Top 10 moral stories in hindi |very short stories in hindi

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                दो कुत्तों की कहानी
Very short stories in hindi एक बार एक कुत्ता मुंह में हड्डी दबाकर किसी अज्ञात स्थान की खोज में जा रहा था। जहां उसे तंग करने वाला कोई और ना हो और वह आराम से बैठकर हड्डी का मजा ले सके।
तभी उसके रास्ते में एक छोटी नदी आ गई जिसे वह पुलिया से पार करने लगा। तभी नीचे नदी के पानी में उसकी अपनी ही परछाई दिखाई थी ।
लेकिन उस कुत्ते ने सोचा कि पानी में कोई दूसरा कुत्ता है। और उसके मुंह में भी हड्डी है। बस लालची कुत्ते ने आगे पीछा सोचे बिना नदी में छलांग लगा दी ।
ताकि वह उस कुत्ते से भी हड्डी छीन सके। नदी में कूदने के बाद कुछ देर तो उसने हड्डी मुख में दबा कर रखी पर हकीकत क्या है ।वह जान चुका था कुछ क्षण बाद उसे सांस लेने में मुंह खोलना ही पड़ा ।

और जैसे ही उसका मुंह खुला हड्डी पानी में जा गिरी। मयूस सा मुंह लेकर वह कुत्ता किसी तरह नदी से बाहर निकला और अपने किए पर पछताने लगा।

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                     कौन रहा घाटे में?
 Very short stories in hindi एक यूनानी घुड़सवार के पास एक पालतू घोड़ा और एक बैल था ।
        एक दिन जब उन्हें पता चला की लड़ाई छिड़ गई है। और सैनिक को जाना होगा तो घोड़ा चिंता में पड़ गया उसे अपने प्राणों की चिंता सताने लगी कि ना जाने लड़ाई में के मैदान में क्या होगा ,उधर बैल अपने मालिक के जाने की खबर सुनकर बेहद खुश था।
        उसे आराम करने का मौका जो मिल जाना था लेकिन होनी को तो कुछ और ही मंजूर था ।शत्रु सेना ने जल्द ही हथियार डाल दिए और सैनिक अपने घर लौट आया। कुछ और सैनिक उसके साथ जिसकी दावत का इंतजाम करना था। दावत में भुने मांस का भी प्रबंध था अब आप  स्वयं बताएं कौन घाटे में रहा होगा
                    बंदर और मछुआरे का जाल।..
         नदी के किनारे लगे एक पेड़ की ऊंची साख पर एक बंदर बैठा था। तभी वहां एक मछुआरा आया और उसने जोर से घुमाकर नदी में जाल डाल दिया।
बंदर सब कुछ बड़े ध्यान से देख रहा था कुछ देर बाद मछुआरे ने जाल निकालकर किनारे पर रखा और खाना खाने लगा। तभी एक बंदर पेड़ से उतरकर जाल के पास आ खड़ा हुआ ।
        फिर उसने ठीक उसी तरह से नदी में जाल डालने की कोशिश की जैसे मछुआरे ने डाला था ।लेकिन यह क्या जाल तो नदी में गिरने के बजाय खुद बंदर पर ही आ गिरा बंदर बेचारा जाल में फस गया ।
       वह जितनी कोशिश करता जाल में से निकलने की उतना ही वा उलझता जाता ।अब बंदर को अपनी गलती का पता चला कि नकल करने के चक्कर में वह क्या कर बैठा।
             भेड़िए का अनुरोध
        एक भेड़िया बीमार होने के कारण शिकार करने में लाचार था। और कई दिनों से भूखा यूं ही पड़ा था ।एक दिन उसने नदी के किनारे एक भेड़ को पानी पीते देखा तो उसने मुंह में पानी भर आया ।
       वाह कितना बढ़िया भोजन है मेरे लिए भेड़िए ने सोचा वह अपनी जगह पर बैठे-बैठे बोला,” भेड़ बहाना क्या तुम नदी से मेरे लिए थोड़ा पानी ला सकती हो आज मेरी तबीयत बहुत खराब है ,मैंने कुछ खाया भी नहीं है। थोड़ा पानी पीकर मैं भोजन की खोज में जाने लायक हो जाऊंगा।”
          भेड़ समझदार थी बोली भेड़िए भाई यदि मैं पानी लेकर तुम्हारे पास आ गई तो तुम्हें भोजन तलाशना ही नहीं पड़ेगा कहकर भेड़ विपरीत दिशा की ओर चल दी।
                    गैबरील और उसके पंख
       Very short stories in hindi यह तब की बात है। जब चंद्रमा पहली बार अस्तित्व में आया था। और सूरज की भांति ही गर्म और चमकीला था ।
       तब धरती पर रहने वालों को यह पता लगाना मुश्किल होता था। कि कब दिन हुआ और कब रात उन्हें सोने में और सो कर उठने में भी परेशानी होती थी ।
        क्योंकि वह सब का अनुमान ही नहीं लगा पाते थे, लोगों की यह परेशानी देखकर ईश्वर के देवदूत गैबरील से चंद्रमा के एक भाग को ढक देने को कहा।
         ताकि प्रकाश कुछ कम हो जाए कहा जाता है कि तब गैबरील ने अपने पंख फैलाए और चांद को ढक लिया आज जो हम चांद पर पड़े निशान देखते हैं। वह गैबरील के पंखो की रगड़ से के हैं

              

        चील की कृतज्ञता‌‌

      Very short stories in hindi एक दिन जब एक चरवाहा जंगल में भेड़ों को चरा रहा था। तो उसे एक चील जाल में फंसी दिखाई दी चील को दयनीय अवस्था में देखकर उसका दिल पसीज गया और उसने उसे मुक्त कर दिया।
       कुछ दिनों बाद वही चरवाहा आराम करने अनजाने में एक जैसी चट्टान पर जा बैठा जो ।ऊंची पहाड़ी के कोने पर जरा सी टिकी हुई थी तभी एक चील ने झपट्टा मारा और उसकी पगड़ी लेकर उड़ गया।
       गुस्से से भरा चरवाहा उसके पीछे भागा पर परंतू जैसे ही वह उठा चट्टान लूढकती हुई ,भीषण आवाज करती हुई गहरी खाई में जा गिरी यह देखकर चरवाहा समझ गया कि वह वही चील थी ।
       जिसे उसने जाल से मुक्त कर दिया था ,और उस चील ने उसकी जान बचाने के लिए कृतज्ञतावंश ऐसा किया है।
    मां का प्यार 
      Very short stories in hindi   एक परी थी एक बार उसने घोषणा की जिस प्राणी का बच्चा सबसे ज्यादा सुंदर होगा उसे कीमती पुरस्कार दे दूंगी ।
         यह सुनकर सभी प्राणी अपने अपने बच्चों के साथ एक स्थान पर इकट्ठा हो गए परी ने एक-एक कर सभी बच्चों को ध्यान से देखना शुरू किया। जब उसने बंदरिया की चपटी नाक वाले बच्चे को देखा तो वह बोल उठी थी कितना कुरुप है ,
          यह बच्चा इसके माता-पिता को तो कभी पुरस्कार नहीं मिल सकता, परी की यह बात सुनकर बच्चे की मां को बहुत ही दुःख हुआ कि उसके बच्चे के लिए कोई ऐसी बात बोले,उसे मंजूर न था।
          उसने अपने बच्चे को अपने सीने से लगा लिया ।और उसके कान के पास अपना मुंह ले जाकर कहा तू चिंता ना कर मेरे लाल मैं तुझे इस दुनियां में सबसे ज्यादा प्यार करती हूं मेरे लिए तो तू ही है सबसे बड़ा पुरस्कार मैं कोई दूसरा पुरस्कार प्राप्त करना नहीं चाहती हूं, भगवान तुझे लंबी उम्र दे।
                 असली मां 
     Very short stories in hindi एक बार दो औरतें एक बच्चे के लिए झगड़ रही थी। दोनों स्त्री यह दावा कर रही थी कि वही उस बच्चे की असली मां है ।
       जब किसी तरह झगड़ा नहीं सुलझा तो लोगों ने उन दोनों को न्यायाधीश के सामने पेश किया न्यायाधीश ने ध्यान पूर्वक दोनों की दलीलें सुनी न्यायाधीश के लिए भी यह निर्णय करना मुश्किल हो गया कि वह बच्चे की असली मां कौन थी, न्यायाधीश ने बहुत सोच-विचार किया।
          आखिरकार उसे एक उपाय सूझा उसने अपने कर्मचारी को आदेश दिया इस बच्चे के दो टुकड़े कर दो और एक-एक टुकड़ा दोनों स्त्रियों को दे दो न्यायाधीश का आदेश सुनकर उनमें से एक स्त्री ने रोते- रोते हुए कहा ,”नहीं नहीं ऐसा मत करो रहम करो सरकार, आप भले ही यह बच्चा इस स्त्री को दे दो लेकिन मेरे बच्चे को जिंदा रहने दो, मैं यह बच्चा इस औरत को देने को तैयार हूं मैं अपना दावा छोड़ देती हूं,।” पर दूसरी स्त्री कुछ नहीं बोली वह चुपचाप यह सब देखती रही।
         अब चतुर न्यायधीश को मालूम हो गया कि वह बच्चे की असली मां कौन है उसने बच्चा उस स्त्री को सौंप दिया जो उस पर अपना दावा छोड़ने के लिए तैयार थी उसने दूसरी स्त्री को जेल भेज दिया नौ
               बंदर का न्याय 
        एक बार लोमड़ी और भेड़िए किसी बात को लेकर झगड़ रहे थे ।दोनों एक दूसरे पर आरोप लगाए जा रहे थे। लोमड़ी का कहना था कि भेड़िए ने उसे धोखा दिया है उसे लूट लिया है।
        जबकि भेड़िया कह रहा था कि लोमड़ी ने उसके साथ बेईमानी की है। जब दोनों अपनी बात पर अडे रहे तब जंगल के और जानवरों ने उन्हें न्यायालय की शरण में जाना जाने की सलाह दी।
        जहां न्यायाधीश के आसन पर बंदर विराजमान था। पूरा मामला बेहद अटपटा तथा उलझन भरा था। अतः बंदर भी कुछ समझ नहीं पाया कि क्या करें उसका धैर्य भी टूटता जा रहा था ।जिस दिन फैसला सुनाने का दिन आया तो बंदर ने आदेश दिया कि दोनों ही दोषी हैं ।
       भेड़िया सिद्ध ही नहीं कर पाया कि लोमड़ी ने चोरी की है ।लेकिन जंगल के सभी जानवर यह जानते थे कि लोमड़ी स्वभाव से ही चोर होती है । सभी जानवरों में यह फैसला किया की लोमड़ी को जंगल में नहीं रहने दिया जाएगा इसे यह जंगल छोड़ कर जाना होगा।
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