सवाल सुनकर घबरा गया । फिर वह कुछ सोच कर बोला कि घोड़े की बाई आंख से काना है। तब अचूतन ने न्यायाधीश को दिखाया कि घोड़े की दोनों आंखें बिल्कुल ठीक है। घोड़े के मालिक का फैसला हो चुका था। न्यायाधीश ने वह घोड़े अचुतन को दे दिए दे दिया और उस अजनबी को झूठ बोलने के लिए कोड़े लगाने की सजा दी।

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